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"बहुजन एकता मंच" द्वारा 127वीं अंबेडकर जयंती पर 'बहुजन संदेश' (खंड 2) पुस्तक का लोकार्पण

अनेकों संगठनों के एकीकृत "बहुजन एकता मंच" के द्वारा संसद मार्ग पर डॉ बी आर अंबेडकर की 127वीं जयंती मानाने हेतु 14 अप्रैल 2018 को एक बुक स्टाल लगाया गया। इस अवसर पर शूद्र एकता के मिशन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए  'बहुजन संदेश' (खंड 2) नामक पुस्तक का लोकार्पण  जमायते उलेमाए हिन्द के सदर जनाब अरसद मदनी साहब एवं दिल्ली कैथोलिक चर्च के आर्क बिशप श्री अनिल जे क्वाटो द्वारा दोपहर 12:45 बजे किया गया।

इस अवसर पर श्री के सी पिप्पल, श्री पी आई जोस, श्री एस एस नेहरा, श्री हीरा लाल, श्री सोहन लाल, श्री अच्छे लाल, श्री पी डी बिन्दोरिया, श्री पुरषोत्तम कुमार,  श्री के एल गौतम, डॉ सी बी सिंह, डॉ शिया राम, डॉ शांतुनु दास, डॉ राज कुमार, डॉ आर सी व्यास, श्री विजय सिंह अशोक, श्री राजेंद्र सिंह वर्मा, श्री नरेंद्र पाल सिंह वर्मा, श्रीमती बाटला, श्रीमती कस्तूरी देवी, श्रीमती प्रवेश, श्री राज कुमार गौतम, श्री मति विशाखा बौद्ध, श्री कमल सिंह बौद्ध, श्री महेश राठी, श्री कमलजित सिंह रनोट, जनाब रिजबान रजा, श्री विवेक भूषण फुले, श्री अशोक पासी, श्री राम दयाल, श्री टीका राम, श्री विमल, श्री एस पी सिंह, श्री जय प्रकाश, श्री कमल सिंह, श्री ओमपाल सिंह, श्री स्वामी नाथन, श्री आर एन बाघ, श्री असलम, श्री लाखपत सिंह, श्री दीपक कुमार मीणा, श्री जीतेन्द्र कुमार मीणा, श्री अनुज प्रिय, श्री जीवेश प्रिय, श्री मौनू कुमार, श्री परमेश्वर, श्री विजय कुमार, श्री संजय कुमार, श्री विक्रम सिंह, श्री सुभाष बौद्ध, श्री एम एस सागर, श्री मन मोहन लाल, श्री जसवीर कुमार, श्री कुमर पाल सिंह बौद्ध, श्री मनोज पिप्पल,श्री संभू सिंह,  श्री कविश कुमार, श्री राहुल नागपाल, श्री छोटे लाल, श्री रघु शिवम् श्री रमेश चंद्र, श्री चिरंजी लाल, श्रीमती रोमा नायर, श्री तारा चाँद, श्री जगन लाल प्रेमी, श्री सहेंद्र पाल सिंह, डॉ ओ के यादव, श्री अमर सिंह, श्री राजेंद्र पाल गौतम, श्री संदीप सरासर, श्री मनीष, श्री प्रेम प्रकाश, श्री वी पी सिंह, श्री एस एल व्यास, श्री आर एस गिल, श्री एस सी नूनवाल, श्री आर पी एस गौतम, श्री मुकेश कुमार, श्री केशव राम श्री चमन लाल, श्री स्वामी नाथन, श्री पूरनचंद, श्री वीरेंद्र सिंह और श्री देश राज आनंद के आलावा सैकड़ों लोगों को किताबों का बितरण करके सभी को भंडारे में शामिल किया गया।

मुख्य अतिथियों ने बताया कि बहुजन संदेश ( खण्ड 2 ) पुस्तिका निश्चित रूप से बहुजन समाज के अनेकों घटकों को जोड़ने में वैचारिक मजबूती पदान करेगी।  सभी बहुजन समज के लोगों को यह किताब अबश्य पढ़नी चाहिए। इसकी सहयोग राशि मात्र ₹ 30/- (छपाई की कीमत) रखी गयी है जिसे प्रत्येक व्यक्ति आसानी से लिया जा सकता है। बहुजन एकता मंच के प्रमुख श्री नेहरा ने कहा कि समाज का सहयोग इसी तरह मिलता रहा तो समाजोपयोगी सामग्री आगे भी आसानी से उपलब्ध कराते रहेंगे। आरक्षण नहीं हिस्सेदारी, बहुजन सन्देश लघु पुस्तिका ने तो राजनितिक और सामाजिक परिवर्तन में अप्रत्याशित भूमिका निभाई है यह किसी से छिपा नहीं है।  इसी तरह यह पुस्तक भी सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन में अपनी भूमिका निभायेगी।

इस अवसर पर श्री के सी पिप्पल ने मीडिया को बताया कि "बहुजन एकता मंच कोई संगठन नहीं बल्कि एक वैचारिक एकरूपता का प्रतीक है जिसका लक्ष्य बहुजन समाज के बुजर्गों की विचारधारा को एकीकृत करके, समाज के लोगों तक पहुंचाकर उनको जागरूक बनाने का है।  बिखरी हुई जातियों को इकट्ठा करके मजबूत समाज बनाना है। महात्मा फुले और मान्यवर कांशी राम साहब के कारवां को और आगे बढ़ाना है। बहुजन समाज की राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को भी यह संदेश पहुंचाना है कि वे बहुजन समाज के विकास और उनके उन्नयन के साथ-साथ उनके स्वाभिमान और सम्मान का भी ध्यान रखें। बहुजन समाज इस समय जातियों के साथ साथ राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते आपस में बिखरा हुआ है। बहुजन हिताय बहुजन सुखाय की नीति पर चल कर शूद्र वर्ण की जातियों को एकीकृत किया जा सकता है। आज शूद्र वर्ण की पहचान उनकी हजारों जातियों के रूप में होती है, जबकि उच्च जातियों की पहिचान सवर्ण के रूप में होती है। वह ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के रूप में अपनी पहिचान बताते हैं, जबकि, शूद्र अपनी पहचान जातियों के रूप में बताते हैं। कोई भी शूद्रातिशूद्र जाति अपने को शूद्र बताने को तैयार नहीं होती है।  मनुवादी जातियां अपनी जाति को हमेशा छुपाकर रखते हैं और अपने वर्ग को आगे रखते हैं, यही उनकी मजबूती और सफलता का राज है। बहुजन लोगों की पहचान जिस दिन उनकी जाति की जगह उनके वर्ण या बहुजन वर्ग से होने लगेगी उस दिन यह लोग इस देश के शासक बन सकते हैं।

1893 में स्वामी विवेकानंद ने ब्राह्मण वर्ण की श्रेष्ठता को ललकारते हुए बोला था "हे ब्राह्मणों सचेत हो जाओ और शूद्रों पर अत्याचार करना बंद कर दो, वरना जिस दिन यह इकट्ठे हो गए उस दिन तुम्हें अपनी एक फूंक से उड़ा देंगे"। 

ब्राह्मणवाद बनाये रखने के लिए ब्राह्मण सचेत हो गए वह समरसता के नाम पर शूद्रों के यहां रोटी खाकर सत्ताधारी बन गए। परन्तु शुद्रातिशूद्र विवेकानंद की बात को नहीं समझ पाए इसलिए आज भिखारी बन गए।हे शूद्र समाज के भाइयो आप जातियों के झूठे दम्भ से बाहर निकल कर कम से कम शूद्र नहीं तो बहुजन वर्ण बना कर संगठित हो जाओ। यदि ऐसा कर लिया तो हमारे पूर्वजों की लड़ाई साकार हो जाएगी और आप की आगे आने वाली पीढ़ियां शासनकर्ता जमात बन जाएंगीं।


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