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परंपरा के नाम पर मंदिर में लड़कियों को रखा जाता है अर्द्धनग्न, 15 दिनों तक रहना पड़ता है पुजारी की देखरेख में

तमिलनाडु के मदूरै में परंपरा के नाम पर शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सात लड़कियों को करीब 15 दिनों तक मंदिर के पुजारी के साथ अर्द्धनग्न (टॉपलेस) रखा गया। जब प्रशासन के सामने ये मामला आया कि सात लड़कियों को परंपरा के नाम पर मंदिर में  अर्द्धनग्न रखा गया है तो कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी लड़कियों को पूरा शरीर ढंकने के निर्देश दिए। और साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित की कोशिश की, कि इस दौरान उनके साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार तो नहीं हुआ है।
   
मदुरै के मंदिर के अंदर सातों लड़कियों को पिछले 15 दिनों से अर्द्धनग्न अवस्था में मंदिर में रखा गया था। जहां उन्हें देवी की तरह सजाया गया था। उनके शरीर के ऊपरी हिस्से पर एक भी कपड़ा नहीं था, सिर्फ गहने पहनाए गए थे, और मेकअप किया गया था। इस दौरान उनके साथ मंदिर में सिर्फ पुजारी रहता था जो उनकी देखभाल कर रहा था।
   
मदुरै के कलेक्टर के. वीरा राघव राव ने बताया कि यह काफी पुरानी परंपरा है। घर वाले स्वयं ही अपनी लड़कियों को मंदिर में भेजते हैं। हालांकि प्रशासन ने कपड़े पहनने के निर्देश जारी कर दिए है, और छानबीन करने के आदेश दिए हैं इस दौरान उनके साथ किसी भी तरह की छेड़खानी या दुर्व्यवहार तो नहीं हुआ।

उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों की एक टीम मौके पर जांच-पड़ताल के लिए गई थी, लेकिन मंदिर में बच्चों के साथ किसी प्रकार के दुर्व्यवहार की बात सामने नहीं आई। कलेक्टर ने इस दौरान लोगों को निर्देश दिए हैं कि लड़कियों के शरीर परंपरा के दौरान पूरी तरह से ढंके हों।
   
इस इलाके में 60 से अधिक गांव इस परंपरा में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं, जिसमें किशोरियां देवी जैसी पूजी जाती हैं। हैरानी इस बात पर है कि लड़कियों के परिवार वाले खुद अपनी बेटियों को परंपरा के नाम पर बिना कपड़ों में रहने की इजाज़त दे देते हैं। और परंपरा और आस्था के नाम पर मासूम बेटियों को 15 दिनों तक अर्द्धनग्न अवस्था में पुजारी के साथ मंदिर में रहने देते हैं।  

मुख्य संवाददाता
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