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सस्ती व घिनौनी राजनीति करती है भाजपा- मायावती

उत्तर प्रदेश- मेरठ में नगर निगम के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वंदे मातरम गाने को लेकर हुए हंगामे के बाद बसपा सुप्रीमों ने बीजेपी पर घिनौनी व सस्ती राजनीति करने का आरोप लगाते हुए बीजेपी की तीव्र निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि शहरी निकाय चुनाव के बाद इस प्रकार की सस्ती राजनीति की शुरुआत स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जब उन्होंने केवल भाजपा के विजयी मेयरों को प्रधानमंत्री निवास में दावत पर बुलाया।

मायावती ने आरोप लगाया कि मेरठ नगर निगम चुनाव के बाद बसपा की मेयर सुनीता वर्मा एवं अन्य के शपथ-ग्रहण समारोह को जानबूझकर राजनीति का अखाड़ा बनाने की कोशिश की गई। भाजपा के सदस्यों ने कार्यक्रम में बसपा के विरुद्ध नारेबाजी शुरु कर दी और इसी दौरान वंदेमातरम भी गाना शुरु कर दिया। ऐसे लोग समझ ही नहीं पाए कि इस अफरातफरी में वंदेमातरम भी गाया जा रहा है।

उन्होंन कहा कि शपथ-ग्रहण समारोह के कार्यक्रम को सरकारी अधिकारियों को कानून के हिसाब से संचालित करने के लिए छोड़ देना चाहिए था, ताकि सब कुछ सुचारु रुप से हो सके। मायावती ने आगे कहा कि ऐसे समय में अगर नवनिर्वाचित मेयर सुनीता वर्मा स्वयं खड़ी नहीं हो पाई तो कम-से-कम अधिकारियों को इसका संज्ञान लेकर उनको बताना चाहिए था कि वंदेमातरम गाया जा रहा है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत सहित मातृभूमि का पूरा-पूरा आदर-सम्मान करती है तथा देशहित को पहली प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं के निर्वहन में बसपा कभी किसी से पीछे नहीं रही है और इसी कारण संसद व विधानसभा के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत की परंपरा का पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित किया है। मेयर और पार्षदों के शपथ-ग्रहण समारोह का भाजपा द्वारा अव्यवस्था फैलाकर इसको बसपा के खिलाफ राजनीति के अखाड़े के रुप में इस्तेमाल करके पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की। यह सर्वथा गलत व अशोभनीय है जिसकी बसपा कड़े शब्दों में निंदा करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह सर्वविदित ही है कि बसपा संविधान, कानून एवं लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ-साथ देशहित को सर्वोपरि रखती है। यह बाबा साहब आंबेडकर की सीख है जबकि भाजपा धर्म, देशभक्ति, राष्ट्रवाद, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत आदि के नाम पर सस्ती राजनीति करके इन मुद्दों को विवाद का विषय बनाती रही है।

मायावती ने कहा कि शहरी निकाय के चुनाव में सत्ताधारी पार्टी होने व सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने के बावजूद भाजपा के 45 प्रतिशत अर्थात लगभग आधे प्रत्याशी अपनी ज़मानत तक नहीं बचा पाए हैं, जिसका क्रोध एवं खीझ उन्हें बसपा पर निकालने के बजाय उन्हें अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि जनता उनसे इतनी ज़्यादा आक्रोशित क्यों हैं ?

मुख्य संवाददाता
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