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‘अल्लाह की जीत-राम की हार’ वाले फ़र्जी बयान पर कैराना सांसद तबस्सुम हसन ने दर्ज कराई एफ़आईआर

कैराना उपचुनाव की जीत के बाद सांसद बनीं तबस्सुम हसन के नाम से एक फर्जी बयान लगातार सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा था जिसमें लिखा था कि ‘ये अल्लाह की जीत है और राम की हार है।’ हालांकि पहली नजर में पढ़ते ही ये महसूस हो रहा था कि आखिर कोई सांसद ऐसा बयान कैसे दे सकता। वैसे भी कैराना का चुनाव ‘जिन्ना नहीं गन्ना’ के नारे से जीता गया। तमाम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशों पर किसानों की एकता भार पड़ी थी।

इस बयान को वायरल करते हुए हिंदुओं को भड़काने वाली बातें लिखी जाने लगी। हालांकि यह बात जल्द ही सामने आ गई थी कि बयान फर्ज़ी है, लेकिन ‘स्वयंभू राष्ट्रवादी’ इसे फैलाना अपना धर्म समझ रहे थे। हद तो यह हुई कि यह फर्ज़ी बयान एक जुमला बन गया और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा भी टीवी डिबेट में इसका इस्तेमाल करने लगे।

1 जून को सासंद तबस्सुम हसन ने शामली के एसपी को पत्र लिखकर जाँच करने और दोषियों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की माँग की। शिकायत में सांसद ने कहा है कि ऐसे पोस्ट वॉट्सऐप और अन्य दूसरे माध्यमों से सामाजिक सौहार्द्रता और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने के लिए फैलाए जा रहे हैं। 

एसपी ने 2 जून को साइबर सेल को एफआईआर करने और कार्रवाई का आदेश दिया। लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार कार्रवाई चाहती ही नहीं। ऐसे में यूपी सरकार ही नहीं पुलिस महकमा भी शक के दायरे में आता है कि वो राज्य सरकार के इशारे पर पर काम कर रहा है जो कैराना उपचुनाव को हिंदू बनाम मुसलमान करने की कोशिश में लगी रही।

मुख्य संवाददाता
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