img

पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल नियुक्त, पीएम और पूर्व पीएम भी आएंगे जांच के दायरे में

देश को पिनाकी चंद्र घोष के रूप में पहला लोकपाल मिल गया है। मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लोकपाल के गठन को मंजूरी देते हुए पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया है। का अध्यक्ष नियुक्त किया है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष को देश के पहले लोकपाल का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही 4 न्यायिक और 4 गैर न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। न्यायिक सदस्यों में जस्टिस दिलीप बी भोसले, जस्टिस प्रदीप कुमार मोहंती, जस्टिस अभिलाषा कुमारी और जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी शामिल हैं। इसके अलावा एसएसबी की पूर्व प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन गैर न्यायिक सदस्य बनाए गए हैं। महेन्द्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम को भी गैर न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है।  जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष  और पूर्व अटॉर्नी जनरल की चयन समिति ने न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष के नाम की सिफारिश की थी।

बता दें कि  लोकपाल को प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री की जांच करने का अधिकार होगा। इसके अलावा उसे सभी केंद्रीय मंत्रियों, दोनों सदनों के सदस्यों, ग्रुप ए बी सी और डी के अधिकारियों की भी जांच का अधिकार होगा। वहीं ऐसे ट्रस्ट, सोसायटी और एनजीओ जो सरकार से आर्थिक मदद लेते हैं, उनके निदेशक और सचिव भी उसकी जांच के दायरे में आएंगे। लेकिन न्यायपालिका और सेना इसकी जांच के दायरे में नहीं होंगी। प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसे मामले आ सकेंगे जो अंतर्राष्ट्रीय, आंतरिक, बाहरी सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हुए नहीं होंगे। प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच के लिए लोकपाल की पूर्ण बेंच अध्यक्ष की अगुवाई में बैठक होगी और दो तिहाई के बहुमत से फैसला करने पर ही प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच होगी। यह कार्रवाई गोपनीय होगी और अगर शिकायत जांच लायक नहीं पाई जाएगी तो उसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। 

मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े