img

उत्तरप्रदेश- एक जिद ने रचा इतिहास, कासगंज के गांव में पहली बार घोड़ी पर चढ़ा दलित दूल्हा

कासगंज जिले के निजामपुर गांव में रविवार को पहली बार कोई दलित दूल्हा घोड़ी पर चढ़ा और गांव की गलियों से बारात गुजरी। और ये सब सिर्फ एक दलित युवक की जिद के कारण संभव हो सका। जिसने उन अतिवादियों को करारा जवाब दिया जिन्होंने अपने गंदे दिमाग की उपज को परंपरा का नाम दे रखा था। पिछले छह महीने से संजय और शीतल की शादी सुर्खियों में थी। ये सुर्खी हमें सोचने पर मजबूर कर रही थी कि आखिर हम अभी तक आजाद कहां हो पाए हैं सिर्फ आजाद होने और महान होने का ढोंग कर रहे हैं। जिस देश में एक जाति विशेष को मात्र घोड़ी पर बैठने के लिए संघर्ष करना पड़े ऐसे समाज को किस रूप में देखा जाना चाहिए.... आप खुद तय कीजीए। आइए एक नज़र डालते हैं पूरी ख़बर पर....   

गौरतलब है कि जनवरी माह में गांव निजामपुर की शीतल की शादी हाथरस के रहने वाले दलित युवक संजय जाटव के साथ तय हुई थी। लेकिन यहां ठाकुऱों ने दलित समाज के लोगों को बारात के समय घोड़ी चढ़ने पर पाबंदी लगा रखी थी और धमकी दे रहे थे कि हमारे गांव में दलितों के घोड़ी पर बैठने की परंपरा नहीं हैं लेकिन संजय जिद पर अड़ा रहा और घोड़ी पर बैठने और बारात निकालने के लिए शासन-प्रशासन में लंबी लड़ाई लड़ी और और आखिर में उसकी जीत हुई। 

हालांकि इस बहुचर्चित विवाह को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन को कड़े इंतजाम करने पड़े। बारात चढ़ाने के लिए रूट तैयार किया गया। बारात गुजरने वाली सड़कों और घरों की छतों पर पुलिस और पीएसी तैनात की गई थी। इनके साथ ही छह अलग-अलग पुलिस स्टेशन के 350 से अधिक जवान भी देख-रेख कर रहे थे। एडीएम, एएसपी सहित तमाम अधिकारी शादी पूरी होने तक मौजूद रहे। प्रशासन पहले ही 37 लोगों के खिलाफ पाबंदी की कार्रवाई कर उनसे मुचलका भरवा चुका था। पाबंद हुए लोग शादी के दिन गांव से चले गए थे। 

आपको बता दें कि संजय और शीतल की शादी अप्रैल में होनी थी, लेकिन इसी ठाकुरों की जिद के चलते शादी अप्रैल में नहीं हो सकी थी। शीतल की मां ने बताया कि यह पहला मामला नहीं है जब गांव के ठाकुर मेरे घर आने वाली बारात को रोक रहे हैं। इससे पहले भी मेरी 3 ननद की शादी हुई थी। एक ननद की बारात गांव में बैंड-बाजे के साथ आधे रास्ते तक पहुंच गई थी। लेकिन जब इस बात का पता ठाकुरों को लगा तो उन्होंने बारात को रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद बारात को बिना बैंड-बाजे के ही घर के दरवाजे तक आना पड़ा था।

मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े