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हमीरपुर के मंदिर में पुजारी ने दलितों के प्रवेश पर लगाई रोक

उत्तरप्रदेश- हमीरपुर से एक ऐसी ख़बर आई है जिससे हमारे आधुनिक होने के सारे दिखावे धुल जाते हैं और पता चलता है कि बेशक हम चांद पर और मंगल पर पहुंच गए हों लेकिन हमारी मानसिकता और सोच उसी जगह रूकी हुई है जहां हजारों साल पहले थी। यहां मौदहा के गढ़ा गांव के राम जानकी मंदिर के पुजारी ने एक तुगलकी फरमान जारी करते हुए दलितों को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया। यही नहीं मंदिर में आए दलित बच्चों को धमका कर मंदिर से भगा दिया ।
गढ़ा के राम जानकी मंदिर में एक पखवाड़े से अखण्ड रामायण का पाठ चल रहा है। मंदिर के पुजारी गांव के ही कुंवर बहादुर सिंह ने गेट पर एक बोर्ड टांग दिया जिसमें लिखा गया कि जिसमें लिखा था कि अखंड पाठ के दौरान मंदिर में दलितों का प्रवेश वर्जित है। इस बोर्ड के टांगे जाने से गांव के लोगों में गुस्सा है। सोमवार को मामला तूल पकड़ने लगा तो पुजारी ने बोर्ड हटवा दिया। हालांकि पुजारी अभी भी इस बात पर अड़ा हैं कि मंदिर में दलितों को घुसने नहीं दिया जाएगा। पुजारी का दावा है कि मंदिर उसके पुरखों का है, इसलिए यहां गांव के दलितों का आना वर्जित है।
गांव के उमाशंकर ने बताया कि उनका भतीजा अपने साथी के साथ रामायण का पाठ करने मंदिर गया था, जिसे पुजारी ने घुसने से रोक दिया। मामले की जानकारी पर एसडीएम मौदहा ने जांच के लिए एक टीम भेजी है। फिलहाल इस मामले को लेकर पुलिस को सतर्क कर दिया गया है।
मौदहा के एसडीएम सुरेश मिश्रा ने बताया कि मंदिर में दलितों के जाने पर पाबंदी लगाने की जानकारी मिली है। जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई होगी। हालांकि अब पुजारी कुंवर बहादुर सिंह कह रहा है कि मंदिर में तमाम लोग शराब पीकर आते हैं जिससे यहां का माहौल खराब हो रहा है। इसीलिए ऐसे तत्वों के प्रवेश पर रोक लगाने का बोर्ड टांगा गया था। लेकिन गांव के लोग इस आरोप को निराधार बता रहे हैं। गांव के प्रधान का कहना है कि पांच हजार की आबादी में करीब 30 फीसदी आबादी दलितों की हैं, ऐसे में ये घटना निंदनीय और शर्मनाक है।

मुख्य संवाददाता
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