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पत्रकार से प्रधानमंत्री तक का अटल सफर

पूर्व प्रधानमंत्री व बीजेपी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी जी का जाना एक युग का अंत हो जाना है, वे जनता के पसंदीदा नेताओं में शुमार थे, उनकी भाषाशैली और भाषण की कला सबको मोह लेती थी। आइए एक नज़र डालते हैं उनके जीवन सफर पर....

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित शिंदे की छावनी में हुआ था। अटल के पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी और मां का नाम कृष्णा वाजपेयी था। उनके पिता ग्वालियर में अध्यापक थे। अटल बिहारी वाजपेयी की प्रारंभिक पढ़ाई ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज से हुई। बता दें कि विक्टोरिया कॉलेज को अब लक्ष्मीबाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है। अटल ने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया और पत्रकारिता से शुरुआत की। उन्होंने पाञ्चजन्य, राष्ट्र धर्म, और वीर अर्जुन का सफल संपादन किया।

अटल बिहारी वाजपेयी को 1977 में जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया था। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन के वक्त अटल ने हिंदी में अपना भाषण दिया। ओजस्वी भाषणों के लिए चर्चित अटल बिहारी वाजपेयी ने 1980 में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की, इसके बाद वह 1980 में बीजेपी के संस्थापक सदस्य भी रहे। अटल 1980 से 1986 तक भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के साथ-साथ संसदीय दल के नेता भी रहे। वह इकलौते ऐसे नेता हैं, जिन्होंने चार अलग-अलग राज्यों (उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली) से चुनाव में जीत हासिल की। 
वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। 1996 में केंद्र की सत्ता में भाजपा की ताजपोशी वाजपेयी की कमान में ही हुयी थी। हालांकि यह सत्ता मात्र 13 दिन (16 मई 1996 से 01 जून 1996 तक) की थी। वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व के बल पर ही भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन की सरकार 1998 में फिर सत्ता में लौटी और इस बार 13 महीने (19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999) में ही गिर गई। अक्टूबर 1999 में बनी भाजपा की अगली सरकार ने उनके नेतृत्व में अपना कार्यकाल (13 अक्टुबर 1999 से 22 मई 2004) पूरा किया।

कुशल राजनीतिज्ञ होने के अलावा वह हिंदी के प्रखर कवि, वक्ता और पत्रकार भी रहे है, वह 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष रहे थे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित प्रचारक रहे वाजपेयी आजीवन अविवाहित रहे। वाजपेयी ने यह जानते हुए पोखरण में परमाणु परीक्षण का फैसला किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इसकी प्रतिकूल प्रतिक्रिया होगी, भारत को ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए मानो उनकी यह सोच उन्हें अपने फैसले पर अटल रखे हुए थी। अटल जी दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित हो चुके थे। उन्हें 1994 में भारत का सर्वश्रेष्ठ सासंद पुरस्कार और भारत रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 


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