img

उत्तराखंड- उत्पीड़न करने वाले को नहीं, उत्पीड़ितों को उठाकर लाई घनसाली पुलिस

वैसे दलित उत्पीड़न की घटना कोई नई बात नही हैं। पर इस साल के अन्तिम माह में जो घटना दलित उत्पीड़न को लेकर अतिसुदूर गांव टिहरी जनपद के गंगी में सामने आई है वह दिल दहला देने वाली है। हालांकि 17 वर्षीय दलित राकेश लाल रहस्यमयी ढंग से गंगी गांव से गायब हुआ हो परन्तु इसके पीछे का राज जानना भी आज की इक्कसवीं सदी में जरूरी है। क्या राकेश को किसी ने मारा-पीटा है, क्या राकेश को धमकी मिली है, क्या राकेश ढोल बजाने घर से बिना बताये कहीं दूसरे गांव गया था वगैरह-वगैरह। पर राकेश लाल तो देहरादून की राजपुर रोड पर घूमते हुए पुलिस को मिला। वह 20 दिनों से गायब था, परन्तु किसी ने भी इतना जानने की भी  ज़हमत नहीं उठाई कि राकेश गायब हुआ क्यों? जबकि गंगी गांव में हुई घटनाक्रम की प्राथमिकी रिपोर्टे पुलिस थाने घनसाली में दोनो पक्षो की ओर से दर्ज हो चुकी है। 

इधर घटनाक्रम के मुख्य किरदार राकेश आप बिती बताते वक्त भी सीहर जाता है। कहता है कि कैलापीर देवता ने उसकी जान बचाई है। वह तो उन दरिन्दो ने दरान्ती-कुल्हाड़ी से कुचल दिया था। किस्मत यह रही कि रात का वक्त था और वे सभी गंगी गांव के राजपूत लोग शराब के नशे में धुत्त थे, एक दूसरे पर गरीया रहे थे, की पकड़ो साले को और बनाओ उसकी चटनी। यानि राकेश को इस दुनिया से विदा कर दो। राकेश कहता है कि भाई जी इस बात को किसी को बताना मत। अगर उनके गांव के राजपूतो को पता चलेगा तो उसकी जान फिर से खतरे में पड़ जायेगी। वह रोते-रोते बताता है कि रात खुलने तक वह घुत्तू पंहुच गया था और फिर वह जान बचाने बावत ऋषिकेश होते हुए दिल्ली पंहुच गया। उसके बाद उसे मालूम नहीं कि दिल्ली में वह कहां पर है। वह आगे बताता है कि जब उसके पास कुछ लोग आये कि वे टिहरी की पुलिस है और राकेश को ढूंढ रही है तो उसे लगा कि अब उसकी सुरक्षा होगी, परन्तु सुरक्षा तो दूर उसे पुलिसकर्मीयों ने इतना डराया-धमकाया और कहा कि वह सिर्फ इतना ही बतायेगा की वह देहरादून के राजपुर रोड पर था।

उल्लेखनीय यह है कि गंगी गांव के घटनाक्रम में स्थानीय पुलिस भी संदेह के दायरे में आ रही है। जानकारो का कहना है कि जो क्षेत्र राजस्व पुलिस के अन्तर्गत आता है वह कैसे सक्षम अधिकारी के बिना इजाजत इस घटनाक्रम पर अमल करने लग गयी। माना कि किसी सक्षम अधिकारी ने इस घटनाक्रम को लेकर रेगुलर पुलिस को निर्देश भी दिये तो घटनाक्रम के दिन रातों-रात यह मामला राजस्व पुलिस से रेगुलर पुलिस को स्थानान्तरित कैसे हो गया? यही नहीं टिहरी के घनसाली की पुलिस मौजूदा समय में इतनी सक्रिय हो चुकी है कि गंगी गांव के दलितो के विरूद्ध जब गांव के राजपूतो ने प्रार्थना पत्र दिया तो दलितो को पुलिस ने रात में ही गांव से उठाकर पुलिस थाने घनसाली में नामजद करके दिखाया। जब दलितो के उत्पीड़न की कहानी सामने आई तो वे पुलिसकर्मी एक दूसरे के मुह झांकते रह गये।

बताया जा रहा है कि एक दिसम्बर 2017 को गंगी गांव में सूरज सिंह के पुत्र पूरब सिंह का विवाह था। गांव में दलित जाति का ढोल बजाने वाला सोहनलाल जब घर-पर नहीं था तो गांव वालो ने उसके बेटे राकेश लाल को ढोल बजाने को कहा। इस तरह से परम्परा के अनुसार राकेश लाल ने विवाह स्थल पर बडाई बजायी। इसी दौरान गांव के कुछ राजपूतो ने राकेश को जबरन शराब पिलायी ताकि राकेश ढोल को और जोर से बजा सके। ऐसा तो हुआ नहीं परन्तु राकेश लाल चूं‍कि शराब नहीं पीता था सो उसे शराब के कारण अत्यधिक नशा हो गया। वह नशे की हालत में अपने घर आकर चैक पर ही सो गया। अब राकेश के पिता सोहन लाल मजदूरी कमाने बावत गांव के राजपूत श्रीजानी की भेड़ बकरियों को चराने के वास्ते तीन महीने से गांव से दूर जंगल जा रखा था। राकेश की मां भी अपनी बीमारी के इलाज के लिए लगभग 15 दिन पहले अपने किसी रिश्तेदार के साथ ऋषिकेश गयी हुई थी। राकेश को नशे में देख गांव की श्रीपति देवी ने उसे दुत्कारा और बारात में ढोल बजाने के लिए जल्दी तैयार होने को कहा। अलबत्ता राकेश लाल नशे में था और नशे के कारण वह लड़खड़ा कर जब खड़ा हो रहा था तो इसमें उक्त महिला श्रीपति को धक्का लग गया। बस इतना ही भर था, श्रीपति गांव की ओर चली गयी और अपने नजदिकी लोगो को बताया कि राकेश लाल ने उसके साथ बदतमीजी की है। फिर क्या था गांव के सबल वर्गीय राजपूत समाज के स्त्री-पुरूष, जवान-बूढे एकत्रित होकर हाथो में लाठी-डंडे, दरांती, पाठाल इत्यादि लेकर राकेश लाल के घर की ओर आ गये और धमकियां देकर जोर-जोर से अपशब्दों का खूब प्रयोग किया।

सांय का वक्त था वे दलित लोग जो अपने-अपने घरों में खान खा रहे थे शोर-शराबा सुनकर जैसे घरों से बाहर आये तो इतने में भीड़ में से कुछ लोग चैक पर नशे की हालत में सो रहे राकेश लाल को उठाकर ले गये। वे डरे-सहमें थे, फिर भी उन्होंने मिलकर राकेश लाल की बहुत खोजबीन की। कुछ साहस जुटाकर गांव वालो से जानना चाहा था, मगर गांव वाले उस वक्त बहुत उग्र हो रहे थे, कह रहे थे कि इन सालो को भी काट डालो। इस बीच वे ग्रामीण सोहन लाल के मकान के दरवाजे के सामने आये तो वे इस डर के मारे एक किनारे हो ग। देखते ही देखते उग्र हो चुके गांव वालों ने सोहन लाल के घर के दरवाजे तोड़ दिए। घर के अन्दर का समान तहस-नहस कर डाला। उग्र भीड़ से यह भी आवाजें आ रही थीं कि राकेश लाल जैसे ही मिलता है उसके हाथ पैर काट दो, आंखे फोड़ दो, यदि उसके रिश्तेदार इस बीच में आते हैं तो उनका भी यही हाल कर दो। यही नहीं कुछ धमकियां ऐसी भी आ रही थी कि पेट्रोल लाकर राकेश लाल के घर में आग लगा दो। इस पर उन्होंने उग्र ग्रामीणो के सामने हाथ जोडकर कहा कि ऐसा मत करना, क्योंकि यदि राकेश लाल के मकान में आग लग गई तो उन सभी के मकान भी जल जाएगे। इसी बीच दलित महिला बालेश्वंरी जब पनघट से पानी भरकर वापस आ रही थी तो उग्र लोगो के साथ गांव की ही तिरमा देवी बर्तन को गिरा दिया और उसके साथ मारपीट के लिए उतारू हो गयी। बालेश्वरी देवी रास्ते से किसी तरह अपनी जान बचाकर निकली।

चूंकि गांव में विवाह समारोह था तो गांव में ढोल बजाने वालों की आवश्यकता तो थी ही। अतएव कुछ ग्रामीणो ने मोहन लाल को धमकी दी कि वे इस विवाह समारोह में ढोल बजायेगा। वर्ना ठीक नहीं होगा। धमकी सुनकर मोहनलाल की पत्नी अनिता देवी और बिजली देवी ने उन्हें विवाह में ढोल बजाने को कहा कि कम से कम वे लोग तो इन सबल लोगो की मार से बचेंगे। हालात इस कदर थे कि अगले दिन यानि दो दिसम्बर 2017 को जब विवाह समारोह जारी था तो ग्रामीण ढोलवादक मोहन लाल को खूब शराब पिला रहे थे। वह भी नशे की हालत में बेसुध होकर ढोल बजाता रहा। राकेश का पिता सोहन लाल घटना के दूसरे दिन यानि दो दिसम्बर 2017 को दुगड्डू नाम के जंगल से सांय के लगभग पांच बजे घुत्तू पहुंच चुका था, जहां वे अपनी पत्नी उखा देवी का इंतजार कर रह था। अगले दिन वे प्रातः सपत्नी घुत्तू से चलकर गंगी गांव पहुंच गये। इसी दिन स्वर्गीय बिजेन्द्र की पत्नी सरिता ने गांव में घटी घटना के बारे में राकेश के पिता सोहन लाल को बता दिया।

अब सोहनलाल को गांव में देख ग्रामीण शंकर सिंह, गौर सिंह, फिंचर सिंह व अन्य दूसरे लोगों ने घेर लिया। उन्होंने सोहनलाल को कहा कि गांव में एक घटना हो गयी है, वे अब उन्हे लिखकर दें कि राकेश लाल से उनका कोई संबंध अथवा रिश्ता नहीं है और जहां भी वह मिलेगा गांव वाले राकेश के साथ जैसा चाहे वैसा व्यवहार करे। इस बात पर सोहन लाल के होश फाख्ता हो गये। वह प्रतिकार करता, उसे भी मुंह की खानी पड़ी। बेचारा उल्टे पांव अपने घर तो चला आया। चूंकि घर में तो तोड़-फोड़ हो चुकी थी। खैर वह पड़ोस में रह रही अपनी मां बछुली देवी के पास चला गया। उसी दिन रात्री के लगभग 10 बजे घनसाली से तीन पुलिसकर्मी उनके पास आ धमके। बाहर से ही चिल्लाते-चिल्लाते सोहन लाल कहां है घर से बाहर निकलो और अपने लड़के राकेश लाल को कहां छुपा रखा है उसे भी बाहर निकालो कहने लगे। वे बाहर आये और पुलिसकर्मीयों को घटनाक्रम के बारे में बताया। पुलिसकर्मी पीड़ित सोहन लाल की बात कहां सुनते वे तो मौजूदा वक्त सक्रिय हो चुके थे। जबकि पुलिसकर्मीयों के साथ गावं के ही कलम सिंह, मान सिंह, गुलाब सिंह, भीम सिंह भी आये हुए थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे सभी रात्रि में नशे से चकनाचूर थे। पुलिसकर्मियों ने फरमान सुनाया कि सभी अनुसूचित जाति (बाजगी) के तीस लोगों के विरूद्ध थाने में शिकायत दर्ज है। लिहाजा वे मुलजिम हैं, इसलिए उन्हे अभी रात्री में ही थाने में पंहुचना होगा। दलित समुदाय के सभी लोगो ने पुलिसकर्मियो से बहुत विनती की परन्तु वे कहां मानने वाले थे और उन्हे गिरफ्तार करके रात्रि में ही पुलिस थाने घनसाली पंहुचने को कहा, खुद वे पुलिसकर्मी अगली सुबह पंहुचे।

आश्चर्य यह है कि दलितो के तीनो परिवारो में गिरफ्तार हुए जहां 80 वर्षीय बिछुली देवी थी तो वहीं दुधमुहें बच्चे भी शामिल थे। किसी तरह पुलिस के डर के मारे 80 वर्षीय बिमार और बुजुर्ग महिला बिछुली देवी को पीठ पर लादकर बड़ी मुश्किल से वे लोग घुत्तू पहुंचे। और अगली सुबह 04 दिसम्बर 2017 को प्रातः 9.00 बजे सभी 30 लोग घनसाली थाने में पहुंच गये। इधर क्षेत्रीय विधायक शक्ति लाल ने ढांढस बंधाया कि उनके साथ हुई घटना की जानकारी उन्हे है और कहा कि उनके साथ न्याय होगा। जब वे बे-वजह थाने लाये गये तो उन्होंने भी खुद के साथ हुए उत्पीड़न की शिकायत पुलिस को एक लिखित पत्र के द्वारा प्रस्तुत की। 

अब मामला दोनो पक्षो की तरफ से पुलिस के सामने एक पत्र के मार्फत आ चुका था। इस पर 05 दिसम्बर 2017 को धनसाली थाने से 8 पुलिसकर्मी एक गाडी में गंगी के लिए रवाना हुए। उनमें से एक पुलिसकर्मी गंगी चढ़ने बावत असमर्थ था तो वह घुत्तू में ही रूक गया। शेष 07 पुलिसकर्मी गांव के लक्ष्मी दास को साथ लेकर गंगी गांव पंहुच गये। दो पुलिस कर्मी लक्ष्मी दास के घर पर रूके और बाकि ग्राम प्रधान के घर रूके। इस दौरान तहकीकात करने गये पुलिसकर्मीयों ने यह जानने की कोई कोशिश नहीं की कि सोहन लाल का मकान क्यों क्षतिग्रस्त हुआ है। पुलिसकर्मीयों ने खानापूर्ति के लिए ग्रामीणो को कहा कि वे उनके साथ घनसाली थाने चलें। किन्तु ग्रामीणो ने गांव में किसी शादी का हवाला देकर चलने से इन्कार कर दिया। जबकि उक्त दिन गांव में कोई शादी नहीं थी और पुलिसकर्मी लक्ष्मी दास को वापस साथ लेकर बैंरग लौट आये। हालांकि उसी दिन उनकी प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज तो हुई पर पुलिस प्रताड़ना से वे बच नहीं पाये। उन्हे पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा कहा जाता रहा कि वे अपने गांव लौट जाये और उनकी सुरक्षा के इन्तजाम हो चुके हैं। मगर राकेश लाल को ढूंढने की बात तक नहीं हो रही थी। इस अन्तराल में सी॰ओ॰ पुलिस, उपजिलाधिकारी घनसाली, जिलाधिकारी टहरी, पुलिस अधीक्षक टिहरी को भी उन्होने घटनाक्रम की एक-एक जानकारी दी, फिर भी किसी का दिल नहीं पसीजा। यह कहानी गंगी गांव के दलित पररिवार के लोगो ने परेड ग्राउण्ड में बैठे धरना स्थल पर बतायी।

उल्लेखनीय है कि गंगी गांव में आज भी सामूहिक बंधुआ मजदूरी की प्रथा विद्यमान है। गांव में सिर्फ तीन परिवार ही दलित जाति के हैं अन्य सभी परिवार सबल राजपूत जाति के निवास करते हैं। ये दलित परिवार परम्परागत रूप से ढोल बजाकर और उन्ही राजपूतो के घर बंधुआ मजदूरी करके जीवन-यापन करते हैं। गांव में संवर्ण वर्गीय राजपूत लोग अनुसूचित जाति (बाजगी) के लोगो को सामूहिक बंधुआ मजदूरी करवाते हैं। यही नहीं वे सबल लोग जब चाहे तब उनकी बहू-बेटियों के साथ अश्लील हरकतें भी करते है। विरोध करने पर उन्हे यही दिन देखने पड़ते हैं। वे मंदिर में नौबत बजायेंगे, पूजा होने के बाजे बजायेगे, पर वे मंदिर में प्रवेश तक नहीं कर सकते हैं।

पीड़ित दलित परिवारो की मांग
जिन पुलिसकर्मीयों ने गंगी गांव के दलित परिवारों के तीस लोगो को अर्द्धरात्रि में गिरफ्तार करके लाया उनके विरूद्ध कानूनी कार्रवाई हो। पुलिसकर्मी यह बतायें कि 80 वर्षीय बछुली देवी का और सभी दलित समुदाय के लोगो का क्या कसूर है। यदि दलित समुदाय को रात्री में ही गिरफ्तार किया गया तो दोबारा जब पुलिस गांव में गयी तो राजपूत समुदाय के कसूरवार लोगो को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। इस घटनाक्रम की सीबीआई जांच हो। ताकि पीड़ितो को न्याय मिल सके।

विभिन्न संगठनो ने की गंगी गांव की निन्दा 
उत्तराखण्ड समता अभियान के प्रदेश संयोजक दिनेश भारती, उत्तराखण्डी संवैधानिक संरक्षण मंच के दौलत कुंवर, दलित अधिकार मंच के संयोजक जबर सिंह वर्मा ने मांग की है कि गंगी गांव की घटनाक्रम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याघचार अधिनियम संशोधन 2015 के अंतर्गत कार्रवाई की जाए। वे 19 लोग मान सिंह, ध्यान सिंह, बिशन सिंह, चतर सिंह, भूप सिंह, बिजेन्द्र सिंह, जीत सिंह, सुमेरू सिंह, गजे सिंह, शिवशक्ति, भगवान सिंह, शंकर सिंह, कलम सिहं, भीम सिंह, गुलाब सिंह, प्रतीमा देवी, अशरफी देवी, शान्ति देवी, प्रेमा देवी पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाये। उनकी मांग है कि गंगी गांव में लगभग 6 माह पूर्व जेष्ठ के माह में हुई संदीप की मृत्यु की जांच भी करवाई जाये। 

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्या डा॰ स्वराज विद्वानका कहना है कि जिस तरह से खबरें आ रही हैं और आयोग के समक्ष विभिन्न संगठनो ने यह शिकायत भेजी है कि गंगी गांव में अनुसूचित जाति के लोगो के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ है। इस बाबत आयोग ने उचित जांच करवाने के आदेश जिलाधिकारी टिहरी और पुलिस अधीक्षक टिहरी को दिए हैं। जैसे रिपोर्ट आयेगी तुरन्त इस घटना पर संज्ञान लिया जायेगा।

प्रेम पंचोली
प्रेम पंचोली
ब्यूरो चीफ
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े