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सिग्नेचर ब्रिज को लेकर सरकार के ढुलमुल रवैये के खिलाफ बसपा युवा समर्थकों का विरोध-प्रदर्शन

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वज़ीराबाद में यमुना नदी पर निर्माणाधीन सिग्नेचर ब्रिज लगातार विवादों के केंद्र में रहा है। जब ये ब्रिज बनकर तैयार होगा तब बेशक लोगों को सुविधा देगा लेकिन फिलहाल वो लोगों के लिए भारी परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके अधूरे काम की वजह से यहां पर हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है, पीक ऑवर्स में तो यहां से गुजरना मतलब अपने आप में एक युद्ध जीतने जैसा है।
  
गुरूवार को बहुजन समाज पार्टी के युवा समर्थकों ने यहां पर लगे लंबे जाम को खुलवाया और दिल्ली सरकार के खिलाफ विरोध जताया। उनका कहना था कि ये ब्रिज पिछले 13 सालों से बन रहा है और पुरानी व मौजूदा सरकारों के ढुलमुल रवैये के कारण इसका काम पूरा ही नहीं हो पा रहा है। इसके आसपास रहने वालों और यहां से रोजाना गुजरने वालों की जिंदगी नरक हो गई है। यहां से गुजरने वालों को रोजाना घंटों जाम से जूझना पड़ता है। उनका कहना है कि वे जल्द ही यहां पर एक बड़ा विरोध-प्रदर्शन करेंगे ताकि दिल्ली सरकार की आंखें खुले और वो सिग्नेचर ब्रिज को जल्द से जल्द पूरा करे। 
 
प्रदर्शन के दौरान बसपा युवा समर्थकों के ग्रुप में देवाशीष  जरारिया, संदीप गौतम, सोमवीर गौतम, विनीत गौतम, प्रशांत बसपाई, दीपक सर, कुलप्रकाश आंबेडकर, अखलाक अहमद, मास्टर मेघ सिंह, मेघ सिंह निर्मल, ओंकार जी एवं अन्य युवा साथी मौजूद रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके अधूरे पड़े काम की वजह से यहां आए दिन छुटमुट दुर्घटनाएं होती रहती हैं, अगर भविष्य में यरहां कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो उसकी जिम्मेदार दिल्ली सरकार होगी।
     
 गौरतलब है कि सिग्नेचर ब्रिज दिल्ली की पूर्व कांग्रेसी सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक था। इसे बनाने का निर्णय 2004 में लिया था। उस समय इसका बजट करीब 450 करोड़ रुपये रखा गया था। बाद में सरकार ने इसके डिजाइन में फेरबदल किया और इसे 'माइल स्टोन' के रूप में विकसित करने की बात कही।  और इसका बजट बढ़ाकर 1100 करोड़ रुपये कर दिया। बाद में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और इसका बजट करीब 1600 करोड़ रुपये हो गया। इसे  पिछले साल दिसंबर 2016 में तैयार होना था, और अब अक्टूबर 2017 चल रहा है लेकिन निकट भविष्य में ये तो ये तैयार होता नहीं दिख रहा।  


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