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गोरखपुर बीआरडी मामले में बड़ी कार्रवाई, निलंबित प्रिंसिपल और उसकी पत्नी कानपुर से गिरफ़्तार, योगी सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में पेश की जांच रिपोर्ट

गोरखपुर बीआरडी मामला

कानपुर, 29 अगस्त, गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में करीब 37 बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है । इस मामले में फरार चल रहे दंपति निलंबित प्रिंसिपल डॉ. आर के मिश्रा और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को गिरफ़्तार कर लिया गया है । यूपी एसटीएफ टीम ने डॉक्टर दंपति को कानपुर के साकेत इलाक़े से पकड़ा है । 
बताया जा रहा है कि दोनों कानपुर के एक नामी वकील के घर छिपे हुए थे । इससे पहले दोनों आरोपियों को पकड़ने कि लिए पुलिस ने गोरखपुर में इनके घरों पर कई बार जगह दबिश दी थी, लेकिन घर पर ताला लगा हुआ था । इस मामले में मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्टाफ से जुड़े 9 लोगों को दोषी पाया गया था, जिनके खिलाफ केस भी दर्ज कराया गया था, लेकिन तभी से आरोपी निलंबित प्रिंसिपल डॉ. आर के मिश्रा और उसकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला फरार चल रही थी । इस मामले से जुड़े एक और आरोपी डॉ. कफील खान समेत अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं, 28 अगस्त को भी डॉ. कफील के घर पर छापेमारी हुई थी, लेकिन वो नहीं मिला, उनके पड़ोसी भी कुछ बताने को तैयार नहीं हैं, हालांकि पुलिस ने उनके घर लगे सीसीटीव फुटेज को कब्ज़े ले लिया है और जांच पड़ताल शुरू कर दी है । इसके अलावा ये भी बताया जा रहा है कि कैंट क्षेत्र के सीओ ने उनके क्लीनिक पर जाकर उनकी पत्नी से लंबी पूछताछ की है । आपको बता दें कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आईसीयू और इंसेफलाइटिस वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हुई थी, जिसके बाद करीब 37 बच्चों की जान चली गई थी । इस ख़बर हड़ंकप मच गया था और यूपी की योगी सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े गए थे ।   
 


गोरखपुर बीआरडी मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जांच रिपोर्ट पेश

लखनऊ में 29 अगस्त को योगी सरकार ने गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई 37 बच्चों की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जांच रिपोर्ट पेश कर दी । मामले से संबंधित दाखिल एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई, जिसमें योगी सरकार ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया ।
कोर्ट आदेशानुसार घटना की जांच रिपोर्ट और सरकार की तरफ से कई गई अब तक की कार्रवाई का ब्यौरा भी पेश किया गया । ये आदेश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति डी एस त्रिपाठी की खंडपीठ ने दिलीप कुमार वर्मा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया था ।  इस याचिका में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए हादसे के साथ ही लखनऊ के केजीएमयू में आग लगने और अन्य सरकारी अस्पतालों में हुए इस प्रकार के हादसों का मामला उठाया गया था । साथ ही इनकी सीबीआई जांच और न्यायिक जांच कराए जाने की मांग भी की गई थी । याचिका में अस्पतालों में व्याप्त कमीशनखोरी और उपकरणों की खरीद में गड़बड़ी का मामला भी उठाया गया है । याचिका कर्ता के अधिवक्ता डॉ. वी के सिंह ने बताया कि जवाबी हलफनामे में केजीएमयू समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में हुए हादसे और याचिका में उठाए गए अन्य विषयों पर जवाब नहीं दिया गया है । इस मामले में अगली सुनवाई 4 अक्टूबर 2017 को होगी ।

ओम प्रकाश
ओम प्रकाश
ब्यूरो चीफ
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