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बहुजन समाज के लोगों को व्यापार की तरफ भी बढ़ना होगा- धर्मेन्द्र कैमवाल

दिल्ली में जन्मे धर्मेन्द्र कैमवाल बहुजन समाज के युवा उद्योगपति हैं । वो गाज़ियाबाद के वसुंधरा में रहते हुए बहुजन समाज और बौद्ध धर्म की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। वो हमेशा बौद्ध धर्म के कार्यों में बढ़-चढ़कर सहयोग देते हैं और गरीबों की मदद करने के लिए भी आगे रहते हैं।  महज़ 1100 रूपए से अपनी ज़िंदगी की शुरूआत करने वाले धर्मेंद्र कैमवाल जी ने आज "कुमार एंटरप्राइजेज" के रूप में  करोड़ों  का टर्नओवर करने वाली कंपनी खड़ी कर दी है।ऐसी शख्सियत से ‘पड़ताल’ की टीम ने ख़ास बातचीत की...आप भी जानिए बातचीत के कुछ ख़ास अंश...

दलित समाज के लोग ज्यादातर नौकरियों की तरफ आकर्षित होते हैं, लेकिन आप और आपका पूरा परिवार शुरू से ही बिजनेस की तरफ आकर्षित दिखा क्यों और कैसे
?
वैसे तो हमारे पिता जी दिल्ली विश्वविद्यालय में नौकरी करते थे, और परिवार के अन्य लोग भी जैसे ताऊजी, चाचाजी सब सरकारी नौकरियों में थे,   लेकिन हमारा शुरुआती जीवन काफी अभावों में बीता। जब मैं अपने आसपास अन्य समाज के लोगों को देखता था, जो व्यापार करते थे वो बड़ी संपन्नता के साथ जीते थे, तभी मैंने निर्णय किया कि मैं नौकरी नहीं करूंगा और व्यापार शुरू करूंगा । मैंने 1100 रुपये से घर में ही स्क्रीन प्रिंटिग का काम शुरू किया था। जब मुझे ठीक लगा तो मैंने अपने दोनों भाइयों को भी अपने साथ जोड़ लिया और आज हम सभी भाई प्रिंटिंग प्रेस, पैकेजिंग और डिजिटल प्रिंटिंग में काम कर रहे हैं।

बिजनेस में आगे बढ़ने के लिए दलित होने के नाते किन-किन परेशानियों को सामना करना पड़ा
?
जब आप आगे बढ़ते हैं, तो आसपास वाले सोचने लगते हैं कि ये किस समाज से आते हैं कौन सी जाति के हैं, लेकिन हमने अपने काम से अपनी पहचान बनाई है । साथ ही ये साबित किया कि दलित समाज के लोग भी अच्छे स्तर पर काम कर सकते हैं । आपको बता दूं कि दिल्ली में सबसे पहली डिजिटल प्रिंटिंग मशीन हमने ही लगाई थी । जिसकी उस समय बहुत चर्चा हुई थी और हमारी पहचान बनी थी।

बतौर बिजनेस मैन दलित समाज के लिए आपका क्या योगदान रहा है ?
हमारा परिवार शुरू से ही बामसेफ से जुड़ा रहा हैं। पहली बार मैं अपने पिताजी के साथ बामसेफ की बैठक में भाषण सुनने गया था, हम बौद्ध धर्म को मानते हैं। बुद्ध जयंती और 14 अप्रैल हमारे लिए सबसे बड़े पर्व है । इस दिन हम गरीबों को दान भी देते हैं और हर तरीके से सहायता करने की कोशिश करते हैं। गरीब बच्चों को भी पढ़ाई करने के लिए आर्थिक सहायता देते हैं।  

दलित समाज को बिजनेस के लिए प्रोत्साहित करने के लिए क्या होना चाहिए
?
मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को बिजनेस की तरफ प्रोत्साहित करने की कोशिश करता हूं । कई लोगों को मैंने छोटे-छोटे उद्योग लगवाएं हैं । कुछ लोगों को ट्रेनिंग भी दिलवाई है । बहुजन समाज को नौकरी करने की मानसिकता को दूर करना होगा और व्यापार की तरफ बढ़ना होगा, तभी समाज आर्थिक रूप से संपन्न हो पाएगा।

राजनीति में दलित समाज का वर्चस्व क्यों नहीं बन पा रहा है 
?
राजनीति में भी हमें आगे बढ़ना चाहिए अगर हमारे लोग ज्यादा से ज्यादा राजनीति में होंगे तो हम उतने ही मजबूत होंगे। यूपी के विधानसभा चुनावों में बीएसपी की बहुत बड़ी हार हुई, जिसका गहराई से चिंतन किया जाना चाहिए। ये बात सबको साफ तौर से समझनी होगी कि बहुजनों की आवाज उठाने वाली अगर कोई पार्टी है तो वो सिर्फ बीएसपी ही है। पार्टी को दोबारा खड़ा करने के लिए बहन जी ने यूपी में रैलियां शुरू कर दी हैं। हम सबको भी अपने-अपने स्तर पर बहनजी को मजबूत बनाने में योगदान करना चाहिए। 

सरकारी योजनाओं का कितना लाभ हमारे लोग उठा पाते हैं
?
जो सराकारी योजनाएं दलितों के लिए बनाई जाती हैं, उनका डंका तो खूब बजाया जाता है।  लेकिन 2 फीसदी लोग भी उसका फायदा नहीं उठा पाते हैं। क्योंकि वहां इतने नियम बना दिए जाते हैं कि दलित समाज के लोग उनको पूरा ही नहीं कर पाते हैं।  हमने डिक्की के माध्यम से भी ये आवाज उठाई है कि नियमों को आसान बनाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिल सके।

सोशल मीडिया के क्षेत्र में शुरू हुई न्यूज़ पोर्टल
‘पड़ताल’ के लिए आपका क्या संदेश है ?
‘पड़ताल’ की पूरी टीम के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। हमें लगता है कि दलित समाज पर जो अत्याचार हो रहे हैं, जिन्हें मीडिया में दिखाया ही नहीं जाता। ‘पड़ताल’ ऐसी हर खबर लोगों तक पहुंचाएं और लोगों को जागरुक करें। 

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2 Comments

  •  
    Dharam shigh bouddh
    2017-09-19

    ?? ??? ??? ???????

  •  
    RAJIV KAIN
    2017-09-19

    Wonderful interview my dear friend Dharminder kemwal is my child hood friend ..me and my best wishes always with Dharminder Ji My best regards with Padtal team

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