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क्या जे पी सिंह हुए गहरी साजिश के शिकार?

16 जुलाई 2018 को बसपा के राष्ट्रीय संयोजक व तीन बारर से लगातार राज्य सभा के सांसद वीर सिंह व नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और दूसरे राष्ट्रीय संयोजक जय प्रकाश सिंह ने लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में लखनऊ और कानपुर जोन के पार्टी पदाधिकारियों के कैडर कैंप को पहली बार संबोधित किया था।

जय प्रकाश सिंह ने कॉडर कैंप में राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि बच्चा या तो मां पर जाता है या बाप पर। राहुल पिता की जगह मां पर गए हैं। पिता देश के थे। उन पर जाते तो भला हो सकता था। मां विदेशी महिला हैं, वे कभी सफल नहीं हो सकते। 

पीएम पद की एक मात्र विकल्प मायावती हैं। कर्नाटक में विपक्षी दलों के मंच पर सबसे बीच में मायावती थीं इसलिए उन्हें सभी दलों ने अपना नेता मान लिया है। बीर सिंह और जेपी से पहले इस तरह की टिप्पणी अपने यूट्यूब इंटरव्यू में जेएनयू के प्रोफेसर विवेक कुमार भी कर चुके हैं।

सवाल उठ रहे हैं:- 

1- बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी क्यों की ? 
2- क्या बसपा सुप्रीमो मायावती की गुड बुक में आने के लिए ऐसा किया ? 
3- क्या किसी विरोधी पार्टी के इशारे पर तीन राज्यों में होने जा रहे सम्भावित गठबंधन को रोकने का प्रयास किया ? 
4- क्या इसमें पार्टी के कुछ सीनियर लोगों का भी हाथ रहा ? 
5- इतने बड़े स्तर के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करने की जिम्मेदारी नये और अपरिपक्व पदाधिकारी को कैसे मिली ? 
6- कहीं फिर से किसी नये पारिवारिक सदस्य को इस खाली हुए पद पर लाने की आहट तो नहीं ?

उपरोक्त सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिल जाएंगे। परन्तु बसपा के संस्थापक मा कांशीराम जी ने कहा था "जिस पार्टी में अनुशासन नहीं होता वह पार्टी कभी अच्छा शासन नहीं कर सकती"। इस बात को ध्यान में रखते हुए बहन जी ने जेपी के ऊपर एक्शन करके यह संकेत दिया है कि अभी और भी कुछ लोग नप सकते हैं। 

अभी जय प्रकाश जी को नये होने के नाते उन लोगों के नाम उजागर करने का मौका है जिन्होंने इस काम को अंजाम दिलवाया। पार्टी की अनुशासन समिति बनाकर इस घटना की जांच बहन मायावती जी को अपने स्तर पर करानी चाहिए ताकि बहुजन समाज के वोटरों में अच्छा संदेश जा सके। इसमें कोई शक नहीं कि फौरी तौर पर 17- 7- 2018 को इस मामले में कार्रवाई करके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नेशनल कोर्डिनेटर के पद से जेपी को हटा दिया। इसके अलावा जय प्रकाश सिंह से सभी जिम्मेदारी भी छीन ली गईं। उक्त कार्रवाई के माध्यम से देश के सभी बसपा कार्यकर्ताओं को ऐसी बयानबाजी न करने के लिए हिदायत दी है।

आरोपों के घेरे में आये राष्ट्रीय संयोजक 
इस कैडर में बसपा के दौनों राष्ट्रीय संयोजक बहन मायावती को भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश करके उनको खुश करना चाहते थे। परन्तु कांशीराम जी की कैडर बहन मायावती जी    उनकी कोरी बयान बाजी से ख़ुश नहीं हुईं। बल्कि उल्टी कार्रवाई करके उन्होंने कहा कि बसपा उपाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह ने पार्टी की सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय तथा धर्म निरपेक्ष व सर्वधर्म समभाव की सोच के विपरीत जाकर एक राष्ट्रीय नेता के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी की है। जिसे देखते हुए उन्हें तत्काल बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटाया जाता है। 

बसपा ने उनकी टिप्पणी को उनकी निजी सोच की उपज बताते हुए बयान से किनारा कर लिया। उन्होंने कहा कि बीएसपी की हर छोटी-बड़ी मीटिंग व कैडर कैंप एवं जनसभा में केवल पार्टी की विचारधारा, नीतियों व मूवमेंट के बारे में ही बात करें। अन्य नेताओं, धर्म गुरुओं व महापुरुषों के बारे में अभद्र व अशोभनीय भाषा का कतई इस्तेमाल न करें।

बीजेपी की जगह कांग्रेस निशाने पर क्यों
कैडर में गांधी और कांग्रेस को निशाने पर लेने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि अब गांधी की टोपी में वोट नहीं बचा है। वोट अंबेडकर के कोट में भरा पड़ा है। अब अंबेडकर की सरकार बनेगी। वेद, मनुस्मृति, गीता, रामायण सारे के सारे खोखले पड़ गए। एक पलड़े पर सारे ग्रंथ रख दीजिए, दूसरे पर संविधान। अब संविधान ही सब पर भारी है।


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1 Comments

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    Bahan Jee ne Jo Guideline di hai vohi thik hai , Itani Mehanat ke Bad Agar Karykarta Ikatthe hue to Doosare Party ke Logo Par Apanee Enerjee ,kharch karane ki kya Jarurat. Apane Mahapurusho , Unake Sangharsho ,aur party kaise Majboot pratidwandi ka bina sadhan ke kaise Mukabala kar sakati hai, Bat karani chahie.

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