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"साझा विरासत बचाओ" मंच से मोदी के खिलाफ़ फूंका बिगुल

नई दिल्ली के कंस्टीटयूशन में शरद यादव के आह्वान पर “साझा विरासत बचाओ” सम्मेलन में पूरा विपक्ष एकजुट दिखा। राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा जेडीयू से निलंबित सांसद अली अनवर, यूपी से एसपी के रामगोपाल यादव और बीएसपी से राज्यसभा सांसद भाई वीर सिंह, टीएमसी के शुभेंदु शेखर राय, नेशनल कांफ्रेंस से फारूख अब्दुल्ला, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा और आरजेडी के लालू यादव की तरफ से प्रवक्ता मनोज झा मौज़ूद रहे।
सम्मलेन में राहुल गांधी बोले कि मोदी जी मेक इन इंडिया का गीत गाते रहते हैं लेकिन हर तरफ दिख रहा है मेड इन चाहना, उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता आने के बाद इनका देशप्रेम जागा, मोदी जी  ने जितने वादे किए वो सब झुठे साबित हुए, दो करोड़ रोजगार देने का वादा झुठा निकला, किसान आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन जेटली जी बोलते हैं कि कर्ज माफी हमारी पॉलिसी नहीं है। लेकिन करोड़िपतियों के कर्ज माफ करने की पॉलिसी है इनके पास,  पिछले दो सालों में सिर्फ 10-15 करोड़पतियों का 1 लाख 30 करोड़ रूपये का कर्ज माफ कर दिया गया। इनकी नज़र संविधान पर है जिसे पूरा करने के लिए ये न्यायपालिका और मीडिया में अपने लोगों को भर रहे है, उन्होंने कहा कि वो संविधान को खत्म कर देना चाहते हैं। आखिरी में वे बोले कि विपक्ष को एक होकर लड़ना होगा।
शरद यादव ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य संविधान को बचाना है, जिसमें देश की एकता का उल्लेख है, साझी विरासत का मतलब यही है कि देश में सभी धर्म और जाति के लोग मिलजुलकर रहें। पूरे देश में किसानों और दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं देश भर में बेचैनी है, उन्होंने कहा कि मैने किसी को बुलाया नहीं है फिर भी हजारों लोग मेरे साथ खड़े हैं। गुलाम नबी आजाद बोले कि वर्तमान सरकार संविधान को तहस नहस कर देना चाहती है, फारुख अब्दुला बोले कि हमने आज़ादी की लड़ाई लड़ी लेकिन आज वो लोग राष्ट्रवाद की बात करते हैं जिनका आजादी में कोई योगदान नहीं रहा। साझा विरासत के नाम पर जुटे विपक्ष को देखकर लगा कि नीतीश कुमार के पलटी मार जाने बाद जो गठबंधन खतरे में पड़ता दिख रहा था उसमें शरद यादव की पहल के बाद जान पड़ती दिख रही है, और विपक्ष 2019 की लड़ाई के लिए तैयारी में जुट गया है।
       

मुख्य संवाददाता
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