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शांतिधाम की जमीन पर दबंगों का कब्ज़ा, दलित का अंतिम संस्कार करने से रोका, पुलिस-प्रशासन के दखल के बाद हो सका संस्कार

मध्यप्रदेश के गुना में दलित अपमान का एक शर्मनाक मामला सामने आया है, हम एक ऐसे देश में बसते हैं जहां मृत्यु के बाद भी दलित को उसकी जाति से छूट की इज़ाज़त नहीं है। संवेदनहीनता इतनी कि दलित की लाश के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाता है जैसा उसके साथ जिंदा होने पर किया जाता रहा होगा।

रविवार को मध्यप्रदेश के गुना जिले के बिलोनिया चक गांव में दबंगों ने एक दलित का दाह संस्कार होने से रोक दिया। 80 वर्षीय अमरु पुत्र माधो सिंह जाटव की लंबी बीमारी के चलते मौत हो गई थी। रविवार सुबह जैसे ही परिजन और रिश्तेदार उसके शव को लेकर गांव में ही पठार पर दाह संस्कार करने पहुंचे तो इसी बीच यादव समुदाय के कुछ लोग वहां आ गए और बोले कि यह भूमि उनकी है। यहां पर अंतिम संस्कार नहीं होगा। दलित डर गए और वह शव को लेकर पठार पर ही बैठे रहे।  

जिसके बाद मामला गहरा गया और अधिकारी हरकत में आए और मौके पर पहुंच गए। जिसके बाद पता चला कि इस भूमि पर यादव समुदाय के एक व्यक्ति ने कब्जा किया हुआ है। इसी वजह से वह अंतिम संस्कार की रस्म नहीं होने दे रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे तो शरारत करने वाले फरार हो गए। थोड़ी देर में कैंट थाने से बल, तहसीलदार, पटवारी, सचिव और अन्य अमला गांव पहुंच गया। पीड़ित परिवार की समस्या सुनने के बाद अधिकारियों ने करीब छह दो घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार करवाया।   दलित परिवार का कहना था कि इसी जगह पर गांव के लोग दाह संस्कार करते थे, लेकिन यादव परिवार ने इस भूमि के एक हिस्से में बागड़ करके कब्जा कर लिया है। इस कारण वह यहां से हमें भगा रहा था। हालांकि पुलिस का कहना है कि पीड़ित परिवार ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, क्योंकि जो विवाद था, वह सुलझ गया। 

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