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बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा का बड़ा ऐलान- "भारत से होगा मेरा अगला उत्तराधिकारी"

बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने अपने अगले उत्तराधिकारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। दलाई लामा ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में ऐलान किया है कि उनका अगला उत्तराधिकारी भारत की धरती से हो सकता है। लेकिन चीन सरकार ने उनके इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।

दुनियाभर में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में लगे 14वें तिब्बती दलाई लामा ने अपने निर्वासन के 60 साल पूरे होने के एक दिन बाद सोमवार को (18 मार्च ) को अपने अगले उत्तराधिकारी को लेकर ये बड़ा बयान दिया । उन्होंने कहा है कि मेरा अगला उत्तराधिकारी भारत से हो सकता है। इसके साथ ही दलाई लामा ने अपने बौद्ध धर्म के समर्थकों को आगाह करते हुए कहा है वो चीन की तरफ से घोषित किसी अन्य उत्तराधिकारी को सम्मान न दिया जाए।      

दलाई लामा ने कहा है कि चीन दलाईलामा के पुनर्जन्म के महत्व को समझता है और बीजिंग अगले दलाईलामा को लेकर चिंतित भी है। और यदि भविष्य में दो दलाई लामा अस्तित्व में आते हैं, एक यहां स्वतंत्र देश से और दूसरा जिसे चीन चुने, तो ऐसे में चीन की तरफ से चुने गए दलाईलामा को कोई सम्मान नहीं देगा। ये  चीन के लिए बड़ी समस्या है और यह संभव है।

दलाई लामा ने कहा कि मेरी और चीनी अफसरों के बीच 2010 तक अधिकृत मुलाकात हुई थी। लेकिन अब केवल रिटायर्ड चीनी अफसर और व्यापारी ही  मिलते हैं। उन्होंने कहा है कि मेरी मौत के बाद नए दलाई लामा के लिए इस साल के अंत में तिब्बती बौद्धों के बीच बैठक में इस पर मंथन होगा । दलाई लामा ने ये भी कहा कि यदि उन्हें वापस अपनी मातृभूमि जाने का मौका मिले तो वो चीनी विश्वविद्यालय में संबोधन करना चाहेंगे, लेकिन चीन में कम्युनिस्टों की सरकार होने तक ऐसा संभावना नहीं है।

बौद्ध धर्म गुरु दलाईलामा का कहना है कि चीन एक प्राचीन देश है, लेकिन उसकी राजनीतिक प्रणाली एकपक्षीय है, इसलिए मैं भारत में ही रहना पसंद करूंगा। उनका कहना है कि हमारी ताकत और मजबूती सत्य पर आधारित है, जबकि चीन की ताकत बंदूक पर आधारित है। उनका मानना है कि छोटे अंतराल के लिए बंदूक निर्णायक हो सकती है, लेकिन लंबे समय के लिए सत्य कहीं ज़्यादा मजबूत साबित होता है।    
दलाई लामा के इस बयान ने चीन में हड़ंकंप मच गया है। चीन सरकार ने दलाई लाम के अगले उत्तराधिकारी संबंधी बयान को खारिज कर दिया है। इस मामले में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा है कि तिब्बत का अगला दलाई लामा चीनी सरकार की तरफ से ही तय किया जाएगा। शुआंग का ये भी कहना है कि हम तिब्बती बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म प्रणाली के तरीकों का सम्मान करते हैं। लेकिन ये भी सत्य है कि दलाई लामा 1959 में तिब्बती विद्रोह के वक्त यहां से भारत चले गए थे।  

जानकारी के मुताबिक तिब्बत के लोग मानते हैं कि बौद्ध धर्म गुरु की मौत के बाद उसकी आत्मा एक बच्चे में समा जाती है और वो पुनर्जन्म लेता है। चीन के 60 लाख से भी ज़्यादा तिब्बती लोग दलाई लामा का सम्मान करते हैं, जबकि चीनी सरकार ने उनकी तस्वीरों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर बैन लगा रखा है।

आपको बता दें कि तिब्बत में बौद्ध धर्म के 14वें दलाई लामा ने भारत में अपने जीवन के 60 साल निर्वासित होकर बिताए हैं।  उन्हें 1959 में भारत ने शरण दी थी। उस दौरान दलाई लामा सेना की वर्दी फहन कर हिमालय को पार कर गए थे। आपको ये भी बता दें कि तिब्बत में सराहनीय कार्यों के लिए दलाई लामा को नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

मुख्य संवाददाता
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