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निठारी कांड- मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को फांसी की सज़ा

नई दिल्ली, 8 दिसंबर 2017- देश के जघन्य अपराधों में से एक निठारी कांड  में बड़ा फैसला आ गया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने निठारी कांड के दोनों अभियुक्तों मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को नौंवे मामले में मौत की सजा सुनाई है।


गुरूवार को मोनिंदर सिंह और सुरेंद्र कोली को दोषी करार दिया गया था। इससे पहले बुधवार को आरोपी सुरेंद्र कोली और सजायाफ्ता मोनिंदर सिंह पंढेर अदालत में अंतिम बहस में शामिल हुए थे। पंढेर-कोली पर निठारी कांड में कुल 16 मुकदमे चल रहे हैं। आठ मामलों में विशेष अदालत से फैसला सुनाया जा चुका है।  

एक नज़र पूरे मामले पर :-

12 साल पहले 20 जून, 2005 को आठ साल की एक बच्ची नोएडा के निठारी इलाके से अचानक गायब हो गई थी। इसके बाद से इस इलाके में लगातार बच्चे गायब होने लगे। एक साल तक लगातार बच्‍चों के गायब होने का सिलसिला चलता रहा, और करीब दर्जनभर बच्चे गायब हो गए। मामला राष्ट्रीय स्तर पर आने के बाद पुलिस की अलग-अलग टीमों ने एनसीआर समेत देश के कई इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया।

7 मई 2006 को 21 साल की एक और लड़की (अंजलि, मोनिंदर सिंह के घर पर नौकरानी का काम करती थी ) जब गायब हुई तो पुलिस को अहम सुराग उसके मोबाइल से मिला। पुलिस ने उस नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई। उसके बाद जब उसमे से एक नंबर पर कॉल की गई तो उसका नाम मनिंदर सिंह पंढेर का था। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में पंढेर और उसके नौकर कोली को आरोपी बनाया।  

इसके बाद पूरे निठारी मामले का खुलासा हुआ था, जिसमें 15 से ज्यादा बच्चियों और लड़कियों का रेप किया गया था। रेप के बाद उन्हें मारकर पंढेर के घर में दफन कर दिया गया था। निठारी कांड के 6 मामलों में कोर्ट सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुना चुकी है। पिछले साल अक्टूबर में कोर्ट ने कोली को एक लड़की के मर्डर केस में किडनैपिंग, रेप और सबूत मिटाने का दोषी पाया था। इससे पहले के भी पांच मामले में सीबीआई कोर्ट ने कोली को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि 2015 में इलाहबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में उसकी फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया था।

मुख्य संवाददाता
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