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गोरखपुर-फूलपुर के चुनावी नतीजों के बाद यूपी में बदली सियासी फिजा, लखनऊ में अखिलेश यादव ने मायावती के घर जाकर दी जीत की बधाई

लखनऊ : गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में एसपी को मिली जीत से पार्टी को एक बार फिर सियासी संजीवनी मिल गई है। और जीत का असर ये हुआ कि एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में बीएसपी अध्यक्ष मायावती के आवास पर पहुंचकर उन्हें फूलों का गुलदस्ता दिया और जीत की बधाई दी। ये पहला मौका है जब अखिलेश यादव ने अपने राजनीतिक करियर में मायावती से उनके घर पर जाकर मुलाकात की है।  



बुधवार को गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद शाम-शाम होते प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी सियासी फिजा ही बदल गई। दोनों सीटों पर एसपी की जीत से लबरेज पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले तो पार्टी कार्यालय में पहुंच कर मीडिया को संबोधित किया और फिर एसपी के राज्यसभा सांसद संजय सेठ के साथ शाम 7 बज कर 45 मिनट पर मायावती के मॉल एवेन्यू आवास पर पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने मायावती को बुआ जी कह कर प्रणाम किया और उन्हें उपचुनाव में एसपी प्रत्याशियों को समर्थन देने के लिए आभार जताते हुए जीत की बधाई दी। अखिलेश यादव और मायावती की ये मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई ये तो पता नहीं चल सका, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों के बीच 23 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव और 2019 के आम चुनावों में बीजेपी को मात देने के लिए गठबंधन पर मंथन हुआ है। मायावती से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने उनके आवास से बाहर निकलते हुए मीडिया का अभिवादन तो जरूर किया, लेकिन बिना कुछ बोले ही वहां से रवाना हो गए। अखिलेश यादव और मायावती की मुलाकात के दौरान हुई बातचीत भले ही सार्वजनिक नहीं हुई हो, लेकिन इस मुलाकात ने यूपी के साथ-साथ देश की सियासत में नए समीकरण बनने और बनाने के संकेत जरूर दे दिए हैं।
 


यूपी में बीएसपी-एसपी गठबंधन के इतिहास पर एक नज़र...

आपको बता दें कि यूपी की सियासत में बीएसपी और एसपी पहली बार साथ-साथ नहीं हुए हैं, बल्कि 23 साल पहले सन 1993 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीएसपी और एसपी के बीच चुनावी गठबंधन हुआ था। उस वक्त बीएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कांशीराम और एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने इस गठबंधन का नेतृत्व किया था और यूपी में मुलायम सिंह के नेतृत्व में बीएसपी-एसपी गठबंधन की सरकार भी बनी थी। लेकिन कांशीराम और मुलायमत सिंह यादव की ये दोस्‍ती बहुत दूर तक नहीं चल सकी और 1995 में मई के महीने में बीएसपी ने एसपी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया था, जिसकी वजह से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई। उसके बाद यूपी की राजधानी लखनऊ में एसपी ने विधायकों ने गेस्ट हाउस में खूब हंगामा किया था और मायावती के साथ अभद्रता भी की गई थी, उस घटना को ‘गेस्टहाउस कांड’ के रूप में भी जाना जाता है। गेस्टहाउस कांड की घटना के बाद से ही बीएसपी और एसपी दोनों एक-दूसरे की धुर विरोधी हो गई थी। समय ने फिर से करवट ली है, जो इन दोनों के दलों के नेताओं को आपसी मनमुटाव और सियासी दुश्मनी भुलाकर फिर से एक साथ आने को मजबूर कर दिया है। हालांकि इस बार की दोस्तों के किरदार बदले हुए हैं। बीएसपी का नेतृत्व मायावती और एसपी का नेतृत्व अखिलेश यादव के हाथ में हैं।

मुख्य संवाददाता
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