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सपनों की ज़मीन से आसमां की हकीकत का सफर तय करता युवा

दीपपचंद...जिनका मजबूत इरादा ही उनके व्यक्तित्व की ख़ास पहचान बन चुका है।  बहुजन समाज में जन्मे दीपचंद पेशे से पायलट हैं और एयर इंडिया में कमांडर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन वो समाज सेवा के उत्थान के लिए भी ख़ासी रुचि रखते हैं और पूरे जोश-खरोश के साथ बहुजन समाज के बच्चों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दिलवाने की ख्वाहिश रखते हैं। उनका मानना है कि अगर कोई दबंग आप पर हावी होने की कोशिश करता है तो उसे ऐसा सबक सिखाओ कि वो कभी भी दोबारा हिम्मत ना कर सके। पिछले दिनों गाज़ियाबाद के वसुंधरा स्थित आवास पर‘पड़ताल’ की टीम ने उनसे ख़ास बातचीत की।



आपकी पारिवारिक पृष्टभूमि क्या है ?
मैं एक किसान परिवार से संबंध रखता हूं। मेरे पिता जी माली की सरकारी नौकरी करते थे, साथ ही जमीन पर खेती भी करते थे। मैंने अपनी पूरी शिक्षा दिल्ली से ग्रहण की है।  मैं रामजस कालेज में बीएससी फिजिक्स ऑनर्स कर रहा था, लेकिन इंजीनियरिंग करने के लिए मैने बीएससी को बीच में ही छोड़ दिया। मैंने इंजीनियरिंग के लिए प्रवेश परीक्षा पास कर ली थी, तभी अखबार में कॉमर्शियल पायलट का विज्ञापन देखा और फिर इसी लाइन में आ गया। 

इस मुकाम तक पहुंच कर कैसा महसूस करते हैं ?
देखिए मै जिस परिवार से आता हूं वहां पायलट होना बड़ी बात समझी जाती है, जब आप जिंदगी में कुछ अच्छा करते हैं तो घर-परिवार और समाज में अपने से छोटों के लिए आप प्रेरक भी बन जाते हैं, और जब आपसे आपकी सफलता और अपने भविष्य के मार्गदर्शन के लिए पूछा जाता है तो आपको लगता है कि आपकी मेहनत सार्थक हो गई।
 
आपने जीवन में किसको आदर्श बनाया, और प्रेरणा ली ?
मेरे आदर्श शुरू से ही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर रहे हैं, मैने बहुत सारे महापुरूषों की जीवनी पढ़ी है, जब बाबा साहब को पढ़ा तो उनके बारे में और भी पढ़ने की जिज्ञासा बढ़ी, मैने बाबा साहब को काफी पढ़ा है, ऐसा संघर्षशील, उदार, आत्मसम्मानी व्यक्तित्व पूरे संसार में शायद ही मिले। हमें उनके जीवन से सबक लेने चाहिए, अगर हम उनके जीवन संधर्ष और अनुभवों से कुछ नहीं सीख पा रहे हैं तो ये हमारा दुर्भाग्य है। और जब तक दलित समाज पूरी तरह से बाबा साहब को नहीं अपनाएगा तब तक दलित समाज का भला नहीं हो पाएगा। 

लेकिन समाज का बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा है जो बाबा साहब का नाम तक नहीं लेना चाहता और अपने आप को सवर्ण बनाकर उन्हीं लोगों में छिपकर बैठ गया है ?
ऐसे लोग मेरी नजर में सबसे बड़े दोषी हैं, अपने आप को छिपाकर वे दलित समाज की ताकत कम कर रहे हैं, और इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं किया जा सकता। बेशक वे लोग छिपकर बैठ जाएं लेकिन आज वो जो कुछ भी हैं वो सब बाबा साहब की बदौलत हैं और ये हकीकत उनका ज़मीर अच्छे से जानता है, अगर वो लोग सामने आते और समाज के बारे में सोचते तो आज हमारे समाज के जो लोग दूर-दराज़ के गांवों में नारकीय जीवन जी रहे हैं उनका जीवन बहुत हद तक सुधारा जा सकता था, उनको ताकत दी जा सकती थी।
 
कभी आपने बहुजन होने का दंश झेला है ?
जी एक बार नहीं कई बार, मुझे तीन बार ‘NOTE SUITABLE’ करके 4 साल तक नौकरी से दूर रखा गया। चौथी बार मैं पास हुआ और साक्षात्कार में गया, लेकिन मैं वहां खुद मना करके आ गया। और फिर मैंने दूसरी एयर लाइंस में नौकरी की।

आप बहुजन समाज को कहां देखते हैं और समाज के लिए क्या करना चाहते हैं ?
आदमी को जब मौका मिले तभी अपने समाज की भलाई के लिए काम करना चाहिए। , लोगों को हिन्दू धर्म के कर्मकांड और अंधविश्वास से बाहर आना चाहिए।  हमारे समाज को शिक्षा की तरफ बढ़ना होगा। तभी हम मुख्य धारा में आ सकेंगे। सरकारी नौकरी के लिए कोचिंग देने की मेरी योजना पाइपलाइन में है। इसके अलावा में अपने समाज के बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी दिलवाना चाहता हूं, जिससे कोई उन पर हावी ना हो पाएं।

सोशल मीडिया के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ती न्यूज़ पोर्टल‘पड़ताल’ को लेकर आपका क्या संदेश है ?
मैं चाहता हूं कि आप वंचित समाज की हर वो खबर दिखाएं, जिसे मुख्य धारा का मीडिया नहीं दिखाता है। मुझे पूरा विश्वास है कि आपका ये प्रयास समाज को एक नई दिशा देगा साथ ही लोगों को जातिवादी और संकीर्ण मानसिकता को भी बदलने के लिए मजबूर करेगा।


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