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सोनिया गांधी की डिनर डिप्लोमेसी : कांग्रेस समेत 20 विपक्षी दलों के नेता डिनर पार्टी में हुए शामिल, 2019 के आम चुनाव में बीजेपी को मात देने की दिशा में पहला कदम

केंद्र की सत्ता से बाहर रहने का दंश झेल रही कांग्रेस ने फिर से राजनीति की मुख्य धारा में आने के लिए कोशिशें शुरू कर दी हैं। इसी दिशा में पहला कदम बढ़ाते हुए यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को अपने आवास 10 जनपद पर डिनर पार्टी का आयोजन किया। जिसमें कांग्रेस, सीपीआई-एम, सीपीआई, टीएमसी, बीएसपी, एसपी, जेडी-एस, आरजेडी, एनसीपी, आरएलडी समेत 20 राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। इस दौरान विपक्षी दलों के नेताओं ने 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को हराने के लिए संयुक्त मोर्चा का गठन करने समेत कई अहम मुद्दों पर मंथन किया।           


 
नई दिल्ली स्थित 10 जनपद  मंगलवार रात्रि में देश की 20 राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की उपस्थित से गुलजार रहा। मौका था सोनिया गांधी की डिनर पार्टी का। एनडीएन के खिलाफ पूरे विपक्ष को एकजुट करने के उद्देश्य से बुलाई गई इस डिनर पार्टी में विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने जहां लजीज पकवानों का स्वाद चखा वहीं देश के ताज़ा सियासी हालात और भविष्य की रणनीति पर गंभीरता के साथ चिंतन किया। डिनर पार्टी में शामिल नेताओं ने संसद न चलने पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार की जवाबदेही तय कर उसे घेरने पर मंथन किया। इसके साथ ही पीएनबी बैंक महाघोटाले पर मोदी सरकार से संसद में जवाब मांगने की रणनीति और महाराष्ट्र के किसान आंदोलन पर भी विचार विमर्श किया।



सोनिया गांधी की इस डिनर पार्टी में कांग्रेस की तरफ से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, एके एंटनी, रणदीप सुरजेवाला शामिल हुए। जबकि अन्य विपक्षी दलों में एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार, आरजेडी के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव, मीसा भारती, बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्र, एसपी के रामगोपाल यादव, टीएमसी के सुदीप बंधोपाध्याय, नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, बीटीपी से शरद यादव, द्रमुक की कनीमोझी, आरएलडी के चौधरी अजीत सिंह, सीपीआई के डी राजा, सीपाआई एम के मो. सलीम, झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन, जेवीएम के बाबूलाल मरांडी और हिन्दुस्तान अवामी मोर्चा के जीतन राम मांझी समेत कई अन्य नेताओं ने शिरकत की। इसके अलावा जेडीएस के नेताओं ने भी डिनर पार्टी में हिस्सा लिया, जबकि कर्नाटक होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस आमने-सामने हैं। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक टीडीपी, बीजेडी को इस डिनर पार्टी में आमंत्रित नहीं किया गया था।  
  


यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के बुलावे पर डिनर पार्टी के बहाने उनके आवास पर जुटे 20 विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओ और उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों की एक साथ मौजूदगी को राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। साथ ही सोनिया गांधी की इस डिनर डिप्लोमेसी ने कांग्रेस को विपक्षी दलों की एकजुटता बनाने की दिशा में उम्मीद जगा दी है। वैसे सोनिया गांधी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों (एनडीए) को मात देने के लिए पूरे विपक्ष से आपसी मतभेद भुलाकर कांग्रेस के साथ आने की अपील कर चुकी हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा है कि पार्टी का मानना है कि बीजेपी देश में जहां-जहां दीवारें खड़ी करेगी, वहां कांग्रेस रास्ता बनाने का काम करेगी। उन्होंने ये भी कहा कि इस डिनर पार्टी के आयोजन का लक्ष्य राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत जारी रखना है।   



आपकों बता दें कि सोनिया गांधी की इस डिनर पार्टी में टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल नहीं हुए। लेकिन इन तीनों पार्टियों के अन्य बड़े नेताओं ने शिरकत की है।  

मुख्य संवाददाता
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