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एससी/एसटी एक्ट में बदलाव का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देने से किया इनकार, अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी

अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार अधिनियम यानी एससी/एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट फिलहाल अपने पुराने फैसले पर कायम है। केंद्र सरकार की तरफ से दायर पुनर्विचार याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक के फैसले पर स्टे से इनकार कर दिया है।



अटॉर्नी जनरल की जिरह के बाद जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और यूयू ललित की पीठ ने कहा कि हम एससी-एसटी एक्ट और अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के खिलाफ नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि निर्दोषों को सजा नहीं मिले। पीठ के दोनों जजों ने ये भी कहा एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज करने के लिए प्रारंभिक जांच जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि पीड़ित को एफआईआर से पहले भी मुआवजे का भुगतान किया सकता है। कोर्ट का मानना है कि इस कानून में आरोपों को वैरीफाई करना मुश्किल है, इसलिए इस तरह की गाइडलाइन जारी की गई है, जबकि अन्य अपराध में आरोपों को वैरीफाई किया जा सकता है। पीठ ने इस मामले में 2 दिनों के भीतर सभी पक्षों से जवाब मांगा है। केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर 10 दिन बाद खुली कोर्ट में विस्तार से सुनवाई करने का निर्णय लिया है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने देश में तनाव के हालात को देखते हुए सोमवार को पुनर्विचार याचिका दायर की थी।  केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि इस कानून के प्रावधान में किसी गाइडलाइन की जरूरत नहीं है।  

आपको ये भी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को एससी-एसटी एक्ट के एक मामले में सुनवाई करते हुए तुरंत गिरफ़्तार करने पर रोक लगाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर अनुसूचित जाति-जनजाति और आदिवासी समाज के लोगों में गहरी नाराजगी थी, जिसके विरोध में दलितों के सामाजिक संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया था, जिसका पूरे देश में व्यापक असर भी हुआ, लेकिन भारत बंद के दौरान देश के करीब 15 राज्यों में हिंसा हुई थी, जिसमें 14 लोगों की मौत हुई थी।

मुख्य संवाददाता
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