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1911 में आज ही के दिन ‘कोरोनेशन पार्क’ से हुआ था दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान

नई दिल्ली- आज ही के दिन 12 दिसंबर 1911 को ब्रिटिश हुकूमत ने दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान किया था। इस ऐतिहासिक फैसले का ऐलान दिल्ली के कोरोनेशन पार्क से किया गया था। हालांकि, दिल्ली को राजधानी का दर्जा 13 फरवरी 1931 को मिला। ये पार्क ऊत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में स्थित है, इसे अब पिकनिक स्थल के रुप में विकसित किया जा रहा है। दिल्ली को राजधानी बनाने की घोषणा के बाद इसी मैदान में रानी ने वायसराय हाउस की आधारशिला रखी। मगर यमुना के बाढ़ क्षेत्र में आने के चलते बाद में यह आधारशिला रायसीना हिल पर स्थापित की गई। वायसराय हाउस ही आज का राष्ट्रपति भवन है।  

इसे दिल्ली दरबार भी कहा गया। हालांकि इतिहास में यहां कुल तीन बार ही दिल्ली दरबार लगे। पहला दरबार 1877 में, दूसरा 1903 में ,और तीसरा दरबार 1911 लगा।  पहली बार 1 जनवरी 1877 में यहां पहली बार दरबार लगा,  जिसे प्रोक्लेमेशन दरबार, या घोषणा दरबार कहा गया, जिसमें महारानी विक्टोरया को भारत की साम्राज्ञी घोषित किया गया और यहीं पर उनका राजतिलक किया गया।
   
दूसरी बार सन् 1903 में एडवर्ड सप्तम एवं महारानी एलेक्जैंड्रा को भारत के सम्राट एवं सम्राज्ञी घोषित करने हेतु दरबार लगा था। लॉर्ड कर्ज़न द्वारा पूरे दो हफ्ते तक कार्यक्रम आयोजित करवाये गये थे। यह शान शौकत के प्रदर्शन का एक बड़ा मौका था। ऐसी धूमधाम और भव्यता ना तो 1877 में,  और ना ही 1911 के दरबार में देखने को मिली
   
तीसरी बार दिसंबर 1911 में महाराजा जॉर्ज पंचम एवं महारानी मैरी के भारत के सम्राट एवं सम्राज्ञी बनने पर राजतिलक समारोह हुआ था। व्यवहारिक रूप से प्रत्येक शासक राजकुमार, महाराजा एवं नवाब तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति, सभापतियों को अपना आदर व्यक्त करने पहुंचे। इस दिन लगभग 26,800 पदक दिये गये, जो कि अधिकांशतः ब्रिटिश रेजिमेंट के अधिकारी एवं सैनिकों को दिये गये थे। भारतीय रजवाड़ों के शासकों और उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी एक छोटी संख्या में स्वर्ण पदक दिये गये थे। हालांकि कुछ लोग इसे गुलामी की निशानी बताकर इस पर सवाल खड़े करते रहे हैं। 

मुख्य संवाददाता
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