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बीजेपी नेता गाय माता का सीरियल किलर, अनुदान के नाम पर डकारे करोड़ों रुपए

लोग जयपुर की हिंगौनिया गौशाला का मामला अभी भूले तक नहीं थे कि छत्तीसगढ़ में 200 गायों की मौत का मामला सामने आ गया, राजस्थान में भी बीजेपी की सरकार थी और छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी का राज है और दोंनों ही राज्यों में गाय माता के साथ ऐसा खिलवाड़ और क्रुरता बीजेपी के लिए शर्म का विषय होनी चाहिए। और ऊपर से इनका हत्यारा निकला बीजेपी नेता हरीश वर्मा है। हरीश वर्मा को जब गिरफ्तार किया गया तो गुस्साए लोगों ने उसके मुहं पर कालिख पोत दी। और पीटने की भी कोशिश की लेकिन पुलिस ने बीच बचाव करके बचाया। 
जामूल नगरपालिका में उपाध्यक्ष हरीश वर्मा पर आरोप है कि उसकी गौशाला में 200 गाय भूख के कारण मर गईं। आरोपी नेता हरीश वर्मा पर छत्तीसगढ़ पशु संरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4 और 6 के तहत, पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की धारा 11 और आईपीसी की धारा 409 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। गायों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि ज्यादातर गायें भूख की वजह से मरी हैं, उनके पेट में अन्न का एक दाना भी नहीं मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन कभी खेत में तो कभी मैदान में गायं मरी हुई पड़ी रहती थी, जिन्हें आवारा कुत्ते नौंच-नौंच कर खाते थे। और चारों तरफ बदबू फैल गई थी। बाद में जब ये बात फैलने लगी तो उसने मरी गायों को भट्टे में दबवा दिया। लेकिन गौशाला के पास जब लोगों ने जेसीबी मशीने देखीं तो उन्हें इसकी भनक लग गई, और जिस गौशाला में लोगों को जाने की अनुमति नहीं थी वे जबरन घुस गए, और वहां बहुत सारी मरी गायों को देखा, जिसकी जानकारी पुलिस प्रशासन को दी गई। इसके बाद जब वहां जांच हुई तो नेता का खौफनाक चेहरा सामने आया। गायों को ट्रॉली में भर कर दफनाने के लिए ले जाया जा रहा था।  वहां मौजूद लोगों के अनुसार गायों को गड्ढों में दफन कर दिया गया था। यही नहीं लोगों की माने तो एक ही गड्ढे में 10-15 गायों को दफन किया गया था। हरीश तीन तीन गौशालाएं चलाता है तीनों ही गौशालाओं में गायों की दयनीय स्थिति और बेमौत मारे जाने को लेकर लोग भड़के हुए हैं। पुलिस के अनुसार अनुदान के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपये ले चुका है। 
ना सिर्फ राज्य सरकार बल्कि केंद्र सरकार के लिए भी ये शर्म की बात होनी चाहिए कि जिस गाय माता के लिए इंसानों की जान लेने का माहौल बना हुआ है, खुद उसके ही  नेता अपनी गाय माता के इतने क्रुर बने हुए हैं, मतलब साफ है कि उनके लिए गाय माता या गाय सेवा का मतलब सिर्फ अनुदान का पैसा लूटना या राजनीति करना भर है।  

मुख्य संवाददाता
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