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घर वापसी....

मुझे 
अपना घर चाहिए
जिसे तुमने उजाड़ा है।

मुझे
अपनापन चाहिए
जिसे तुमने तो़ड़ा है।

मुझे
अपना धम्म 
अपना समाज
अपनी संस्कृति चाहिए
जिस पर तुमने मुलम्मा चढ़ा लिया है।

मुझे 
अपनी मिट्टी 
अपना देश चाहिए
जिस पर तुम कुंडली मारकर बैठे हो।

इतना ही नहीं 
मुझे, वह सब कुछ चाहिए 
जिसे तुमने रेलों में आकर 
मेरे पुरखों से छीना है।


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