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‘बाबा साहब’ के नाम पर राजनीति कर रही है बीजेपी- मायावती

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने यूपी में बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर के नाम में राम जी शब्द जोड़ने के यूपी की योगी सरकार के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। गुरुवार को दिल्ली में स्थित बीएसपी के केंद्रीय कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मायावती ने कहा कि यूपी में योगी सरकार ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर’ की जगह सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम ‘डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर’ करके केंद्र की मोदी सरकार की तरह केवल दिखावती और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाले काम करना चाहती है। जबकि बाबा साहब के करोड़ों अनुयाइयों पर देशभर में जुल्म हो रहे हैं और उनके संवैधानिक अधिकारों को या तो छीना जा रहा है या फिर उन्हें एक-एक करके निष्प्रभावी बनाया जा रहा है।

 

बीएसपी सुप्रीमों मायावती ने कहा कि जीवन भर अपने कठिन संघर्ष, त्याग और अनेकों प्रकार के बलिदानों के कारण ही बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर इस देश में करोड़ों शोषितो, दलितों और पिछड़ों के मसीहा हैं। वो लोगों के दिलों में बसते हैं, वो परमपूज्य हैं और उनके नाम पर बीजेपी द्वारा सस्ती मानसिकता के तहत दिखावटी और बनावटी राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है।  मायावती ने  ये भी कहा कि बीजेपी नेता और इनकी सरकारों के लोग  दलितों और पिछड़ों के वोट की खातिर बाबा साहब डॉ. अंबेडकर का नाम लेते रहते हैं और उनके नाम पर नाटकबाजी भी करते रहते हैं।

 

मायावती कहा कि देश में करोड़ों लोग श्रद्धा, स्नेह और सम्मान के तौर पर डॉ. भीमराव अंबेडकर को ’बाबा साहब’ कहकर संबोधित करते हैं या फिर उनके नाम के पहल परमपूज्य लगाते हैं, लेकिन बीजेपी एंड कपनी के लोगों को इससे उसी प्रकार तकलीफ होती है जैसे मुझे लोगों द्वारा ‘बहनजी’ कहकर संबोधित करने से उनके पेट में दर्द शुरू हो जाता है। ये सब उनकी जातिवादी मानसिकता नहीं तो और क्या है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गांधीजी को कोई उनके पूरे नाम ‘मोहनदास करमचंद गांधी’ से संबोधित नहीं करता इसके अलावा स्वयं बीजेपी वाले सरकारी विज्ञापनों आदि में नरेंद्र मोदी का पूरा नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ लिखते हैं क्या, तो फिर बाबा साहब डॉ. अंबेडकर के नाम पर स्वार्थ की राजनीति क्यों ?
 
आपको बता दें कि यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने राज्यपाल राम नाईक की सलाह पर सभी राजकीय अभिलेखों में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का पूरा नाम ‘डॉक्टर भीमराव रामजी आंबेडकर’ करने का फैसला किया है।  लखनऊ में बुधवार को सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव जीतेंद्र कुमार की ओर से जारी शासनादेश में सभी विभागों और इलाहबाद हाईकोर्ट, हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ को डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम बदलकर डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर करने के लिए आदेश दिया है।  इसके लिए संविधान की 8वीं अनुसूची की मूल प्रति को आधार बनाया गया है, जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर के डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के रूप में हस्ताक्षर सम्मिलित हैं। यहां ये भी बता दें कि ‘रामजी’ शब्द बाबा साहब के पिता का नाम था।   

यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि मैं एक मराठी हूं और बाबा साहेब भी मराठी थे। मराठी में पहले परंपरा थी कि बच्चे के नाम के बीच में पिता का नाम जोड़ा जाता था, इसीलिए डॉ. आंबेडकर  का पूरा नाम डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर है। राज्यपाल ने कहा कि संविधान में भी बाबा साहेब ने अपने हस्ताक्षर में पूरा नाम 'डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर' लिखा है। उन्होंने ये भी कहा कि हिंदी भाषा वाले राज्य में  बाबा साहब का नाम को  गलत तरीके से लिख रहे हैं। 

यहां सवाल उठाना भी जरूरी हो जाता है कि यूपी के राज्यपाल राम नाईक इससे पहले महाराष्ट्र में लंबे समय तक बीजेपी के सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं, लेकिन उस दौरान उन्हें बाबा साहब के नाम में गलती क्यों नजर नहीं आई थी। यहीं नहीं वो यूपी में भी कई साल से राज्यपाल के पद पर विराजमान हैं। आखिर उन्हें ये सब अभी क्यों याद आया है। इसके पीछे कुछ तो मंशा जरूर होगी। यहां हम ये भी कहेंगे की यूपी के राज्यपाल को राम नाईक को भी अपना पूरा नाम लिखना चाहिए। इसके साथ ही यूपी की बीजेपी सरकार को भी चाहिए कि वो बाबा साहब नाम पर सियासत करने के बजाय उनके विचारों का पालन करें और अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग के लोगों को संविधान में दिए गए अधिकारों को दिलाने में मदद करनी चाहिए।

मुख्य संवाददाता
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