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'बाबा साहब के मान में, संविधान के सम्मान में' धूमधाम से मना राष्ट्रीय उत्सव 'संविधान दिवस'

वैसे तो इंडिया गेट पर हमेशा लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन 26 नवंबर, रविवार को वहां पर जो लोग दिखे वो सिर्फ घूमने फिरने वाले या इंडिया गेट देखने वाले नहीं थे बल्कि बाबा साहब को सम्मान देने और संविधान का अहसान मानने वाले थे। दोपहर से पूरा राजपथ जय-भीम, जय भीम के नारों से गूंजता रहा, भगवान बुद्ध की वंदना करते लोगों ने पूरे वातावरण में जैसे ताजगी सी भर दी थी, माहौल खुशनुमा और एनर्जेटिक बना हुआ था। लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ आए हुए थे। जो लोग वहां नहीं पहुंच सके अब उन्हें वैसा नज़ारा अगले साल ही देखने को मिलेगा। क्योंकि जो भी वहां पहुंचा वो यही कह रहा था कि इस तरह का कार्यक्रम पहले कभी नहीं देखा, जहां लोगों में सदभाव, भाइचारा, समानता और सामाजिक अपनापन सा महसूस हो रहा था। जिसे देखकर किसी का भी मन प्रसन्नता से भर उठे।

असंख्य परिवार सब अपनी-अपनी दरी और खाना लेकर आए हुए थे लेकिन खिला दूसरों को रहे थे, ऐसा प्रेमभाव और अपनापन इंडिया गेट के पार्क में शायद ही कभी आपने देखना हो। और ये सब सिर्फ और सिर्फ संविधान के कारण, लोगों में संविधान के प्रति एक जोश भरा हुआ था ज्यादातर लोगों का ये मानना था कि आज हम जो सम्मानित जीवन जी रहे हैं वो सिर्फ और सिर्फ संविधान के कारण हमें मिला है।
  
एमसीडी में कार्यरत सुधीर राज सिंह जी जो पिछले कई महीनों से संविधान दिवस को उत्सव की तरह मनाने के लिए लोगों को जागरुक करने में दिन-रात एक किए हुए थे। उन्होंने बताया कि वो बचपन से ही अपने परिवार के साथ संविधान दिवस मनाते हुए आ रहे हैं, उस समय सिर्फ चंद परिवार ही जुटते थे और इस दिन को उत्सव की तरह मनाते थे लेकिन जैसे-जैसे जागरुकता बढ़ रही है। वैसे-वैसे लोग इस दिन से जुड़ रहे हैं। इस साल पूरे देश में करीब 2000 हज़ार स्थानों पर संविधान दिवस मनाया गया। विदेशों में भी कई जगहों पर लोगों ने संविधान दिवस सेलिब्रेट किया। उन्होंने जानकारी दी कि सिर्फ दिल्ली में ही 50 से ज्यादा जगहों पर लोग जुटे और संविधान दिवस मनाया। इंडिया गेट का आकर्षण तो ऐसा रहा कि देश भर से लोग खासतौर से इसी कार्यक्रम के लिए आए।

यहां मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा 22 लोगों की उस टीम के बारे में जो सालों से बाबा साहब के बारे में लोगों को जागरुक करने और उनकी शिक्षाओं को फैलाने का काम निस्वार्थ करने में लगी है, जिन्होंने
एक साथ एक, विचार लेकर अपने जीवन को बाबा साहब को सौंप दिया है और इस तरह के कार्यक्रमों को करवाने का बीड़ा उठा रखा है। इस ग्रुप की सबसे खास बात या बड़प्पन यही है कि वो पर्दे के पीछे रहकर अपनी मुहिम को चला रहे हैं, अपने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर ही उन्होंने मुझे ये जानकारी दी।  



पूरे देश में
संविधान दिवस को राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में प्रचारित-प्रसारित करने में इस टीम का बहुत बड़ा योगदान है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए। वरना ये किसी से छिपा नहीं है कि लोग काम कम करते हैं और अपनी मार्केटिंग ज्यादा उसके लिए लोग फेसबुक, ट्विटर व्हाट्सअप या कोई भी साधन नहीं छोड़ते हैं, ऐसे माहौल में ऐसी टीम बनना एक बड़ी बात है। समाज के एक बड़े हिस्से को ऐसी सोच रखने वालों से सीख लेनी चाहिए। और अपने काम को आगे बढ़ाना चाहिए। संविधान दिवस को राष्ट्रीय उत्सव बनाने की मुहिम भी इसी ग्रुप की पहल है।



एडवोकेट राजाराम जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संविधान हमारे देश का राष्ट्रीय एवं पवित्र ग्रन्थ है
 खासतौर से बहुजनों का तो ये धार्मिक ग्रन्थ भी होना चाहिए... क्योंकि आज बहुजनों को जो मानवीय अधिकार मिले हैं, वे बाबा साहेब के द्वारा रचित भारतीय संविधान से ही मिले हैं, इसके उलट तथाकथित धर्म व धर्म ग्रन्थों ने बहुजनों को कभी मनुष्य ही नहीं माना, मानवीय अधिकार देना तो बहुत दूर की बात रही है...  साथियों मानवता के दुश्मन वर्णव्यवस्था के समर्थक हमारे इस पवित्र ग्रन्थ को खत्म करने पर आमादा हैं... ऐसे में बहुजनों द्वारा राष्ट्रीय धरोहर के सम्मान में राजपथ इंडिया गेट पर पिकनिक मनाने और संविधान व बाबा साहेब के चित्र पर मोमबत्तियां जलाकर राष्ट्रीय ग्रंथ के प्रति सम्मान देकर राष्ट्रीय पर्व का आगाज, एक सराहनीय कदम है। हालांकि  बहुजनों की सामाजिक सस्थाएं वर्षों से संगोष्ठियों के तौर पर संविधान दिवस मनाते आए हैं, पर पिकनिक के तौर पर इसे मनाने की बात ही निराली है,  सभी बहुजनों को देश के सभी राज्यों की राजधानियों में, सभी जिलों के मुख्यालयों में संविधान के सम्मान में ऐसी पिकनिक का आयोजन करना चाहिए।

ऑल इंडिया अनुसूचित जाति-जनजाति जीवन बीमा निगम कर्मचारी कल्याण संघ उत्तरी क्षेत्रीय कमेटी के महासचिव राजेंद्र कुमार जी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज संविधान खतरे में हैं मनुवादी संविधान को खत्म करके मनुस्मृति लागू करने पर तुले हैं, ऐसे माहौल में बहुजन समाज को ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है। और अगर हमारे संविधान पर किसी ने भी गलत निगाह डाली तो उन्हें अंजाम भुगतने होंगे। हम सबको संविधान का रक्षक बनना पड़ेगा।

दिल्ली सरकार में शिक्षक सरोज बाला बाबा साहब और संविधान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहती हैं कि आज मैं और मेरा परिवार बाबा साहब और संविधान के कारण ही सम्मानित जिंदगी जी रहे हैं, हमारा समाज बाबा साहब की वजह से आर्थिक और सामाजिक रूप से संपन्न हुए हैं और सम्मानित जीवन जी रहे हैं। अगर बाबा साहब ना होते तो भारत देश की महिलाएं आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर होतीं। बाबा साहब ने सिर्फ दलित महिलाओं के लिए ही नहीं सवर्ण समाज की महिलाओं को भी सम्मानित जीवन दिया है लेकिन उन्हें बाबा साहब का नाम लेते हुए शर्म आती है। अगर वे सबकुछ समझते हुए भी बाबा साहब का अहसान नहीं मानती हैं तो वे अपने आप को धोखा दे रही हैं और उन्हें अहसान फरामोश कहना अति नहीं होगी।


दिल्ली विश्वविद्यालय से एमएससी कर रही कावेरी भारती कहती है कि जब से मैने हिंदू कोड बिल पढ़ा मेरी सोच ही बदल गई। अगर बाबा साहब हिंदू कोड बिल नहीं लाते तो आज देश जिस तरक्की पर पहुंचा है वो वहां तक नहीं पहुंचता। अगर देश की आधी आबादी को आप साथ नहीं लेकर चल रहे हैं तो आप पूरी तरक्की की उम्मीद कैसे कर सकते हो। हालांकि अब भी लड़कियों, महिलाओं को जो जगह मिलनी चाहिए थी वो नहीं मिल पाई है। इसलिए हमें बाबा साहब के विचारों को आगे बढ़ाना चाहिए और जागरुकता बढ़ानी चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग बाबा साहब और संविधान के महत्व को समझ सकें।

दिहाड़ी मज़दूरी करने वाले रामसिंह से जब पूछा कि आप क्यों आए हैं तो उनका जवाब अंदर तक हिला देने वाला और सोचने को मजबूर कर देने वाला था। उन्होंने बताया कि हालांकि उनकी छुट्टी सोमवार की होती है, लेकिन आज वे यहां पर छुट्टी लेकर आए हैं, उनका कहना था कि बाबा साहब ने हर वर्ग की भलाई के लिए काम किया है, मजदूरों को अधिकार भी बाबा साहब ने ही दिलाए थे। इसीलिए मैं उनकी पूजा करता हूं। और अपने बच्चों को भी यहीं बताता हूं कि हमारे भगवान बाबा साहब हैं और अपने बच्चों को यही बात महसूस करवाने के लिए मैं यहां पर उनको लेकर आया हूं। जितनी जानकारी और ईमानदारी रामसिंह जी मजदूरी करने के बावजूद लिए हुए थे, बहुजन समाज के बहुत से बड़े-बड़े अधिकारियों में देखने को नहीं मिलती। उनसे बात करने के बाद मुझे बाबा साहब का वो कथन याद आ गया जिसमें उन्होंने कहा था कि
मझे समाज के पढ़े-लिखे लोगों ने धोखा दिया है हालांकि ऐसे खुशनुमा माहौल में ये सब नहीं लिखना चाहिए लेकिन ये ऐसे लोगों के मूंह पर तमाचा है, जिन्हें बाबा साहब का नाम लेने में शर्म आती है, और वे अपने बच्चों को बाबा साहब के बारे में जानकारी तक नहीं देते। ऐसे में राम सिंह जैसे लोग ही शायद अपने नमक का हक अदा कर रहे हैं।  



मैं व्यक्तिगत तौर पर आपको ये बताना चाहता हूं कि मैं खुद बचपन से इंडिया गेट कभी खेलने तो कभी पिकनिक के तौर पर जाता रहा हूं लेकिन इस रविवार
संविधान दिवसके दिन मेरा अनुभव जैसा रहा, वैसा कभी महसूस नहीं किया। दोपहर से लोगों के जुटने का जो सिलसिला शुरू हुआ वो देर रात तक चलता रहा। कोई अपने पारिवारिक कार्यक्रमों से निपट कर यहां पहुंच रहा था तो कोई बाबा साहब के सम्मान में एक मोमबत्ती जलाकर अपने काम पर निकल गया। कोई हाथ में छड़ी लेकर आया तो कोई बेड-मिंटन और क्रिकेट बेट, तो कोई गिटार, अगर अधिकारी पहुंचे तो दिहाड़ी मजदूरी छोड़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मज़दूर तबका भी पीछे नहीं रहा। बात सिर्फ आने की नहीं है, बात है कि हम बाबा साहब या फिर अपने आप के प्रति कितने ईमानदार हैं। 


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3 Comments

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    P. K. Singh
    2017-11-29

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  •  
    Rajender Kumar
    2017-11-28

    Very nice report .

  •  
    Rajender
    2017-11-28

    Well report

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