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ताजमहल पर उलझी योगी सरकार, आगरा दौरे के बहाने लिपापोती की कोशिश...

ज्ञात है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने राज्य में ऐतिहासिक धरोहरों और स्थलों की एक पर्यटन सूची जारी की थी, जिसमें आगरा के ताज महल के नाम को उत्तर प्रदेश की भाजपा नीत सरकार ने जगह नहीं दी थी। ये बात अलग है कि बाद में, विवाद बढ़ने पर दबे स्वर में सफाई दी गई कि गलती से ताजमहल का नाम छूट गया था। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने राज्य में ऐतिहासिक धरोहरों और स्थलों की एक पर्यटन सूची से ताजमहल का नाम क्या हटाया कि भाजपा के छुटभैये नेताओं की जीभ को खुराक मिल गई और लग गए अनाप-सनाप बयानबाजे करने में।

उत्तर प्रदेश की भाजपा नीत सरकार की इस करामात के बाद, बाद सरधना से भाजपा विधायक संगीत सोम ने शामली में दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल पर विवादित बयान दे डाला। संगीत सोम ने कहा कि ताजमहल को उत्तर प्रदेश की पर्यटक सूची से क्या हटाया कि लोगों ने तूफान मचा दिया। क्या ताज, कैसा ताज, कहाँ का ताज...कौन सा ताज...ताज महल भारतीय संस्कृति पर धब्बा है। वह ताज जिसके निर्माता ने अपने बाप को कैद कर दिया था। रविवार (15 अक्टूबर) को सोम ने कहा कि ताज महल बनाने वाले मुगल शासक ने उत्तर प्रदेश और हिंदुस्तान से सभी हिंदुओं का सर्वनाश किया था।  

दी वायर के विनोद दुआ के अनुसार बारहवीं पास संगीत सोम ने इतिहास की जानकारी पता नहीं कहाँ से ली है। ऐतिहासिक तथ्य तो ये है कि शाहजहाँ ने अपने बाप जहाँगीर को कभी कैद में डाला ही नहीं..., हाँ। शाहजहाँ के बेटे औरंगजेब ने शाहजहाँ को जरूर कैद में डाल दिया था। दुआ का यह तर्क भी काबिले गौर है कि संगीत सोम का यह कहना कि ताजमहल बनाने वाले मुगल शासक ने उत्तर प्रदेश और हिंदुस्तान से सभी हिंदुओं का सर्वनाश किया था, न केवल बचकाना है अपितु तथ्यों से परे है। संगीत सोम को किसने बता दिया कि शाहजहाँ के जमाने में भारत में उत्तर प्रदेश नाम का कोई राज्य भी हुआ करता था। अरे भई! उस जमाने में तो भारत टुकड़ों में बंटा हुआ था। अनेक रजवाड़े हुआ करते थे भारत में।

संगीत सोम कहते हैं कि ऐसे शासकों और उनकी इमारतों का नाम अगर इतिहास में होगा तो वह बदला ही जाएगा। संगीत सोम को जान लेना चाहिए कि इतिहास कभी भी नहीं बदला जा सकता। हाँ! किताबों में जरूर बदलाव किया जा सकता है। ऐसे बदलावों का होना कोई नई बात भी नहीं है। ऐसे बदलाव हमेशा-हमेशा सरकारों या हुक्मरानों द्वारा किए जाते रहे हैं किंतु इतिहास वहीं का वहीं है...कुछ भी तो नहीं बदला। क्योंकि इतिहास भूतकाल की बात है। ... आप वर्तमान में तो कुछ भी बदलाव कर सकते हैं किंतु भूतकाल में नहीं। वह समय तो निकल गया। ऐसे में इतिहास में परिवर्तन करने की बात करना नासमझी अथवा अज्ञानता का ही प्रमाण है। भाजपा के एक नेता ने तो यहाँ तक कह दिया कि ताजमहल के स्थान पर गोरखनाथ मन्दिर का नाम शामिल कर दिया जाना चाहिए। किंतु भाजपा शीर्ष मौन बना हुआ है।

कमाल की बात तो ये है कि भाजपा अपने ऐसे खिसके हुए नेताओं के खिलाफ कोई  कार्यवाही करने के बजाय उसे ढकने का ही प्रयास करती दिखती है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सिंह ने फटाक से बयान दे डाला कि संगीत सोम जो कह रहे हैं, वह उनका निजी विचार है। वैसे वे यह भी कहते हैं कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में शामिल है। साथ ही यह भी कि जिस शासक ने इसे अपनी बेगम की याद में बनवाया, वह क्रूर शासक था जिसने हिन्दुओं पर कई अत्याचार किए थे। इसके साथ ही उनकी ही पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सरदार आर. पी. सिंह ने कहा है कि ताजमहल न केवल देशी-विदेशी पर्यटकों का आकर्षण केंद्र है बल्कि वह मुगलकालीन स्थापत्य कला का एक जीता जागता बेजोड़ नमूना है, जिसकी कद्र पूरी दुनिया करती है।
   
बीजेपी के विधायक संगीत सोम की ओर से दिए गए बयान के बाद ताजमहल को लेकर छिड़ी बहस और भाजपा की हो रही किरकिरी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी मैदान में कूदना पड़ा। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश की धरोहरों पर गर्व करना चाहिए। पी.एम. मोदी ने आगे कहा, 'अपने देश की धरोहरों पर गर्व किए बिना आगे बढ़ नहीं सकता।'  अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कही गई इस बात तो संगीत सोम के बयान पर मचे विवाद से जोड़कर देखना कतई भी अतार्किक नहीं है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ताजमहल को ऐतिहासिक धरोहर बताया था किंतु उत्तर प्रदेश की पर्यटक स्थानों की सूची से निकाल भी दिया था। अब योगी जी कह रहे हैं कि भारतीय मजदूरों के पसीने से बना है ताजमहल। मंगलवार (17.10.2017) को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'हमें इसकी तह में जाने की जरूरत नहीं है  कि ताजमहल क्यों बना, किसने बनाया, किस उद्देश्य के लिए बनाया। महत्पूर्ण ये है कि ताजमहल भारत के मजदूरों की खून-पसीने की कमाई और उनकी मेहनत से बना हुआ है। वह अपनी वास्तु के लिए जग-विख्यात है। वह एक पुरातात्विक इमारत है। उसका संरक्षण, संवर्धन, पर्यटन की दृष्टि से उसको बढ़ावा देने और वहां आने वाले पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा का दायित्व उत्तर प्रदेश सरकार का है। हम लोग उसका निर्वहन करेंगे।'  सवाल है कि जब ताजमहल के बारे में योगी जी के इतने उत्तम विचार हैं तो फिर ताजमहल को उत्तर प्रदेश की पर्यटक स्थानों की सूची से निकालने का क्या तात्पर्य था?
   
दुनियाभर में प्रेम के अद्वितीय प्रतीक ताजमहल को लेकर ऐसा विवाद शुरू हुआ कि  विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बीजेपी के फायरब्रांड नेता और अनेक समाज विरोधी विवादों में फंसे विधायक संगीत सोम के दिए गए विवादित बयान पर अब ए.आई.एम.आई.एम. के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार करते हुए ट्वीट कर कहा,  'लाल किले को भी 'गद्दारों' ने बनाया था। तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले पर तिरंगा फहराना छोड़ देंगे?  क्या मोदी और योगी घरेलू और विदेशी पर्यटकों से कहेंगे कि वे ताजमहल को देखने ना आएं? यहां तक कि दिल्ली में हैदराबाद हाउस को 'गद्दारों' ने ही बनाया था। क्या मोदी यहां विदेशी मेहमानों की मेजबानी छोड़ देंगे?  ममता बनर्जी ने तो यहाँ तक कहा कि राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, साउथ और वैस्ट सचिवालय और न जाने कितनी ही इमारतें अंग्रेजों द्वारा बनवाई गईं, तो फिर भाजपा सरकार इन्हें क्यूँ गले से लगाए हुए है। अंग्रेज तो मुगल शासकों से भी ज्यादा क्रूर थे....लूटने आए थे और लूटकर चले गए।
   
लगता तो ये है कि भाजपा ने ताजमहल को भी जुमलेबाजी की दलदल में ढकेल दिया है। कहना अतिशयोक्ति न होगा कि योगी जी का आगरा दौरा....नाक काटकर रूमाल से पौंछने की एक कोशिश है। लगता तो यह भी है कि पी एम मोदी अपने ऐसे मुंहजोर नेताओं के खिलाफ कोई कार्यवाही न करके सार्वजनिक मंचों से इशारों-इशारों में तो अपने ऐसे नेताओं को चेतावनी देते तो दिखते हैं किंतु उनकी बात का किसी पर कोई असर होता नहीं दिखता। कहीं ऐसा तो नहीं कि यह एक सोची समझी आंतरिक बात है कि भक्तों जो आपको करना है करो...मैं चाहे जो चेतावनी देता रहूँ।
   
ताजमहल पर बीजेपी विधायक संगीत सोम के बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी है। उधर विवाद के बीच यूपी के सी.एम. योगी आदित्यनाथ के 26.10.2017 को आगरा जाने की खबर सामने आ रही है। खबर है कि इस दौरान वे न सिर्फ पर्यटन विभाग के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे, बल्कि प्रेम के प्रतीक ताजमहल का दीदार करने भी जाएंगे। सी.एम. बनने के बाद योगी भले ही पहली बार आगरा जा रहे हैं, लेकिन उनका ये दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब ताजमहल को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। माना जा रहा है कि योगी के आगरा दौरे से ताजमहल को लेकर जारी विवाद थम सकता है लेकिन ऐसा हो सकता है, मुझे ऐसा नहीं लगता। हालाँकि योगी ने आनन-फानन में एक बड़ी मेहरबानी और भी की है कि ताजमहल की फोटो प्रदेश के 2018 के केलेंडर में जगह देकर विवाद को रोकने का असफल प्रयोग किया है। जनता उनके इस प्रयोग के झांसे में आ पाएगी, मुझे तो ऐसा नहीं लगता। खैर! कुछ भी हो, संगीत सोम के बयान ने बीजेपी को बैकफुट पर ला दिया है। शायद यही वजह है कि सी.एम. योगी खुद आगरा जाकर डैमेज कंट्रोल करने की जुगत में लीन हैं।  

लेखक:
 तेजपाल सिंह तेज (जन्म 1949) की गजल, कविता, और विचार की कई किताबें प्रकाशित हैं- दृष्टिकोण, ट्रैफिक जाम है, गुजरा हूँ जिधर से आदि ( गजल संग्रह), बेताल दृष्टि, पुश्तैनी पीड़ा आदि (कविता संग्रह), रुन-झुन, खेल-खेल में आदि ( बालगीत), कहाँ गई वो दिल्ली वाली ( शब्द चित्र), दो निबन्ध संग्रह  और अन्य। तेजपाल सिंह ‘तेज’  साप्ताहिक पत्र ग्रीन सत्ता के साहित्य संपादक, चर्चित पत्रिका अपेक्षा के उपसंपादक, आजीवक विजन के प्रधान सम्पादक तथा अधिकार दर्पण नामक त्रैमासिक के संपादक रहे हैं। स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त होकर इन दिनों आप स्वतंत्र लेखन के रत हैं। हिन्दी अकादमी (दिल्ली) द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार ( 1995-96) तथा साहित्यकार सम्मान (2006-2007) से सम्मानित किए जा चुके हैं।  


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