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राष्ट्रपति पद का स्तर गिराता बीजेपी का होर्डिंग, महामहिम को भी दलित से ऊपर नहीं समझते शायद ?

कानपुर में बीजेपी का एक होर्डिंग इन दिनों खासा चर्चा में है, जिसकी वजह से बीजेपी कानपुर इकाई विवादों में आ गई है । किदवाई नगर में भाजपा द्वारा लगाया गया ये होर्डिंग भाजपा की मानसिकता और चरित्र समझने के लिए काफी है। जिसे देखकर कोई भी जागरुक नागरिक पहली नज़र में ही बता देगा कि भाजपा दलितों को किस हैसियत से देखती है । फिर चाहे वो भारत के राष्ट्रपति ही क्यों न हों। भाजपा सबको जाति से नापती है।  ख़बर को आगे पढ़ने से पहले आप फिर से एक बार ऊपर लगी फोटो को गौर से देखिए।  जी हां वैसे तो भाजपा के इस होर्डिंग में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी को राष्ट्रपति बनने पर बधाई दी गई है। लेकिन उनकी फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो के नीचे बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ दी गई है । होर्डिंग में सबसे ऊपर प्रधानमंत्री मोदी और उसके बाद मुख्यमंत्री योगी की फोटो दिख रही है। दोनों की तस्वीरों के नीचे राष्ट्रपति कोविंद की फोटो है, जिसमें राष्ट्रपति जी को ‘दलित समाज के चिंतक एवं कानपुर के गौरव’ लिखा गया है।  इस होर्डिंग को देखकर ऐसा लगता है,जैसे भाजपा वाले खुद ही दलित राष्ट्रपति को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं।   

जिसको भी ये होर्डिंग बनवाने का जिम्मा दिया गया होगा, जाहिर सी बात है वो भाजपा कार्यकर्ता ही रहा होगा। जिसे शायद ये नहीं पता होगा कि राष्ट्रपति का पद गैर राजनैतिक पद है बल्कि देश का सबसे सर्वोच्च संवैधानिक पद है। लेकिन अपनी चापलूसी में वो ये सब भूला बैठा होगा या जानने की कोशिश भी नहीं की होगी।

ये बताने की ज़रूरत नहीं है, उस भले मानुष के लिए सर्वोच्च और सर्वस्व सिर्फ मोदी जी ही रहे होंगे । उसके बाद वो उत्तर प्रदेश का रहने वाला होगा तो प्रदेश स्तर पर योगी जी सबसे बड़े हुए। अब इसके बाद तो उसके लिए कोई भी पद मायने नहीं रखता और विचारधारा ही सबकुछ हो जाती है । इस होर्डिंग से उसकी दलित विरोधी मानसिकता भी साफ झलकती दिख रही है ।

सोशल मीडिया पर ये होर्डिंग खूब चर्चा का विषय बना हुआ है, इस होर्डिंग को फेसबुक पर अपलोड करने वाले सुनील कनौजिया का कहना है कि यह कहीं न कहीं सर्वोच्च पद के साथ मजाक किया गया है l उनका ये भी कहना है कि मैंने यहां से निकलते हुए ये होर्डिंग देखा तो मुझे लगा कि इसमें देश के सर्वोच्च पद का मखौल बनाने की कोशिश हो रही हैl  जबकि ये  संवैधानिक पद है और यह गैर राजनैतिक पद होता है, यह होर्डिंग देखने से लग रहा है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ज्यादा सर्वोच्च है इसलिए इनकी फोटो महामहिम से ऊपर लगी है l इसे देखने से लगता है कि राष्ट्रपति जी सिर्फ बीजेपी के राष्ट्रपति हैंl या इसे बनवाने वालों को संविधान की जानकारी नहीं है। जिन्हें देश के इतिहास-भूगोल की जानकारी नहीं होगी, वह देश की राजनीति क्या करेंगे, यह बात होर्डिंग दर्शाता है l साथ ही इस होर्डिंग को देखने से पता लगता है कि इनकी मानसिकता नही बदली है और यह दलितों को आज भी उसी नजर से देखते है l

मुख्य संवाददाता
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1 Comments

  •  
    Raja R R
    2017-09-09

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