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जस्टिस दीपक मिश्रा बने 45वें चीफ जस्टिस, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिलवाई शपथ

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2017- राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में जस्टिस दीपक मिश्रा ने 45वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। दीपक मिश्रा ने जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की जगह ली है। 64 वर्षीय चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का कार्यकाल 13 महीने और छह दिनों का होगा। बतौर चीफ जस्टिस वे 2 अक्तूबर, 2018 तक अपनी सेवाएं देंगे।
कल 27 अगस्त को जस्टिस खेहर सेवानिवृत हुए थे, उन्होंने ही पिछले महीने दीपक मिश्रा को चीफ जस्टिस नामित किया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मिश्रा जस्टिस खेहर के बाद सबसे वरिष्ठ थे। जस्टिस दीपक मिश्रा ने साल 1977 में ओडिशा हाईकोर्ट से अपनी वकालत शुरू की थी और साल 1996 में ओडिशा हाईकोर्ट में जज बने थे। 1977 से 1996 तक वो उड़ीसा हाईकोर्ट के कामयाब वकीलों में से एक थे।

1997 में वे एमपी हाईकोर्ट के जज बने थे। जस्टिस दीपक मिश्रा पटना हाईकोर्ट के भी मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। 24 मई 2010 को वो दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे और 10 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर प्रमोट हुए थे। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा मुंबई के श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की फांसी के खिलाफ मध्य रात्रि में सुनवाई करने तथा निर्भया बलात्कार कांड के दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखने और सिनेमाघरों में राष्ट्रगान पर फैसला देने वाले ऐतिहासिक फैसलों से जाने जाते हैं, वहीं सेवानिवृत्त हुए जस्टिस जे.एस. खेहर  अपने कार्यकाल में तीन तलाक और निजता का अधिकार जैसे दो महत्वपूर्ण फैसलों के लिए जाने जाएंगे। इसके अलावा जस्टिस सीएस कर्णन के मामले को लेकर भी उनका कार्यकाल हमेशा याद किया जाएगा।

मुख्य संवाददाता
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