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नहीं रहे गोपाल दास 'नीरज', राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा अंतिम संस्कार

जाने माने गीतकार और कवि गोपाल दास नीरज का गुरुवार को निधन हो गया। वे 94 वर्ष के थे, वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। मंगलवार को उन्‍हें सांस लेने में दिक्‍कत हो रही थी, जिसके चलते उन्हें आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के एम्स लाया गया था, जहां उन्होंने शाम को 7.30 बजे अंतिम सांस ली।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोपाल दास ‘नीरज’ के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उनकी अंतिम यात्रा राजकीय सम्मान के साथ निकाली जाएगी। साथ ही घोषणा की कि गोपाल दास नीरज की स्मृति में राज्य सरकार हर वर्ष पांच नवोदित कवियों को एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार देगी।  

राज्यपाल राम नाईक ने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि गोपाल दास नीरज के निधन से हिंदी साहित्य के एक युग का अवसान हो गया है। वह अपनी कालजयी रचनाओं से सदैव स्मृतियों में जीवंत रहेंगे। उनका निधन हिंदी साहित्य की अपूर्णीय क्षति है।

गोपालदास नीरज बॉलीवुड फिल्मों में, हिंदी साहित्य में और मंचीय कवि के रूप में खास पहचान रखते थे। उनके लिखे प्रसिद्ध फिल्मी गीतों में-  ऐ भाई.. जरा देखकर चलो, दिल आज शायर है, शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब, आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं, खिलते हैं गुल यहां, फूलों के रंग से, रंगीला रे! तेरे रंग में और  लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में... शामिल हैं।

गोपाल दास नीरज जी को 1991 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्हें साल 2007 में पद्मभूषण दिया गया। 'कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे' जैसे मशहूर गीतों के लिए उन्हें 1970, 1971, 1972 में फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले। 'पहचान' फिल्म के गीत 'बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं' और 'मेरा नाम जोकर' के 'ए भाई! ज़रा देख के चलो' ने नीरज को कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचाया। उनके एक दर्जन से भी अधिक कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनका जन्म 4 जनवरी, 1924 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गांव में हुए था। 

मुख्य संवाददाता
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