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एक दुआ देश के लिए....

तस्वीर में दिख रहे इन शख्स का मुझे नाम तक नहीं मालूम, लेकिन चांदनी चौक के भयानक जाम में भी ये सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। मै पिछले आधे घंटे से चांदनी चौक के जाम में फंसा था, अचानक नज़र पड़ी कि एक रिक्शा मेरे आगे चल रहा था जिसके पीछे एक सफेद चार्ट पर कुछ लिखा हुआ था जो लोगों को रुककर या रिक्शे के पीछे चलकर पढ़ने के लिए मज़बूर कर रहा था।  एक पेपर ये अपने  मुंह में दबाए हुए थे उस पर भी कुछ लिखा हुआ था। मैने इशारा करके इन्हें रोका और काफी कोशिश की इनका नाम जानने की और इनसे बात करने की लेकिन ये नहीं बोले। और लगातार इशारा करते रहे अपने रिक्शे के पीछे लगे चार्ट को पढ़ने के लिए। इन्होंने 26 जनवरी तक के लिए मौन व्रत लिया है और देश के लिए दिल मे दुआ मांगते हुए रिक्शा चला रहे हैं।


जो लिखा था वो इस प्रकार है- 
" एक दुआ देश के लिए 19-1-2018 से 26-1-2018 तक, मौन रहकर दिल से देश के लिए दुआ कर रहा हूं, या अल्लाह हमारे देश पर कोई अज़ाब न आए। देश के लिए शांति और खुशहाली के लिए सभी देशवासियों से गुज़ारिश है कि सब एक साथ मिलकर दिल से 26 जनवरी को दुआ करें।"  दिन ज़ुमा- 26-1-2018.... दिल्ली हमारा दिल।


मैं कुछ देर इन महाश्य के साथ रहा लेकिन कुछ बात नहीं हो सकी, नही पता चल सका कि ये पढ़े लिखे हैं या या नहीं, अगर पढ़े लिखे हैं तो मदरसे से पढ़े हैं या स्कूल में, अगर मदरसे से पढ़े हैं तो ऐसा नहीं लगता कि इन्होंने देश के खिलाफ आतंकवाद का पाठ पढ़ा है, और अगर अनपढ़ हैं तो उन पढ़े लिखों से अच्छे हैं जो हिंदू-मुस्लिम की कट्टरता में धंसे हुए हैं। 

अगर ये सबक हैं तो ऐसे लोगों के मूंह पर एक तमाचा भी है जो देश को कट्टरता की आग में झोंकने पर तुले हैं और एक विशेष समुदाय के लोगों को आतंकी से कमतर नहीं आंकते।


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