img

NSE रिपोर्ट में खुलासा, मोदी नहीं, मनमोहन सरकार में सबसे ज्यादा थी देश में Growth Rate

नई दिल्ली- मोदी सरकार भले ही देश की विकास दर के कितने ही आंकड़े क्यों ना पेश करे, लेकिन NSE (राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट मोदी सरकार की पोल खोलती दिख रही है। जिसके अनुसार बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि दर का आंकड़ा सर्वाधिक रहा था।

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में बताती है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में देश की विकास दर सबसे उच्च स्तर पर रही हैं। 2006-07 में देश की आर्थिक विकास दर का आंकड़ा 10.08 प्रतिशत रहा जो कि उदारीकरण शुरू होने के बाद का सर्वाधिक वृद्धि वाला आंकड़ा है। स्वतंत्रता के बाद से सबसे ज्यादा विकास दर 1988-89 में 10.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी उस समय देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे।

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा गठित कमेटी ऑफ रियल सेक्टर स्टैटिक्स ने पिछली श्रृंखला (2004-05) के आधार पर जीडीपी आंकड़ा तैयार किया है। रिपोर्ट में पुरानी श्रृंखला (2004-05) और नई श्रंखला 2011-12 की कीमतों पर आधारित वृद्धि दर की तुलना की गई है। पुरानी श्रंखला मनमोहन सिंह के कार्यकाल 2004-05 के तहत जीडीपी की वृद्धि दर स्थिर मूल्य पर 2006-07 में 9.57 प्रतिशत रही। नई श्रृंखला (2011-12) के तहत यह वृद्धि दर संशोधित होकर 10.08 प्रतिशत रहने की बात कही गई है।

आपको बता दें कि 10.08 प्रतिशत की वृद्धि दर 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई में शुरू आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक रही है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस ने अपने ट्विटर पर लिखा है, GDP श्रृंखला पर आधारित आंकड़ा आखिरकार आ ही गए। यह साबित करते हैं कि यूपीए के 10 साल के शासन के दौरान औसत वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत रही, वहीं मोदी सरकार के 4 साल के कार्यकाल के दौरान औसत वृद्धि दर 7.3% रही। कांग्रेस ने यह भी कहा कि आधुनिक भारतीय इतिहास में अर्थव्यवस्था की विकास दर को दहाई के अंक तक पहुंचाने का रिकॉर्ड यूपीए के पास है। 

मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े