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स्वच्छ हवा के बिना स्वच्छ भारत मुमकिन नहीं

स्वच्छ भारत में शौचलयों का निर्माण कर ओडीएफ होने जा रहे नए भारत को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा की जरूरत है। क्यों कि जिंदा ही नहीं रहे तो टॉयलेट कौन जाएगा? त्योहारों पर जलने वाले पटाखों, धुआं उगलती गाड़ियों, कोयला आधारित बिजली परियोजनाओं और खेतों से निकलने वाले जहरीले धुएं ने भारत को जहरीली हवा के टाइम बम पर बिठा दिया है। दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 भारत के हैं। इनमें से भी टॉप 10 में 7 भारतीय शहर हैं।

यूपी नंबर वन हैं:
डब्लूएचओ की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा शहर कानपुर पहले स्थान पर है. इसके बाद फरीदाबाद, वाराणसी, गया, पटना, दिल्ली, लखनऊ, आगरा, मुजफ्फरपुर, श्रीनगर, गुड़गांव, जयपुर, पटियाला और जोधपुर हैं।

खतरे की घंटी:
संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत की राजधानी दिल्ली दुनिया के प्रदूषण की भी राजधानी बन गई है। वैश्विक वायु प्रदूषण 2018 की रिपोर्ट में नयी दिल्ली को विश्व के 62 प्रदूषित शहरों में पहले स्थान पर रखा गया है। यहां कि वायु गुणवत्ता को पीएम 2.5 के संदर्भ में मापा गया है। यह स्तर स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खराब है। 

हथेली पर जान:
एशिया में वायु प्रदूषण के होने वाली अकाल मौतों के मामले में भारत शीर्ष पांच देशों में शामिल है। सबसे अधिक मौतें (43 % ) फेफड़ों की बीमारियों से से होती हैं। भारत में करीब 66 करोड़ लोग प्रदूषण के नैश्नल ऐवरेज लिमिट से कहीं ज्यादा के बीच रहने को मजबूर हैं।

पार्यावरण पर गंभीर असर:
पहले वैश्विक सम्मेलन  में पेश विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार भारत  में बढ़ता वायु प्रदूषण मानसून के दौरान होने वाली बारिश  को बेहद कम कर सकता है। जिससे देश के बड़े हिस्से में भयंकर सूखे का संकट खड़ा हो सकता है। 

आर्थिक मोर्चे पर भारी तबाही:
भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली कृषि का भारतीय जीडीपी का करीब 17% हिस्सा है। भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 53% हिस्सा कृषि कार्यों में लगा हुआ है। भारत की कृषि मानसून आधारित है। बढ़ते वायु प्रदूषण का असर अर्थव्यवस्था को कमजोर करेगा। यही नहीं भारत वायु प्रदूषण की वजह से हर साल लेबर फोर्स के गिरते स्वास्थ्य की कीमत हजारों करोड़ के नुकान से चुका रहा है। ग्रीन पीस संस्था के मुताबिक ''दुनिया में इसके चलते ग्लोबली 225 बिलियन डॉलर का नुकसान लेबर और स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर हो चुका है"

सरकार ने कदम उठाए, जनता की भागिदारी कम:
भारत में घरेलू कारणों की वायु प्रदूषण में हिस्सेदारी 22-52 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री मोदी की उज्जवला योजना जिसमें ग्रामीण इलाकों में रसोई गैस सिलेंडर बांटे गए इसे रोकने में एक सार्थक प्रयास है। पयार्वरण और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डेविड आर. बॉयड ने खुद भारत में चल रहे प्रयासों की तारीफ की है। लेकिन ये नाकाफी ही साबित हुएं हैं।

सात कदम स्वच्छ हवा के लिए:
बोयड ने सात अहम कदमों की पहचान कर इन्हें स्वच्छ हवा के लिए सभी देशों के लिए जरूरी बताया है। इनमें हवा की गुणवत्ता एवं इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की निगरानी, वायु प्रदूषण की मुख्य वजहों का आकलन और जन स्वास्थ्य परामर्शों समेत अन्य सूचनाओं को जनता के बीच पहुंचाना शामिल है।


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