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UPDATE : दलितों के ‘भारत बंद’ का देशभर में व्यापक असर रहा, पुलिस फायरिंग में 9 लोगों की मौत

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज के संगठनों की तरफ से सोशल मीडिया के जरिये बुलाए गए ‘भारत बंद’ का देशभर में व्यापक असर रहा। एसी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में बुलाए गए इस बंद का असर सबसे ज़्यादा दिल्ली, यूपी, पंजाब, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश,छत्तीसढ़, महाराष्ट्र और गुजरात, ओडिशा समेत देश के 14 राज्यों में बंद पूरी तरह सफल रहा। इसके साथ ही दक्षिण के राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुआ। जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान कई राज्यों में हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ हुई है। पुलिस फायरिंग में 9 लोगों की मौत, जबकि कई घायल हुए हैं। मध्य प्रदेश में 6 , यूपी में 2 और राजस्थान में 1 व्यक्ति की जान गई है।



आज यानी  (2 अप्रैल) को ‘भारत बंद‘ करके बहुजन समाज ने एकजुटता का परिचय देते केंद्र सरकार और अन्य राज्य सरकारों के सामने अपनी ताकत का एहसास करा दिया है। भारत बंद की ये अपील सोशल मीडिया के जरिये जारी की गई थी, जिसे बहुजन समाज के तमाम संगठनों ने स्वीकार किया और अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए नीले झंडों के साथ सड़कों पर उतर कर नीली क्रांति का आगाज कर दिया है। जानकारी के मुताबिक बहुजन समाज की तरफ से पहली बार भारत बंद बुलाया गया है। बीएसपी, आरजेडी समेत कई पार्टियों और गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने भारत बंद का समर्थन किया था। इसके अलावा बहराइच से बीजेपी की सांसद सावित्री बाई फुले ने भी इस बंद का समर्थन किया था।  



भारत बंद के दौरान कुछ राज्यों से झड़प, हिंसा, तोड़फोड़ की ख़बरें भी आ रही हैं। राजस्थान के बाडमेर में दुकानें बंद कराने के दौरान करणी सेना और भीम सेना के कार्यकर्ताओं के बीच पत्थर बाजी हुई है, जिसमें 25 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। जोधपुर, जयपुर में बंद दुकानों बंद कराई। इसी तरह यूपी के लखनऊ समेत सभी जिलों में दलित समाज के संगठनों का जोरदार प्रदर्शन हुआ। मेरठ में प्रदर्शन के दौरान वाहनों में आगजनी हुई है, यहां पुलिस ने प्रदर्शकारियों पर लाठीचार्ज भी किया है, वहीं आगरा और हापुड़ में भी विरोध प्रदर्शन को लेकर मारपीट हुई है। गौमतबुद्धनगर के नोएडा में दलित समाज के युवा ‘हम अंबेडकरवादी हैं, संघर्षों के आदी हैं’ नारे लगाते हुए बाइक रैली निकली। बिहार में भी कई जगह बहुजन समाज से जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कई जगह ट्रेन रोक कर शक्ति प्रदर्शन किया है। दिल्ली में भी दलित समाज के संगठनों के कार्यकर्ता अपने-अपने इलाकों में जोरदार प्रदर्शन किया। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में दलित समाज के लोगों ने दुकानें बंद करवाई और प्रदर्शन किया। इसके अलावा दिल्ली में ही मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक हजारों की संख्या में लोग मार्च निकाला। मध्य प्रदेश में भारत बंद के दौरान हुई हिंसा को  देखते हुए ग्वालियर में कर्फ्यू लगा दिया है।     



दलित संगठनों की मांग  है कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पूर्व की तरह लागू किया जाए। आपको बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट, 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला दिया था।  दलित समाज के विरोध-प्रदर्शन को लेकर दबाव में आई केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर इस फैसले को चुनौती है। केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार सहमत नहीं है और सरकार ने एससी/एससी एक्ट मामले में रिव्यू पेटिशन फाइल की है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधता और कहा कि कांग्रेस इस मामले पर राजनीति कर रही है।
   


यहां न्यूज़ पोर्टल ‘पड़ताल’ अपनी जिम्मेदारी का पालन करते हुए बहुजन समाज के सभी संगठनों से अपील करता है कि ‘भारत बंद’ के दौरान किसी भी तरह की तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा न करें, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जताएं।

मुख्य संवाददाता
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