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लखनऊ में शरद यादव ने अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद मीडिया से कहा- बीजेपी के सत्ता में रहते देश का संविधान खतरे में है

देश में अगले साल होने वाले आम चुनावों के लिए सियासी बिसात बिछने लगी है। सभी राजनीतिक दलों के नेता अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को लखनऊ में जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की।



जेडीयू के पूर्व नेता शरद यादव मंगलवार को यूपी की राजधानी लखनऊ में थे, यहां पिछड़ा, अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी मंच के कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद वो एसपी सुप्रीमो अखिलेश यादव से मिले। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन करने की संभावनाओं समेत जैसे कई अन्य विषयों पर मंथन हुआ। इसके साथ ही उन्होंने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में एसपी को मिली जीत के लिए अखिलेश यादव, बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और जनता को बधाई दी। 



 अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद शरद यादव ने लखनऊ स्थित वीवीआईपी गेस्ट हाउस में माडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कहा कि बीजेपी के सत्ता में रहते देश का संविधान खतरे में है, इसलिए सभी गैर बीजेपी राजनीतिक दलों के नेताओं को एक साथ आना होगा। शरद यादव ने बीजेपी और उसकी विभाजनकारी राजनीति पर निशाना साधा और कहा कि बीजेपी के कई नेता और मंत्री संविधान के दायरे से बाहर जाकर बोलकर संविधान को चोट पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

शरद यादव ने लव जिहाद, घर वापसी जैसे तमाम मुद्दों पर कहा कि क्या बीजेपी वालों ने 2014 में सत्ता में आने से पहले इन सभी मुद्दों के बारे में कहा था। इन्होंने जनता से जो वादे किए थे, वो भी पूरे नहीं किए हैं। केंद्र में मोदी सरकार और बीजेपी की वादाखिलाफी के कारण देश का बेरोजगार युवक,किसान और गरीब-मजदूर ख़ुदखुशी करने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में करीब 26 हजार किसान और 500 बेरोजगार युवकों ने ख़ुदकुशी की है। शरद यादव ने ये भी कहा कि नोटबंदी के कारण  रियल स्टेट जैसा धंधा चौपट हो गया। करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गई हैं। विजय माल्या, नीरव मोदी, कोठारी समेत कई अन्य भ्रष्टाचारियों की वजह से बैंकिंग व्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है।

जेडीयू के पूर्व नेता शरद यादव ने पत्रकारों द्वारा के पूछे गए तीसरे मोर्चे के गठन पर एक सवाल के जवाब में कहा कि एक वक्त था इमरजेंसी का, उस वक्त देश में बहुत कम राजनीतिक दल थे, लेकिन वर्तमान दौर में अगर देश के संविधान को बचाना है,  तो सभी गैर बीजेपी दलों को को एक साथ आना होगा।



मुख्य संवाददाता
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