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UPDATE- अनीता के घरवालों ने मुआवज़े का 7 लाख रुपए का चेक लेने से किया इंकार

तमिलनाडु- दलित छात्रा अनीता के खुदकुशी करने के बाद राज्य सरकार ने उसके परिवार वालों को आर्थिक सहायता के रुप सात लाख रुपए का चेक भिजवाया जिसे परिवार वालों ने लेने से मना कर दिया। शहर की कलेक्टर लक्ष्मी प्रिया अनीता के घरवालों को चेक देने गई, लेकिन अनीता के परिवार ने यह चेक वापस लौटा दिया।

गौरतलब है कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया था, कि तमिलनाडु में मेडिकल सीट हासिल करने के लिए 12 वी के अंक नहीं बल्कि NEET के आधार पर होगी। इसके बाद दलित छात्रा अनीता को NEET में 86 अंक ही मिले और उसे मेडिकल सीट नहीं मिल सकी, जिससे आहत होकर उसने आत्महत्या कर ली थी।

अनीता बेहद गरीब परिवार से थी, उसके पिताजी मजदूरी का काम करते हैं।  अनीता ने 12 वी बोर्ड की परीक्षा में 1200 में से 1176 अंक हासिल  किए थे।  और मेडिकल कॉलेज में दाखिले का इंतज़ार कर रही थी। चूँकि अनीता स्टेट बोर्ड से पढ़ी थी और कोचिंग ना मिलने से NEET में अच्छे अंक नहीं ला पायी। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया कि तमिलनाडु में मेडिकल सीट के लिए 12 वीं के अंक मान्य नहीं होंगे।

अदालत के इस फैसले के बाद तमिलनाडु में उन लाखों बच्चों के सपने टूट गए हैं, जो मेडिकल कॉलेज में दाखिले का इंतज़ार कर रहे थे। इससे दुखी होकर अनीता ने अपनी जान दे दी। इसके बाद विपक्षी पार्टियों और जनता ने सरकार को इसका जिम्मेदार बताया।  

मुख्य संवाददाता
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