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राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला- सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 8 फरवरी 2018 को

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बेहद संवेदनशील मामले में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई शुरू हुई। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर की स्पेशल बेंच इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 सितंबर 2010 में दिए फैसले के खिलाफ़ दर्ज कुल 13 अर्जियों पर सुनवाई करेगी।

सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील  कपिल सिब्बल ने ने सुप्रीम कोर्ट से 7 जजों की बेंच बनाने की मांग की।कपिल सिब्बल ने सुनवाई 2019 के आम चुनाव तक टालने की मांग की। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि अभी तक कागजी कार्रवाई भी पूरी नहीं हुई है। कोर्ट के फैसले का देश में बड़ा असर पड़ेगा और मामले में जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है। इस पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपकी इस दलील से हमें धक्का लगा है, पहले सभी पक्षकार जनवरी में सुनवाई के लिए तैयार हो गए थे और अब कह रहे हैं कि जुलाई 2019 के बाद सुनवाई हो।

कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई यही बेंच करेगी। और अगली सुनवाई के लिए 8 फरवरी 2018 की तारीख तय कर दी। अब इस मामले में 8 फरवरी से सुनवाई शुरू होगी। कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी वकीलों से कहा कि मुकदमे से जुड़े सभी दस्तावेजों को पूरा कर लें, ताकि मामले की सुनवाई को टाला ना जा सके। कपिल सिब्बल ने कहा कि राम मंदिर का कानूनी समाधान सत्ताधारी पार्टी के घोषणापत्र में था। अगर अभी सुनवाई हुई तो राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ेगा। इसपर चीफ जस्टिस मिश्रा ने कहा कि बाहर क्या चल रहा है उससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। 

सुनवाई शुरू होते ही शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से दलीलें पेश की गईं। शिया बोर्ड के वकील ने विवादित स्थल पर मंदिर बनाए जाने का समर्थन किया। दूसरी तरफ शिया वक्फ बोर्ड की इस दलील का सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कड़ा विरोध किया। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि अभी मामले से जुड़े सारे दस्तावेज पेश नहीं हो पाए हैं। इस पर अडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) तुषार मेहता ने सुन्नी बोर्ड के दावे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट में सारे कागजात जमा हैं।

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 में अपने फैसले में अयोध्या के विवादित 2.77 एकड़ क्षेत्र को मामले के तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और भगवान रामलला में बांट दिया था। इसलिए विवाद का हल निकालने के लिए शिया वक्फ बोर्ड, यूपी के तहत मुस्लिमों के एक धड़े ने कुछ समय पहले अदालत से कहा था कि अयोध्या में विवादित स्थल से कुछ दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद का निर्माण कराया जा सकता है।


मुख्य संवाददाता
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