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क्या दद्दू प्रसाद को बसपा में फिर से शामिल किया जायेगा?

दद्दू प्रसाद ने उत्तर प्रदेश में सपा बसपा के गठबंधन करने का बसपा सुप्रीमो मायावती पर विभिन्न मीटिंगो के माध्यम से दवाव बनाया, तो उन्हें पार्टी से हटा दिया गया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने ही पार्टी के पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर दद्दू प्रसाद को पार्टी से बाहर निकाल कर अपनी बात दबाव पूर्वक मनवाने का आरोप लगाया था।

हालांकि, दद्दू प्रसाद किसी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं थे। गठबंधन की बात बिलकुल सही साबित हुई। इसके बाद सपा बसपा ने उत्तर प्रदेश के उप चुनावों में तीन लोकसभा और एक विधानसभा की सीटें जीती।   उपरोक्त कारणों से भले ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने दद्दू प्रसाद को पार्टी से निकाल दिया है परन्तु बहुजन समाज के अधिसंख्य लोग उन्हें कांशीराम का सच्चा सिपाही मानते हैं। जिन लोगों ने एसे व्यक्ति को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का सुझाव दिया है वह कोई पार्टी हितैषी हो ही नहीं सकता। आज बुंदेलखंड खण्ड में पार्टी का कोई मज़बूत नेता नहीं बचा है।  बता दे कि इससे पहले भी साल 2015 में उन्हें पार्टी से निकाला गया था। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्हें पार्टी ने फिर से शामिल कर लिया था।

आपको बता दे कि, दद्दू प्रसाद कांशीराम के समय से बसपा पार्टी में जुड़े रहे हैं। वे कांशीराम से इतना अधिक प्रभावित रहे हैं कि उन्हें लोग कांशीरामवादी कहते हैं।

पूरे बुंदेलखंड में दद्दू प्रसाद बसपा के कद्दावर नेताओं में से एक गिने जाते थे। वे बुंदेलखंड क्षेत्र में बांदा जिला के रहने वाले हैं। बीते 10 जनवरी 2018 को बसपा के बांदा जिलाध्यक्ष ने एक प्रेस नोट के जरिए दद्दू प्रसाद को बसपा से निष्काषित करने की सूचना प्रेस नोट के द्वारा पार्टी के पदाधिकारियों को दी थी। दद्दू प्रसाद जी पर आरोप लगाया गया था कि वो अपने को पार्टी का बड़ा नेता बताकर पदाधिकारियों को गुमराह करने का कार्य कर रहे हैं।

निष्कासन के बाद दद्दू प्रसाद ने कहा कि, वो बसपा को बचाने के लिए पुनः पार्टी में शामिल हुये थे। बसपा मेरे खून पसीने और मेहनत से बनी है, मैं सामाजिक परिवर्तन और बहुजन मिशन के लिए कार्य करता रहूंगा।

दिनांक 29 जुलाई 2018 (रविवार) को दारुल शफा के कॉमन हॉल में दद्दू प्रसाद जी के नेतृत्व में सामाजिक परिवर्तन मंच के बैनर पर सफल संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। संगोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व आईईएस के सी पिप्पल ने की, बसपा के पूर्व सांसद इलियास आज़मी मुख्य अतिथि थे। मुख्य वक्ताओं में पूर्व आईएएस हीरा लाल, वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमडिया, गंगा राम अम्बेडकर, भंते डा के के राहुल, पुस्तक प्रकाशक एवं लेखक अनन्त राम अकेला प्रमुख थे।     

इस अवसर पर विचार गोष्ठी के विषय पर बोलते हुए के सी पिप्पल ने कहा कि स्कूली शिक्षा का राष्ट्रीयकरण ही समग्र विकास की कुंजी है। इसके बाद सरकार ही यूनिफॉर्म और निशुल्क शिक्षा लागू कर सकती है। यह आवाज जनवरी 2014 से राष्ट्रीय समग्र विकास संघ उठा रहा है।    

इसी के साथ संगोष्ठी में बहुजन नायक मा कांशीराम जी के ऐतिहासिक भाषण नामक पुस्तक के छटवे खण्ड का विमोचन किया गया। इस मौके पर पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद ने कहा कि दोहरी शिक्षा प्रणाली देश की राष्ट्रीय एकता के लिए घातक है। अमीर का बेटा अलग पढ़ता है और गरीब का बेटा अलग प्राइमरी पाठशाला में पढ़ता है। उन्होंने कहा कि आज फिर कांशीराम के बताये रास्ते पर चलने की जरूरत है। पुस्तक का सम्पादन करने वाले एआर अकेला ने कहा कि कांशीराम के प्रत्येक भाषण को दुनिया के सामने लाता रहूंगा। कांशीराम के भाषण हमारी आने वाली पीढ़ी के नौजवानों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का काम करेंगे।


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2 Comments

  •  
    Ravi kant Rao
    2018-08-07

    Comment *

  •  
    Dr I D Gautam
    2018-08-03

    दद्दू प्रसाद जी के बारे मे आपके इस लेख ने उनको जानने समझने मे सूचना परक जानकारी मुहैया करायी ।साधुवाद ।

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