img

स्कूल में दलित बच्ची के साथ जातीय उत्पीड़न, मिड डे मील के लिए मंगाया जाता था अलग बर्तन, डोम कहकर स्कूल से निकाला

चंदौली जिले के मारूफपुर में बाबा रामकृष्ण जुनियर हाईस्कूल में एक दलित लड़की को ये कहकर स्कूल से निकाल दिया कि तुम डोम जाती की हो और तुम स्कूल नहीं आ सकती। एक छात्रा को इसलिए स्कूल में आने से रोकना, क्योंकि वह वाल्मिकी जाति की है, और वह भी ऐसे वर्ग द्वारा जो अपने आप को पढ़ा लिखा और देश का भविष्य बनाने का दावा करता है। छात्रा का कहना है कि दाखिले के बाद से ही उसके साथ भेदभाव किया जा रहा था। मिड डे मील देने के लिए उसे घर से बर्तन लाने के लिए कहा जाता था।
 
करीब दस दिन पहले बच्ची को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया गया कि उसके स्कूल में आने से माहौल खराब होता है, तुम्हे सारी किताबें और सामान दे दिया जाएगा। इस संबंध में उसने चाइल्ड लाइन से शिकायत की है। चाइल्ड लाइन संस्था के सदस्यों ने आकर पूछताछ की और कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन छात्रा को स्कूल में नहीं लिया गया। जबकि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अभी तक लिखित शिकायत नहीं मिली है। मौखिक जानकारी के आधार पर खंड शिक्षा अधिकारी चहनियां को प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया है।   

पिछले 10 दिनों से यह बच्ची स्कूल नहीं जा रही और अपने घर पर ही बैठी है,  और वर्ण व्यवस्था को कोस रही है, हालांकि बच्ची का गरीब परिवार व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, लेकिन स्थानीय प्रसासन आँख बंद  किए हुए है, बहरहाल मीडिया  के हस्तक्षेप के बाद अधिकारी मामले की जांच की बात कर रहे हैं।     

बच्ची बहुत ही गरीब परिवार से संबंध रखती है, पूरा परिवार एक छोटी सी झोपड़ी में रहकर गुजर-बसर करता है, इसके बावजूद गरीब-माता ने अपना पेट काटकर इस अच्छे स्कूल में बच्ची का दाखिला करवाया। ताकि उसका भविष्य अच्छा हो सके लेकिन इस अच्छे स्कूल ने तो बच्ची को ऐसा दंश दे दिया कि वो शायद ही कभी इस भयानक वाकये को भुला सके। हालांकि मामला इतना बढ़ गया है कि अब बच्ची को तो स्कूल में वापस ले ही लिया जाएगा, लेकिन क्या गारंटी है कि बाद में स्कूल के अंदर उसके साथ पहले से भी भयानक भेदभाव नहीं किया जाएगा। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है जो ऐसे स्कूलों और शिक्षकों पर नज़र रखे और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करे।

आप खुद ही सोचिए और बताइए कि ऐसे लोगों की क्या सज़ा होनी चाहिए जो बच्चों से जातिगत भेदभाव कर रहे हैं, जाति के नाम पर नफरत कर रहे हैं, और वो भी जब एक शिक्षक हो, क्या ये किसी मासूम का बचपन कुचल देने जैसा नहीं है, क्या ये किसी के भविष्य को अंधेरे की तरफ धकेलना नहीं है। मेरी नज़र में ये एक अक्षम्य अपराध है, जिसके लिए उस पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।
   

मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
PROFILE

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

  • काश, समय से पहले ना गए होते कांशीराम....

    कांशीराम जी की 11वीं पुण्यतिथि पर विशेष...ये कहने में शायद किसी को कोई ऐतराज नहीं होगा कि बाबा साहब के बाद कांशीराम जी बहुजनों के सबसे बड़े नेता थे। और उनकी असमायिक मौत से बहुजन समाज का जो नुकसान…

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े