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मायावती के बयान से महागठबंधन को लगा कड़ा झटका, टिकटों का बंटवारा होने तक किसी के साथ मंच साझा करने से किया इनकार

लखनऊ- 24 अगस्त, 2017,  बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पटना में 27 अगस्त को होने वाली रैली और सेक्युलर फ्रंट में शामिल होने न होने को लेकर अपनी पार्टी का रुख साफ कर दिया है । सुश्री मायावती ने कहा है कि उन्हें आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की तरफ से रैली में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा गया है, लेकिन वो इसमें शामिल नहीं होंगी ।

मायावती ने कहा कि उन्होंने आरजेडी को साफतौर पर बता दिया है कि बीएसपी एक सेक्युलर पार्टी है और इस मामले में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की सोच, मंशा के हिसाब से भारतीय संविधान को सही मायने में लागू कराके यहां देश के लगभग सवा सौ करोड़ लोगों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भलाई, तरक्की भी चाहती है और हमारी पार्टी इसी मिशनरी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लगातार संघर्ष भी कर रही है । इसी प्रयास के तहत बीजेपी के खिलाफ वो सेक्युलर पार्टियों की एकजुटता और संगठन के लिए तैयार है, लेकिन रैली में शामिल होने वाली ज़्यादातर राजनीतिक पार्टियां बाद में टिकट बंटवारे को लेकर आपस में लड़ाई और एक-दूसरे की पीठ में छुरा घोपने की कोशिश करती हैं, जो बिहार में हम सब ने हाल ही में देखा है । उन्होंने बिल्कुल साफ शब्दों में कहा कि बीएसपी किसी भी क्षेत्रीय पार्टी या राष्ट्रीय पार्टी के साथ तभी मंच साझा करेगी, जब ये तय हो जाए कि किसको कितनी सीटें मिलेंगी । उन्होंने अपनी पार्टी की नीति से अवगत कराते हुए कहा कि बीएसपी अपने आत्मसम्मान और मूवमेंट के साथ कभी कोई समझौता नहीं करती है ।

बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी पर तीखा हमला किया और कहा कहा कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए साम दाम दंड भेद के नीति अपना कर पूरे विपक्ष को तोड़ने में लगी हुई है, ऐसे में बीजेपी को हराने के ल‌िए ठोस रणनीत‌ि बनाने की जरूरत है । इसलिए किसी भी गठबंधन से पहले टिकट बंटवारे समेत सभी मुद्दों पर साफ बात होनी चाहिए । इस मामले में मायावती का प्रेस के सामने आकर बोलने की मुख्य वजह वो कथित पोस्टर है, जिसमें पूरे विपक्ष से एकजुट होने की अपील की गई थी ।

आपको बता दें कि पिछले दिनों  बीएसपी के नाम से बने ट्वीटर अकाउंट ‘BSP up 2017’ के जरिये देशभर के विपक्षी दलों से सामाजिक न्याय के समर्थन में एक होने की अपील करता हुआ एक पोस्टर जारी किया गया था, जिसमें बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती, एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के साथ जेडीयू के संस्थापक और अब बगावती तेवर अपनाने वाले शरद यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के अलावा कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की तस्वीर छापी गई थी । वो कथित पोस्टर वायरल होते ही सोशल मीडिया, अखबारों और टीवी चैनलों की मुख्य ख़बर बन गया, जिससे राजनीतिक गलियारे में चर्चा जोर पकड़ने लगी थी कि फिर से यूपी की सियासत में बीएसपी और एसपी आपसी कटुता भुलाकर महागठबंधन के रूप में एक साथ आ जाएंगी । लेकिन वो हो न सका, क्योंकि कथित पोस्टर की ख़बर फैलते ही बीएसपी ने तुरंत प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए पोस्टर को लेकर खंडन किया था और कहा था कि पार्टी का कोई अधिकारिक ट्विटर अकाउंट नहीं है, इसलिए बीएसपी के ट्विटर हैंडल के नाम से पोस्टर जारी करने का सवाल ही नहीं उठता है । 
 

मुख्य संवाददाता
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1 Comments

  •  
    Sachin
    2017-08-25

    Good decision

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