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मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के बाद भी नहीं मिला न्याय, गैंगरेप पीड़िता ने आरोपियों से तंग आकर की खुदकुशी

उत्तरप्रदेश में कानून व्यवस्था दिनों दिन बिगड़ती जा रही है, गरीब, वंचित लोगों पर दबंगों के जुल्म बढ़ते जा रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री योगी और पुलिस प्रशासन लगातार फेल होते दिख रहे हैं, बल्कि ज्यादातर मामलों में तो पुलिस ही कटघरे में खड़ी पाई जाती है। ताजा मामले से तो ये भी साबित हो गया है कि मुख्यमंत्री तक की कोई सुनने वाला नहीं है, अंधेर नगरी चौपट राजा हो गया है। उत्तर प्रदेश, अपराध प्रदेश बन गया है। गैंगरेप पीड़िता मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाने लखनऊ तक जाती है, लेकिन फिर भी उसे न्याय नहीं मिलता और उसे दबंग आरोपियों द्वारा इतना सताया जाता है कि उसे खुदकुशी करनी पड़ती है।  

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के किरठल गांव में तीन महीने पहले दबंगों ने एक आठवीं कक्षा की छात्रा को अगवा कर लिया। और 5 दिन तक उसके साथ गैंगरेप किया। लेकिन रमाला पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और अपराधियों को ही बचाने में लग गई, और जांच के बाद आरोपियों को क्लीनचिट तक दे दी। जिससे आरोपियों की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि 3 महीने बाद आरोपी फिर से सरे बाजार लड़की को रेप की धमकी देने लगे, जिससे परेशान होकर पीड़िता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 

दरअसल शुक्रवार की शाम को पीड़िता दीपावली का सामान खरीदने बाज़ार गई थी। उसी दौरान गैंगरेप के 3 आरोपी उसे वहां मिल गए और उसे रोककर छेड़छाड़ करने लगे। और उसे धमकी दी कि पहले तो सिर्फ 5 दिन के लिए उठाया था, इस बार लंबा उठाएंगे। जिसके बाद डरी सहमी लड़की ने घर आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सीओ रमाला और थानाध्यक्ष मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया गया। हालांकि पुलिस अभी भी मामले को प्रेम-प्रंसग साबित करने की कोशिश में लगी हुई है, लेकिन छात्रा के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप किया गया था और पुलिस ने आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी। 

पेशे से मजदूर लड़की के पिता ने जानकारी दी कि 28 जून 2017 को स्कूल से लौटते वक्त उसकी बेटी को गांव के ही 5 लड़कों ने अगवा कर लिया था। जिनमें से 3 जाट बिरादरी के थे। आरोप है कि 5 दिन तक छात्रा के साथ गैंगरेप करने के बाद 4 जुलाई को उसे गांव के रास्ते मे फेंक दिया गया था। 

6 जुलाई को पांचों युवकों के खिलाफ़ गैंगरेप की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। और 6 जुलाई को ही मेडिकल में गैंगरेप की पुष्टि भी हुई थी। रमाला के तत्कालीन एसओ नवीन चिकारा पर आरोप है कि क्योंकि आरोपी उनकी अपनी ही जाति के थे, इसलिए उन्होंने पूरा केस ही पलट दिया। और पीड़िता को केस वापस लेने के लिए धमकाने लगे। और उनको ही केस में फंसाने की धमकी देने लगे। जब ऐसा नहीं हो सका तो उन्होंने पूरे केस को झूठा बताकर फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगी दी। जबकि मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि हो चुकी थी।

पुलिस से न्याय ना मिलता देख पीड़ित बच्ची और उसके पिता न्याय की आस में मुख्यमंत्री योगी के पास लखनऊ गए, जनता दरबार में उन्हें गैंगरेप की जानकारी दी और पुलिस के कार्रवाई नहीं करने की शिकायत भी की। पीड़िता ने मुख्यमंत्री को बताया कि पांचों आरोपियों को बचाया जा रहा हैं, पुलिस कोई सुनवाई नहीं कर रही है। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्कालीन एसपी अनिल राय को मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे। उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

डीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने कहा कि इस मामले में दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं। गैंगरेप में मेडिकल रिपोर्ट के बाद एफआर लगाने वाले और लापरवाही बरतने पर अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। केस की फिर से पड़ताल होगी और दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा।  

मुख्य संवाददाता
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