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दलितों के खिलाफ फिर सामने आई पुलिस की करतूत, नाबालिग लड़की के अपहरणकर्ताओँ को गांव वालों ने धर दबोचा, लेकिन पुलिस ने मौके पर पहुंचने से किया इंकार

22 अगस्त 2017, मध्यप्रदेश, सागर- रात को करीब 10 बजे खिमलासा थाना क्षेत्र के बसाहरा गांव में एक दलित नाबालिग लड़की का अपहरण कर ले जा रहे तीन युवकों को मोहल्ले वालों ने धर दबोचा और लड़की को छुड़ाया लिया। जब पुलिस को इसकी सूचना दी गई तो पुलिस ने गाड़ी में डीजल कम होने की बात कहते हुए आने से इनकार कर दिया। जिसके कुछ देर बाद दबंगों ने लड़की को बचाने वाले लोगों पर रॉड और लाठियों से हमला बोल दिया और तीनों आरोपियों को छुड़ा ले गए। हमले में एक महिला सहित चार लोग घायल हुए हैं।

घटना के बाद से गांव के दलितों में आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय पर पुलिस पहुंच जाती तो उनके साथ मारपीट नहीं हो पाती। और तीनों अपहरणकर्ता पुलिस की गिरफ्त में होते। सोमवार को बसाहरा गांव के करीब 100 लोग बीना पहुंचे। उन्होंने बीना थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देते हुए बताया कि रविवार रात करीब 10 बजे गांव के तीन दबंग युवक महेंद्र राजपूत, दिब्बू राजपूत और विजय कुशवाहा घर में अकेली सो रही किशोरी का अपहरण कर घर के बाहर ले जा रहे थे। चीख पुकार सुनकर मोहल्ले वालों ने तीनों युवकों को धर दबोचा और किशोरी को मुक्त कराया। इसके बाद उन्होंने 100 नंबर पर सूचना दी। लेकिन व्यस्त होने की बात कहकर 100 डायल मौके पर नहीं पहुंची। फिर खिमलासा थाने फोन किया तो पुलिस ने गाड़ी में डीजल कम होने की बात कहकर आने से इनकार कर दिया। पुलिस को सूचना देने के कुछ समय बाद तीनों दबंग लड़कों के परिजन पप्पू ठाकुर, नवल ठाकुर सुरेंद्र और कमल सिंह ने किशोरी को बचाने वाले लोगों पर रॉड और डंडों से हमला कर दिया और तीनों युवकों को छुड़ा ले गए।

एक की गर्दन और पैर में गंभीर चोटें आई हैं, उन्हें बीना के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बीना के एएसपी पीएल कुर्बे ने जानकारी दी कि पीड़ितों के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी। और उन्हें किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि मारपीट और हमले की बात पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। पूरा मामला देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि जैसे पुलिस भी दबंगों से मिली हुई थी, वरना इतनी गंभीर घटना को पुलिस इतने हल्के में कैसे ले सकती है, 100 नंबर पर शिकायत की गई तो व्यस्त होने की बात कहकर पुलिस ने आने से इंकार कर दिया, और जब थाने में फोन किया गया तो गाड़ी में डीजल कम होने का बहाना लगाकर मौका ए वारदात पर भी पुलिस नहीं पुहंची। या तो पुलिस दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के प्रति गंभीर नहीं है या फिर खुद भी जातिवादी मानसिकता से जकड़ी हुई है, जो खुलेआम कानून को ताक पर रखकर दबंगों का साथ देने में लगी है। ऐसे में आरोपी युवकों के खिलाफ कितनी उचित कार्यवाही होगी इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

मुख्य संवाददाता
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