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एससी/एसटी कोचिंग मामले में घोटाला, 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

आगरा का समाज कल्याण विभाग इन दिनों काफी चर्चाओं में है .... ताज़ा मामला सरकार द्वारा संचालित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर आईएएस/पीसीएस परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र में लाखों रूपये के गबन का निकल कर सामने आया है जिसमें दस लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ है। दरअसल समाज कल्याण कार्यालय से दलित छात्रों को कोचिंग कराने की योजना चलाई जाती है। 2009 से लेकर 2014 तक कर्मचारियों ने सरकारी मानकों को दरकिनार करते हुए तीन निजी कोचिंग संचालकों को जिम्मा दे दिया और इन कोचिंग संचालकों को 13 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया, इस मामले की जांच हुई तो समाज कल्याण विभाग के छः अधिकारी और चार कोचिंग संचालक आरोपी पाए गये, लिहाजा छह अधिकारी और चार कोचिंग संचालकों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है, केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने तफ्तीश शुरू कर दी है।
  मामले में नियमों को ताक पर रखकर तीन कोचिंग इंस्टीट्यूट को ठेका दे दिया गया। हाईकोर्ट में रिट दायर होने के बाद कोर्ट ने जांच के आदेश दिए।  प्रमुख सचिव समाज कल्याण को हाईकोर्ट ने तलब कर लिया।  वर्ष 2016 में यशपाल सिंह ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में घोटाले का जिक्र किया था। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले की विभागीय जांच कराई जाए। आरोपियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। आरोप पाए जाने पर मुकदमा कायम कराया जाए। जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई। सहायक लेखाधिकारी निदेशालय जेपी तिवारी, जिला कल्याण अधिकारी केपी सिंह तथा विशेष सचिव समाज कल्याण सुनील कुमार ने जांच की। जांच में यह पाया कि आरोप सही हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कार्रवाई की संस्तुति कर दी। जांच रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग में दबा दी गई। हाईकोर्ट ने अपने पुराने आदेश पर फिर संज्ञान लिया। प्रमुख सचिव समाज कल्याण को तलब किया गया। एसएसपी के आदेश पर गबन और धोखाधड़ी की धारा के तहत मुकदमा लिखा गया है। प्रवक्ता के चयन में धांधली सरकार द्वारा संचालित कोचिंग में पढ़ाने के लिए प्रवक्ताओं का चयन किया जाना था। 
इस चयन की जिम्मेदारी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति और उप निदेशक समाज कल्याण को दी गई थी। विभाग ने इस संबंध में कुलपति से संपर्क ही नहीं किया। कोचिंग में विवि और उससे अधीन सरकारी कॉलेजों के प्रवक्ताओं को पढ़ाना था। नियम ताक पर रखकर छात्रों को कोचिंग के लिए तीन प्राइवेट कोचिंग सेंटरों पर भेज दिया गया। कोचिंग में छात्रों को पढ़ाया गया या नहीं, जितने बच्चे दिखाए गए वास्तव में उतने बच्चे थे। यह भी जांच का विषय है। किसके खिलाफ हुआ मुकदमा हरीपर्वत थाने में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी अंचित मनी भारती, सोबरन सिंह यादव, गौतम कुमार, उप निदेशक सरोज प्रसाद, एसडीएम राजेश कुमार, विवि के परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी लायक सिंह को नामजद किया गया है। मुकदमे में प्रबंध निदेशक सेंटर फॉर एंबीशन, निदेशक कॅरियर एवेन्यू एजूकेशन सोसाइटी, निदेशक राम मनोहर लोहिया शिक्षा समिति को भी अभियुक्त बनाया गया है। विभागीय अधिकारियों ने इन तीन कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कराने की जानकारी दी थी।  

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