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स्वस्थ समाज की मानसिकता पर थूकता पांचवीं कक्षा के दलित बच्चे का सुसाईड नोट

गोरखपुर- ठीक-ठीक कलम पकड़ना और लिखना बच्चा शायद पांचवी कक्षा से ही सीखता है, उस मासूम के माता-पिता ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिस बच्चे को वो जी-जान से पढ़ाने में लगे हैं, लिखना सीखते ही वो अपनी मौत का खत लिखेगा।  


डेयरी कालोनी स्थित सेंट एंथनी स्कूल के पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले दलित छात्र नवनीत प्रकाश ने खुदकुशी कर ली। उसने एक सुसाई़ड नोट भी लिख छोड़ा है, जिसमें उसने अपनी मौत का जिम्मेदार साफतौर से अपनी कक्षा अध्यापिका भावना को ठहराया है।



नवनीत ने खत में जो लिखा वो इस प्रकार है "पापा, आज 15-9-17 मेरा पहला एग्जाम था. मेरी मैम क्लास टीचर ने मुझे 9.15 तक रुलाया खड़ा रखा. इसलिए क्योंकि वह चापलूसों की बात मानती है. उनकी किसी बात का विश्वास मत करिएगा. कल उन्होंने मुझे तीन पीरियड खड़ा रखा. आज मैंने सोच लिया है कि मैं मरने वाला हूं. मेरी आखिरी इच्छा...मेरी मैम को किसी बच्चे को इतनी बड़ी सजा न देने को कहें...अलविदा पापा-मम्मी और दीदी।" 


नवनीत शाहपुर थाना क्षेत्र के मोहनापुर का रहने वाला था, 15 सितम्बर को उसने घर में जहर खा लिया था, तभी से वह मेडिकल कॉलेज में भर्ती था, 20 सितंबर को उसकी मौत हो गई, मौत के बाद उसके बैग से परिजनों को सुसाइड नोट मिला, उसके पिता ने शाहपुर थाने में स्कूल प्रबंधन और क्लास टीचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है, पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। 

नवनीत के पिता रवि प्रकाश जो पेशे से अध्यापक है, उन्होंने बताया कि उनके बेटे नवनीत का 15 सितंबर को उसका पहला पेपर था। लेकिन उसकी क्‍लास टीचर ने तीन पीरियड तक उसे लगातार खड़े रखा। इस बात से दुखी नवनीत ने घर आकर जहरीला पदार्थ खा लिया। पिता रवि प्रकाश ने उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। जहां 20 सितंबर को उसकी मौत हो गई।


रवि प्रकाश का कहना है कि उसकी क्‍लास टीचर अन्‍य बच्‍चों को घर पर ट्यूशन पढ़ाती थी, लेकिन नवनीत पढ़ने में काफी होशियार था इसलिए वो टयुशन नहीं पढ़ता था, और ट्यूशन नहीं पढ़ने के बावजूद वह अच्‍छे नंबरों से पास होता था, यह बात क्‍लास टीचर को नागवार गुजरती थी, यही वजह है कि परीक्षा वाले दिन 3 पीरियड तक उसे कक्षा में खड़ा रखा। गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने बताया कि इसके पहले भी टीचरों द्वारा उनके बच्‍चे को दलित होने के कारण प्रताडि़त किया जाता रहा है। जिसकी शिकायत उन्होंने स्‍कूल प्रबंधन से भी की थी, लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं की गई। 


नवनीत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी एक बड़ी बहन है, जो 12वीं कक्षा में पढ़ती है। नवनीत के दादा जी हरिराम प्रसाद (रिटायर्ड प्रधानाध्यापक) ने बताया कि उनका पोता काफी होनहार था। उन्‍होंने कहा कि वह भी शिक्षक रहे हैं और बच्‍चों से प्‍यार और दुलार से ही बात करते रहे हैं, उन्‍होंने कहा कि दलित होने के कारण उनके पोते को स्‍कूल प्रबंधन और शिक्षकों द्वारा प्रताडि़त किया जाता था। यही वजह है कि उसे क्‍लास में परीक्षा के दिन 3 पीरियड तक खड़ा रखा गया। उसके बाद उसने घर आकर जहर खा लिया। 

एसपी सिटी विनय सिंह ने बताया स्कूल प्रबंधन और क्‍लास टीचर के खिलाफ धारा 306 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल आरोपी शिक्षिका भावना को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच के बाद स्‍कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 


अब कितनी भी जांच होती रहे लेकिन नवनीत वापस नहीं आएगा, उन मां-बाप का अकेला बेटा अब उन्हें जिंदगी भर रूलाता रहेगा। लेकिन पुलिस-प्रशासन को अब ईतनी ईमानदारी दिखानी होगी कि वो सही दिशा में जांच करें और दोषी शिक्षिका और स्कूल प्रबंधन को सज़ा दिलाए। सबसे पहले तो स्कूल प्रबंधन कटघरे में खड़ा होता है जिसने नवनीत के पिता की शिकायत के बावजूद आरोपी शिक्षकों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की। अगर समय रहते स्कूल प्रबंधन जातिवादी शिक्षक के खिलाफ़ कार्रवाई कर लेता तो शायद आज नवनीत जिंदा होता। लेकिन ज़ाहिर सी बात है स्कूल प्रबंधन भी जातिवादी मानसिकता का ही रहा होगा तभी उसने आरोपी शिक्षिका के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। लेकिन अब पुलिस की जिम्मेदारी हो जाती है कि किसी भी दबाव में आरोपी बचकर नहीं निकलने चाहिए, ताकि और बच्चे जातिवादी मानसिकता की भेंट ना चढ़ें।  

रमाकांत
रमाकांत
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