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राष्ट्रीय शर्म की ख़बर- 'न्यू इंडिया' में 11 साल की बच्ची की भूख से तड़प-तड़प कर मौत

झारखंड के सिमडेगा से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली खबर आई है। इस दिल दहला देने वाली घटना का खुलासा खाद्य सुरक्षा को लेकर काम करने वाली एक संस्था ने किया है। संस्था के मुताबिक, पिछले महीने 28 सितंबर को 11 साल की बच्ची संतोषी की मौत सिर्फ इसलिए हो गई, क्योंकि घर में पिछले आठ दिन से खाने के लिए कुछ नहीं था। मृतक बच्ची संतोषी की मां कोईली देवी ने जानकारी दी कि उनकरा राशन कार्ड आधार कार्ड से लिंक नहीं होने की वजह से उन्हें फरवरी से पीडीएस का राशन नहीं मिल रहा था। जिसकी वजह से 27 सितंबर को संतोषी की तबीयत बिगड़ गई। और 28 सितंबर को भूख के कारण उसकी जान चली गई। उसके पेट में काफी दर्द हो रहा था और भूख के मारे उसका शरीर अकड़ गया था।    

परिवार की माली हालत इतनी खराब है कि सरकार से राशन ना मिलने के बाद वो अपने परिवार के लिए खाना जुटाने में सक्षम नहीं था। परिवार वालों का कहना है कि घर वालों के पास पिछले आठ दिनों से खाने का कुछ भी नहीं था और उनकी बच्ची ने परिवार वालों के सामने ही भूख से तड़प-तड़प कर मर गई।

झारखंड के सिमडेगा जिले के करीमति गांव की रहने वाली 11 साल की संतोषी कुमारी को अपनी जान सिर्फ इसलिए गंवानी पड़ी क्योंकि उसके परिवार का राशन कार्ड आधार कार्ड से लिंक नहीं था। 8 दिनों तक खाना ना मिलने से बच्ची ने दम तोड़ दिया। पीड़ित परिवार का राशन कार्ड 6 महीने पहले ही रद्द कर दिया गया था। पीड़ित के परिवार के पास न तो जमीन है, न कोई नौकरी और न ही कोई स्थायी आय है जिसके कारण उसका परिवार पूरी तरह से नेशनल फूड सिक्यूरिटी के तहत मिलने वाले राशन पर ही निर्भर था और इसी से पूरा परिवार को भोजन मिल रहा था।
   
पिछले 6 महीने से अपना राशन कार्ड दोबारा से बहाल कराने के लिए पीड़ित परिवार सरकारी दफ्तरों के घक्के खा रहा था। इस मामले में राइट टू फूड कैंपेन के एक्टिविस्ट्स का कहना है कि अगर पीड़ित परिवार को पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम के तहत राशन दे दिया जाता तो बच्ची को 8 दिनों तक भूखा नहीं रहना पड़ता और उसकी जान नहीं जाती।

मुख्य संवाददाता
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