img

तृतीय सम्यक बौद्ध सम्मेलन में दिखी बौद्ध समाज की एकजुटता

रविवार को दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में यूथ फॉर बुद्धिस्ट इंडिया द्वारा तृतीय सम्यक बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के कोने कोने से ही नहीं विदेशों से भी लोगों ने शिरकत की। कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जितने लोग स्टेडियम के अंदर बैठे थे उतने ही लोग खड़े थे और सीढ़ियों पर बैठे थे। जिन लोगों को स्टेडियम के अंदर खड़े होने के लिए भी जगह नहीं मिल पाई वे बाहर लगी स्क्रीन्स पर कार्यक्रम देख रहे थे।


इस मौके पर यूथ फॉर बुद्धिस्ट इंडिया के संरक्षक बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध ने युवाओं से आह्वान किया कि वो आगे आएं और जनजागरण करें। उन्होंने कहा कि समाज को मजबूत बनाने और सही दिशा देने के लिए युवाओं को बीड़ा उठाना होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य (theme) भी युवाओं को समाज निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए युवाओं को समर्पित किया गया था। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा को बौद्धमय भारत के निर्माण के लिए इस्तेमाल करने की जरूरत है और जिस दिन हमारा युवा जागा जाएगा, हमारे समाज को आसमान की ऊंचाई छूने से कोई नहीं रोक पाएगा।


कार्यक्रम की शुरूआत में समाज के बुद्धिजीवी वर्ग ने अपने मुल्यवान विचार सबके सामने रखे और लोगों का ज्ञानवर्धन  किया। दिल्ली युनिवर्सिटी में प्रोफेसर राजकुमार, मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता बेजवाड़ा विल्सन, प्रो. कौशल पंवार, सुरेश राव, प्रो. विवेक कुमार, संजय बौद्ध, एड. स्मिता काम्ब्ले, विदूषी विशाखा, सुरेश राव एडवोकेट, एपी सिंह जाटव, एड. सूरजपाल 'राक्षस', बी.पी.अशोक ने अपने विचार रखे और युवाओं से अपील की कि वे अपने इतिहास से मुंह ना मोड़े। बाबा साहब को ज्यादा से ज्यादा पढ़े, उन्हें जाने, बहुजन महापुरूषों के बारे में जानें जिन्होंने समाज को बदला, उन्होंनेे कहा कि जिस समाज का युवा जागृत हो जाता है उस समाज को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। हमें भूलना नहीं चाहिए कि हमारी रगों में ज्योतिबा फूले और बाबा साहब जैसे वंशजों का खून दौड़ रहा है, ये हमारे लिए गर्व की बात है।


इसके बाद रंगारंग कार्यक्रम ‘गीतों भरी शाम बाबा साहब के नाम’ का आगाज़ हुआ। जिसकी शुरूआत मशहूर नृत्यांगना ज्योत्सना ने भरतननाट्यम के साथ की। इसके बाद अन्य युवा कलाकारों जिनमें हेमंत कुमार बौद्ध, तरन्नुम बौद्ध, विपिन कुमार भारतीय, अमित कुण्डारा,हर्ष भारती, मोनिका सिद्धार्थ, मंजीत सिंह अवतार, शशि प्रताप बौद्ध, सतविंदर आज़ाद, राजू भारतीय, प्राची तायडे, संजु आर जे और सुरों की मल्लिका बुद्धमित्रा ने ऐसा समां बांधा कि लोग झूम उठे। और इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान स्टे़डियम में बैठे लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
  
कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक चला। ज्यादातर लोग अपने-अपने परिवारों के साथ आए हुए थे, जिनमें बच्चे और बुजूर्ग भी शामिल थे...युवाओं और बच्चों की भरमार देखकर कार्यक्रम की सार्थकता सिद्ध होती नज़र आ रही थी। और पता चल रहा था कि आयोजकों ने जिस उद्देश्य के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया है वो पूरा हो रहा है। लोग बौद्ध संस्कृति को जान रहे हैं, बहुजन नायकों को पहचान रहे हैं, शामिल हुए परिवारों का एक दूसरे से उल्लास और गर्मजोशी से मिलना बता रहा था कि इस तरह के आयोजन किस तरह से लोगों में अपने समाज और एक दूसरे के प्रति ऊर्जा भरने का काम कर सकते हैं।  और समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों की कितनी जरूरत है।  


' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े