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मेरठ की महारैली में दिखी मायावती की ताकत, बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप, कहा मेरी हत्या के लिए रचा गया था शब्बीरपुर

मेरठ में बसपा की रैली में भारी संख्या में लोग पहुंचे, ये रैली तीन मंडलों मरेठ, सहारनपुर और मुरादाबाद को मिलाकर की गई थी। बसपा प्रमुख मायावती ने मेरठ की रैली में बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगाए,  मायावती ने कहा कि ईवीएम को लेकर हमारे आरोपों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए सहारनपुर में जातीय दंगे कराने की साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने सहारनपुर में मामूली विवाद को जातीय संघर्ष में बदल दिया। और दंगों में मेरी हत्या का षड़यंत्र रचा गया था।  



मायावती ने फिर से आरोप लगाते हुए कहा कि यूपी के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने EVM में गड़बड़ी की और चुनाव जीता, उन्होंने कहा कि EVM के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट भी गए, लेकिन बीजेपी ने इससे ध्यान हटाने के लिए शब्बीरपुर गांव में दलित-राजपूत के बीच दंगे करा दिये. जिसकी वजह से ईवीएम का मामला दब गया। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि उन दंगों में मेरी हत्या का षड़यंत्र रचा गया था, बीजेपी चाहती थी कि मैं वहां पर जाकर भड़काऊ भाषण दूं और और दंगा फैले जिसकी आड़ में मेरी हत्या कर दी जाए। लेकिन मेरी सूझबूझ और संयमित भाषण के कारण ऐसा नहीं हो सका।  



राज्यसभा से अपने इस्तीफे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैं सहारनपुर में दलितों पर हुए अत्याचार के खिलाफ 18 जुलाई को राज्यसभा में आवाज़ उठा रही थी, लेकिन सत्ता पक्ष ने मुझे बोलने नही दिया  है. उन्होंने कहा कि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है, यही वजह है कि मैने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि इस्तीफा देना कोई बड़ी बात नहीं है, बाबा साहब ने भी कानून मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।  



उन्होंने कहा कि बीजेपी ने आरएसएस से जुड़े रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाया है। ये सिर्फ मासूम दलितों को लुभाने के लिए किया गया है। लेकिन दलित अब इन बहकावों में आने वाले नहीं है। महारैली की जिम्मेदारी संभाल रहे बसपा नेता राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव मुनकाद अली, पश्चिम यूपी प्रभारी शम्सुद्दीन राइन, एमएलसी अतर सिंह, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, पूर्व मंत्री हाजी याकूब और उनके बेटे हाजी इमरान दावा कर रहे हैं कि करीब तीन लाख लोग  रैली में पहुंचे लेकिन रैली में पहुंचे लोग  एक लाख से ज्यादा लोगों के पहुंचने का अनुमान बता रहे हैं।  

राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद मायावती की ये पहली रैली थी, मायावती ने मेरठ की महारैली में भीड़ जुटाकर अपने विरोधी दलों को अपनी ताकत का एहसास तो करा ही दिया है। साथ ही उन्होंने उन लोगों के मुंह भी बंद कर दिए हैं, जो ये कह रहे थे कि मायावती का जनाधार खिसक गया है। इसके अलावा उन्होंने इस महारौली से 2019 का बिगुल भी फूंक दिया है। अंत में उन्होंने रैली में आई भीड़ का आभार प्रकट किया और हर महीने की 18 तारीख को देश में अलग-अलग स्थानों पर महारैली का ऐलान भी किया। 

मुख्य संवाददाता
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