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मेरठ- विशाल जनसभा में जिग्नेश मेवाणी का ऐलान, अगर चंद्रशेखर रावण को एक अप्रैल तक रिहा नहीं किया गया तो मुख्यमंत्री योगी को नहीं लगाने देंगे डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को हाथ

भीम आर्मी के संस्थापक और दलित समाज के युवा हृदय सम्राट एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद रावण की जेल से रिहाई के लिए फिर से आवाज बुलंद होने लगी है। इस बार ये बुलंद आवाज आजादी के आंदोलन की मुख्य वाहक रही क्रांतिधरा मेरठ भूमि से उठी है। 12 फरवरी को मेरठ में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट फ्रंट की तरफ से आयोजित ‘लोकतंत्र बहाल करो’ विशाल जनसभा में गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवाणी के नेतृत्व में पुरजोर तरीके से योगी सरकार को खुली चुनौती देते हुए चंद्रशेखर को 1 अप्रैल तक जेल से रिहा करने का अल्टीमेटम दिया।
             

मेरठ कॉलेज के पास कमिश्नरी पार्क सोमवार को अंबेडकरवादियों के उमड़े जनसैलाब से गुलजार रहा। मौका था डेमोक्रेटिक स्टूडेंट फ्रंट की ‘लोकतंत्र बहाल करो’ विशाल जनसभा का। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद रावण को जेल से रिहा कराने की मांग को लेकर आयोजित की गई इस जनसभा को दलित समाज के तेजी से उभरते युवा नेता और गुजरात के वडगाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने अपने ओजस्वी भाषण में शब्दों के तीखे प्रहार करते हुए दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं को लेकर मोदी और योगी की सरकार पर जमकर निशाना साधा।            


विधायक जिग्नेश मेवाणी ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर 1 अप्रैल तक भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्रशेखर आजाद रावण को जेल से नहीं छोड़ा गया, तो दलित समाज के लोग यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा से हाथ नहीं लगाने देंगे। जिसके लिए दलित समाज और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को बड़े पैमाने पर जेल भरो आंदोलन चलाना होगा। जिग्नेश मेवानी ने ये भी कहा कि वैसे तो मोदी और योगी सबका साथ, सबका विकास करने की बात करते हैं, लेकिन इनकी सरकारें दलित समाज का अस्तिव ख़त्म करने और उनकी आवाज को कुचलने का काम कर रही हैं। सहारनपुर के शब्बीरपुर की घटना का उदाहरण हमारे सामने है। वहां दलित समाज के लोगों का खुलेआम उत्पीड़न हुआ था, लेकिन पुलिस ने भेदभाव की नीति अपनाते हुए उल्टे पीड़ितों को ही गिरफ़्तार कर जेल में बंद करा दिया। जिसका भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रेशखर आजाद रावण ने शांतिपूर्वक आंदोलन के जरिए विरोध किया तो उसे भी जेल भेज दिया गया। इतना ही नहीं चंद्रशेखर को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी उस पर रासुका लगाकर जेल में बंद कर रखा है। इस मौके पर जिग्नेश मेवाणी ने बोलते हुए कहा कि चंद्रशेखर को राजनीति के मैदान में उतारा जाएगा और 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में जीत दिलाकर संसद भेजेंगे।      


जिग्नेश मेवाणी ने दलित छात्र दिलीप सरोज की हत्या के मामले में कहा कि इलाहाबाद में कानून की धज्जियां उड़ाई गईं हैं। उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक घटना बताया दिया। । जिग्नेश मेवाणी ने कासगंज हिंसा मामले को लेकर भी योगी सरकार पर शब्दों के तीर चलाए और कहा कि कासगंज में ज़्यादातर दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज के लोग ही गिरफ्तार किए गए हैं।  उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग कहते हैं कि यूपी में रहना है तो योगी-योगी कहना होगा। लेकिन चंद्रशेखर के जेल से रिहा होने के बाद हम कहेंगे कि यूपी में रहना है तो संविधान-संविधान कहना होगा। जिग्नेश ने कहा कि अगर यूपी में दलित और मुस्लिम एकजुट हो जाएं तो 2019 में नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे और न ही योगी फिर से मुख्यमंत्री बन सकेंगे। उन्होंने ने कहा कि जनता जब रोटी कपड़ा और मकान की बात करती है तो ये लोग घर वापसी, गाय और लव जेहाद की बात करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर आप दलित उत्पीड़न की घटनाओं को नहीं रोक पा रहे हो या युवाओं को रोज़गार नहीं दे पा रहे हैं तो राजनीति छोड़ कर हिमालय चले जाओ।    


इस मौके पर जिग्नेश मेवाणी ने ये भी कहा कि गुजरात में हज़ारों एकड़ ज़मीन का आवंटन कागज़ों में हुआ है। अगर 14  अप्रैल तक दलितों को कब्जा नहीं दिया गया तो वो आंदोलन करेंगे। गुजरात में हाई-वे जाम करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि मुझे चुनाव में हराने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत लगा दी थी। गुजरात और यूपी के मुख्यमंत्रियों ने वडगाम विधानसभा क्षेत्र में जाकर कई रैलिया की थी, जिसे वडगाम की जनता ने नकार दिया और मुझे बीस हजार वोटों से जीत दिलाई।      


इस विशाल जनसभा का सफल संचालन छात्र नेता गोपाल सिंह ने किया, जबकि कार्यक्रम के आयोजक डॉक्टर सतीश प्रकाश और डॉक्टर सुशील गौतम रहे। इस मौके पर छात्र नेता शिवांग वैद्य, वरिष्ठ समाज सेवी सतीश चंद, प्रदीप नरवाल, प्रविंद्र धारिया समेत दलित समाज के हजारों लोगों ने शिरकत की। 

मुख्य संवाददाता
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