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मायावती से डरी बीजेपी, 2010-11 में चीनी मिल खरीद-फरोख्त की सीबीआई जांच शुरू करवाई

सपा-बसपा गठबंधन से डरी हुई भाजपा ने फिर से सीबीआई का सहारा लेकर विपक्ष को घेरना शुरू कर दिया है। यह किसी से छिपा नहीं है कि सरकारें किस तरह से अपने विरोधियों के खिलाफ सीबीआई का बेजा इस्तेमाल करती रही हैं। 2010-2011 में उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार थी। उस समय में 21 चीनी मिलों को करीब 1100 करोड़ रुपए में बेचा गया था। सत्ता में आते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि मैं इस मामले की जांच करवाऊंगा।

योगी सरकार ने इस मामले को 12 अप्रैल को औपचारिक तौर पर सीबीआई के हवाले कर दिया था। प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने इसकी जानकारी दी। उनके अनुसार चीनी मिलों की बिक्री में कुछ गड़बड़ियां पाई गई हैं इसलिए मामले की जांच सीबीआई के हवाले की गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, जांच एजेंसी ने दस्तावेजों की छानबीन शुरू कर दी है। और जल्द ही एफआईआर दर्ज की जा सकती है। 

उत्तर प्रदेश में बसपा प्रमुख मायावती वर्ष 2007 से 2012 तक मुख्यमंत्री थी। वर्ष 2017 में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मायावती पर आरोप लगाया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती और पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के इशारे पर चीनी मिलें बेची गयी थीं। हालांकि चीनी मिलों को बेचने के लिए दिये गये आदेश पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी के हस्ताक्षर हैं। 

गौरतलब है कि सपा सरकार के दौरान सीएजी ने अखिलेश सरकार को इस मामले में वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद नवंबर 2012 में लोकायुक्त को यह जांच सौंपी गई थी लेकिन तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने डेढ़ साल से ज्यादा समय तक जांच के बाद इसमें कोई घोटाला नहीं पाया था।

मुख्य संवाददाता
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1 Comments

  •  
    Shriniwas
    2018-05-08

    BJP Sarkar ko ghotale se matlab nhi h BJP Ko to SP or BSP se dar lag raha h.

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