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अनंत हेगड़े के बिगड़े बोल के खिलाफ खुला पत्र....

संविधान बदल देने के विवादित बयान के बाद से देश के कोने-कोने से अनंत कुमार हेगड़े के खिलाफ विरोध के स्वर उठ रहे हैं, हालांकि हेगड़े ने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है लेकिन हेगड़े के माफीनामे के बावजूद संविधान का सम्मान करने वालों का रोष कम होता नहीं दिख रहा है। 
भारतीय मूलनिवासी संगठन ने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को खुला पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने अनंत कुमार हेगड़े को बर्खास्त करने और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई है। हम वो पत्र उसी रूप में यहां प्रकाशित कर रहे हैं।


विषयः मा0 मंत्री श्री अनंत हेगड़े की बर्खास्तगी तथा इनके विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराने के सम्बन्ध में।

आदरणीय महोदय,

यह मत पूछो कि कत्ल का गुनाहगार कौन है, 
कातिल वह भी है जो कत्ल देखते हुए भी मौन है!
यहां मैं यह बताने की कोशिश कर रहा हूँ कि अपनी आंखों के सामने अपने अस्तित्व पर हमला होते देख खामोश रहना भी बेहद शर्मनाक है। इस बात का श्री अनंत हेगड़े (केंद्रीय भाजपा मंत्री) के बयान के बाद हमारी खामोशी से सीधा ताल्लुक है। संविधान की रक्षा करने की बात करने वाली ‘‘संसद’’ और ‘‘सांसद’’ तथा ‘‘न्यायपालिका’’ उनके बयान पर चुप्पी साधे बैठे हैं। कुछ दिन पहले कर्नाटक में ‘‘ब्राह्मण युवा परिषद’’ के कार्यक्रम में लोगो को संबोधित करते हुए श्री अनंत हेगड़े का बयान इस प्रकार है-
हेगड़े बयान-1 हम सत्ता में आये ही है संविधान बदलने के लिए (We are here to change the Constitution)।
हेगड़े बयान-2 जो धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करते हैं, उनके माता-पिता और खून की कोई पहचान नहीं। 
हेगड़े बयान-3 लोगों को खुद की पहचान धर्मनिरपेक्ष के बजाय धर्म और जाति के आधार पर करनी चाहिए। 

श्री अनंत हेगड़े पर देशद्रोह का मुकदमा क्यों दर्ज हो-?
श्री अनंत हेगड़े शायद यह भूल गए हैं कि मंत्री पद ग्रहण करने से पहले इन्होंने शपथ ली थी कि- मैं अमुक ईश्वर की शपथ लेता हूं/सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा रखूंगा...... भय, पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार कार्य करूंगा।

श्री अनंत हेगड़े का बयान इस बात का गवाह है कि इन्होंने शपथ ग्रहण करते वक्त जो संविधान के प्रति श्रद्धा रखने तथा संविधान के अनुसार कार्य करने की कसम खाई थी वह पूर्णतः झूठ थी। इनका बयान इस बात का प्रमाण है कि ये संविधान में नहीं बल्कि आज भी अपने धर्म शास्त्रों में उल्लेखित शोषणकारी दंडविधान (मनुस्मृति) में यकीन रखते है और उसी के अनुसार देश में शासन करना चाहते है। वह व्यक्ति जो समता, स्वतन्त्रता और बन्धुत्व पर केंद्रित संविधान तथा संविधान के रचयिता का अपमान करता है वह स्पष्ट रूप से देशद्रोह के दायरे में आता है। इसलिए श्री अनंत हेगड़े पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए!             
                     
श्री अनंत हेगड़े ने संविधान में उल्लेखित पंथनिरपेक्षता का मजाक उड़ाया है। पंथनिरपेक्ष लोगों को गाली देते हुए उनके खून पर सवाल उठाया है। क्या श्री अनंत हेगड़े यह भूल गए हैं कि 28 अप्रैल 2014 को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एक टीवी चैनल में दिए गए इंटरव्यू में कहते हैं कि धर्मनिरपेक्षता केवल संविधान में ही नहीं बल्कि हमारे रगों में भी है।    
                                                           
श्री अनंत हेगड़े ने अपने वक्तव्य में जो बातें कही है वह प्रधानमंत्री पर भी लागू होती है? धर्मनिरपेक्षता संविधान की आधारभूत संरचना है और वह व्यक्ति जो संविधान की आधारभूत संरचना पर हमला करता है या उसे चोट पहुंचाता है, वह स्पष्ट रुप से देशद्रोह के दायरे में आता है। इसलिए श्री अनंत हेगड़े पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए!

श्री अनंत हेगड़े ने कहा है कि लोगों को धर्मनिरपेक्षता नहीं बल्कि अपनी पहचान जाति और धर्म के आधार पर करनी चाहिए। आगे बोलते हुए श्री हेगड़े ने संविधान की तुलना अंबेडकर स्मृति से की है। खैर, ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य तो अपनी पहचान अपनी जातियों के आधार पर कर सकते हैं किन्तु शूद्र, अछूत तथा महिलाएं किस पहचान पर गर्व करेंगे? जिनकी हिंदू धर्म शास्त्रों में कोई पहचान ही नहीं है अगर है भी तो नीचता और दासता की पहचान है। आज भी देश का यह सबसे बडा वर्ग आइडेंटिटी की ही लड़ाई लड़ रहा हैं। 

भारत का संविधान एक जीवंत कानून है। जिसे समय तथा परिस्थिति के अनुसार ढाला जा सकता है। दुनिया के अनेक देशों के संविधान का गहन अध्ययन करके और उन्हें समझकर व परखकर ही बाबा साहब डॉ0 भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान का ड्राफ्ट तैयार किया गया था। जिसमें जातिविहीन समाज और पंथनिरपेक्ष समाज की परिकल्पना की गई है। श्री हेगड़े का बयान पूरी तरह से जातिवाद और छुआछूत तथा धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देने की तरफ इशारा करता है। जो संविधान की मूलभावना के खिलाफ है। लिहाजा श्री हेगड़े का बयान स्पष्टतः देशद्रोह के दायरे में आता है। इसलिए श्री अनंत हेगड़े पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए!

उपरोक्त अत्यंत गम्भीर आरोपों के मद्देनजर मेरा आपसे नम्रतापूर्वक निवेदन है कि कृपया इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेकर श्री अनंत हेगड़े के उपरोक्त देशद्रोही बयान को गंभीरता से लेते हुए इन्हें केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल से बर्खास्त करें तथा इनके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा तत्काल दर्ज कराकर विधि के अनुसार दंडित कराएं। 

महोदय यदि आप ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं, तो फिर भारतीय संविधान में आस्था रखने वाले हम सभी मूलनिवासी बहुजनो को ही जेल में कैद कर देना चाहिए! क्योंकि बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित भारतीय संविधान के बिना दासतापूर्ण और गुलामगिरी का हमारा जीवन ही व्यर्थ और औचित्यहीन है! 
अत्यंत सम्मान सहित !
भवदीय
सूरज कुमार बौद्ध
(छात्र एलएलएम प्रथम वर्ष)
राष्ट्रीय महासचिव,
भारतीय मूलनिवासी संगठन 
दिनांकः 28 दिसम्बर 2017 

मुख्य संवाददाता
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